तैयारी परीक्षा की
प्यारे बच्चों,
सभी की परीक्षाएँ शुरू होने वाली है और कुछ की शुरू हो चुकी हैं। उम्मीद है तुम सभी ने अपनी पढ़ाई ठीक तरह से कर ली होगी लेकिन कुछ बच्चे ऐसे भी हैं जो सालभर बिलकुल भी अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं देते।
दिनभर खेलना-कूदना, टीवी देखना और खाने में समय बिताना यही उनका शेड्यूल रहता है। पर वे बच्चे यह नहीं जानते के इस प्रकार से समय व्यतीत कर वे अपने ही भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
असल में पढ़ाई के बिना जीवन ही अधूरा है। आज का जमाना पुराने समय की तरह नहीं रहा। आज का युग प्रतिस्पर्द्धी युग है। जिसमें हर कोई आगे बढ़ने की चाह में लगा रहता है। लेकिन जो बच्चे अपने पढ़ाई के प्रति वफादार नहीं हैं उनसे मेरा यही कहना है कि वे सालभर जी तोड़ मेहनत करें, और परीक्षाओं के ऐनवक्त पर भी अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान लगाकर मन से पढ़ाई करें तो निश्चित ही अव्वल सूची में अपना स्थान बना सकते हैं। सो जुट जाओ परीक्षा की तैयारी में। गुड लक....!
तुम्हारा भैया
अरुण
शनिवार, 20 फ़रवरी 2010
बुधवार, 17 फ़रवरी 2010
पर्यटन
रंगीले राजस्थान का नागौर का किला
नागौर का किला
रंग-रंगीला राजस्थान अपनी नायाब खूबसूरती व रजवाड़ी शान के प्रतीक किलों और महलों के कारण सदा से ही पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा है। आज हम राजस्थान के मध्य भाग में बसे एक ऐसे ही पर्यटनस्थल 'नागौर' की सैर करते हैं तथा यह जानते हैं कि नागौर क्यों है पर्यटकों के लिए खास।
जोधपुर से लगभग 137 किमी उत्तर में स्थित है 'नागौर'। नागौर का किला दूर-दूर तक फैली रेत के बीच एक प्रकाशस्तंभ की तरह दिखाई देता है। 4थी शताब्दी में अस्तित्व में आया यह किला राजस्थान के अन्य किलों की तरह ही ऊँची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है।
नागौर की सुंदरता यहाँ के पुराने किलों व छतरियों में है, जिसका उत्कृष्ट उदाहरण हमें नागौर में प्रवेश करते ही देखने को मिलता है। इस नगरी में प्रवेश करने के लिए तीन मुख्य द्वार है, जिनके नाम देहली द्वार, त्रिपोलिया द्वार तथा नाकाश द्वार है। नागौर व उसके आसपास के पर्यटनस्थलों में प्रमुख नागौर का किला, तारकिन की दरगाह, वीर अमर सिंह राठौड़ की छतरी, मीरा बाई की जन्मस्थली मेड़ता, खींवसर किला, कुचामन किला आदि है।
किले के भीतर भी छोटे-बड़े सुंदर महल व छतरियाँ हैं, जो हमें राजस्थान के गौरवशाली इतिहास में खीच ले जाते हैं। किले के भीतर तीन सुंदर पैलेस हाडी रानी महल, शीश महल और बादल महल हैं, जो अपने सुंदर भित्ति चित्रों के कारण प्रसिद्ध हैं। इनके समीप ही एक मस्जिद है, जिसे मुगल शासक अकबर ने बनवाया था।
यहाँ पर सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती की एक दरगाह भी है। इसी के साथ ही किले के भीतर राजपूताना शैली में बनी हुई सैनिकों की सुंदर छतरियाँ भी हैं।
नागौर का मुख्य आकर्षण यहाँ का 'पशु मेला' है, जो यहाँ प्रतिवर्ष वृहद स्तर पर आयोजित किया जाता है। इस मेले में होने वाली मुर्गों की लड़ाई, ऊँट की दौड़, कठपुतली का खेल, राजस्थानी नृत्य आदि भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र होते हैं। इस मेले में खासतौर पर ऊँट, भेड़, घोड़े, गाय आदि पशुओं का क्रय-विक्रय होता है। सूर्य के अस्त होने के साथ ही नागौर के इस पशु मेले में यहाँ के पारंपरिक लोकनृत्य की गूँज एक सुंदर समा बाँध देती है।
सदा से पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा राजस्थान वाकई में अपने भीतर किलों व महलों के रूप में नायब खूबसूरती को समेटे हुए है। एक बार आप भी राजपूतों की इस धरती की सैर जरूर कीजिएगा।
नागौर है विभूतियों की भूमि :
मारवाड़ का नागौर एक ऐसा क्षेत्र है, जो कई ऐसी विभुतियों की जन्मस्थली है, जिन्होंने पूरी दुनिया में मारवाड़ की माटी का नाम रोशन किया। डिंगल और पिंगल भाषा में कई ग्रंथों की रचना करने वाले प्रसिद्ध कवि वृंद का जन्म नागौर के मेड़ता में हुआ था। मेड़ता कृष्ण भक्त मीराबाई की भी जन्मस्थली है। अकबर के नौ रत्नों में से अबुल फैज और अबुल फजल दोनों भाईयों का जन्म नागौर में ही हुआ था। यही नहीं अकबर के दरबारी बुद्धिमान बीरबल भी नागौर जिले के ही रहने वाले थें।
कैसे पहुँचे नागौर :
भारत की राजधानी नईदिल्ली व राजस्थान की राजधानी जयपुरClick here to see more news from this city से मेड़ता रोड़ के लिए कई बसे उपलब्ध है। मेड़ता रोड़ से नागौर की दूरी 82 किमी है, जिसे आप बस या टैक्सी से तय कर सकते हैं।
किस मौसम में जाएँ :
वैसे तो वर्षभर में कभी भी आप नागौर जा सकते हैं परंतु यहाँ जाने का अनुकूल समय फरवरी से मई तथा अगस्त से नवंबर माह के बीच का समय है।
नागौर का किला
रंग-रंगीला राजस्थान अपनी नायाब खूबसूरती व रजवाड़ी शान के प्रतीक किलों और महलों के कारण सदा से ही पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा है। आज हम राजस्थान के मध्य भाग में बसे एक ऐसे ही पर्यटनस्थल 'नागौर' की सैर करते हैं तथा यह जानते हैं कि नागौर क्यों है पर्यटकों के लिए खास।
जोधपुर से लगभग 137 किमी उत्तर में स्थित है 'नागौर'। नागौर का किला दूर-दूर तक फैली रेत के बीच एक प्रकाशस्तंभ की तरह दिखाई देता है। 4थी शताब्दी में अस्तित्व में आया यह किला राजस्थान के अन्य किलों की तरह ही ऊँची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है।
नागौर की सुंदरता यहाँ के पुराने किलों व छतरियों में है, जिसका उत्कृष्ट उदाहरण हमें नागौर में प्रवेश करते ही देखने को मिलता है। इस नगरी में प्रवेश करने के लिए तीन मुख्य द्वार है, जिनके नाम देहली द्वार, त्रिपोलिया द्वार तथा नाकाश द्वार है। नागौर व उसके आसपास के पर्यटनस्थलों में प्रमुख नागौर का किला, तारकिन की दरगाह, वीर अमर सिंह राठौड़ की छतरी, मीरा बाई की जन्मस्थली मेड़ता, खींवसर किला, कुचामन किला आदि है।
किले के भीतर भी छोटे-बड़े सुंदर महल व छतरियाँ हैं, जो हमें राजस्थान के गौरवशाली इतिहास में खीच ले जाते हैं। किले के भीतर तीन सुंदर पैलेस हाडी रानी महल, शीश महल और बादल महल हैं, जो अपने सुंदर भित्ति चित्रों के कारण प्रसिद्ध हैं। इनके समीप ही एक मस्जिद है, जिसे मुगल शासक अकबर ने बनवाया था।
यहाँ पर सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती की एक दरगाह भी है। इसी के साथ ही किले के भीतर राजपूताना शैली में बनी हुई सैनिकों की सुंदर छतरियाँ भी हैं।
नागौर का मुख्य आकर्षण यहाँ का 'पशु मेला' है, जो यहाँ प्रतिवर्ष वृहद स्तर पर आयोजित किया जाता है। इस मेले में होने वाली मुर्गों की लड़ाई, ऊँट की दौड़, कठपुतली का खेल, राजस्थानी नृत्य आदि भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र होते हैं। इस मेले में खासतौर पर ऊँट, भेड़, घोड़े, गाय आदि पशुओं का क्रय-विक्रय होता है। सूर्य के अस्त होने के साथ ही नागौर के इस पशु मेले में यहाँ के पारंपरिक लोकनृत्य की गूँज एक सुंदर समा बाँध देती है।
सदा से पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा राजस्थान वाकई में अपने भीतर किलों व महलों के रूप में नायब खूबसूरती को समेटे हुए है। एक बार आप भी राजपूतों की इस धरती की सैर जरूर कीजिएगा।
नागौर है विभूतियों की भूमि :
मारवाड़ का नागौर एक ऐसा क्षेत्र है, जो कई ऐसी विभुतियों की जन्मस्थली है, जिन्होंने पूरी दुनिया में मारवाड़ की माटी का नाम रोशन किया। डिंगल और पिंगल भाषा में कई ग्रंथों की रचना करने वाले प्रसिद्ध कवि वृंद का जन्म नागौर के मेड़ता में हुआ था। मेड़ता कृष्ण भक्त मीराबाई की भी जन्मस्थली है। अकबर के नौ रत्नों में से अबुल फैज और अबुल फजल दोनों भाईयों का जन्म नागौर में ही हुआ था। यही नहीं अकबर के दरबारी बुद्धिमान बीरबल भी नागौर जिले के ही रहने वाले थें।
कैसे पहुँचे नागौर :
भारत की राजधानी नईदिल्ली व राजस्थान की राजधानी जयपुरClick here to see more news from this city से मेड़ता रोड़ के लिए कई बसे उपलब्ध है। मेड़ता रोड़ से नागौर की दूरी 82 किमी है, जिसे आप बस या टैक्सी से तय कर सकते हैं।
किस मौसम में जाएँ :
वैसे तो वर्षभर में कभी भी आप नागौर जा सकते हैं परंतु यहाँ जाने का अनुकूल समय फरवरी से मई तथा अगस्त से नवंबर माह के बीच का समय है।
सोमवार, 15 फ़रवरी 2010
सितारों का अता-पता (A-C)
आमिर खान
धारिया हाउस, फर्स्ट फ्लोर
7 वाँ रास्ता, खार (वेस्ट) मुंबईClick here to see more news from this city - 52
आसिफ शेख
304/ए-1, मंगल नगर
बैंक ऑफ इण्डिया के सामने
यारी रोड, वर्सोवा, अंधेरी (वेस्ट) मुंबई - 61
अभिषेक बच्चन
प्रतीक्षा, 10 वाँ रास्ता जेवीपीडी स्कीम
जुहू, मुंबई - 49
एडम बेदी
बी/4, बीच हाउस पार्क
गाँधीग्राम रोड जुहू, मुंबई - 49
अदिति गोवात्रिकर
502, मेरीवेल, सेंट एंड्रयू रोड,
बांद्रा (वेस्ट), मुंबई - 50
आदित्य पंचोली
हेट बंगला, गाँधीग्राम रोड
जुहू, मुंबई - 49
आफताब शिवदासानी
22, मिस्त्री कोर्ट, सीसीआई क्लब के सामने
चर्चगेट, मुंबई - 20
ऐश्वर्या राय
12, लामेर, कांदेश्वरी रोड माउंट मेरी,
बांद्रा (वेस्ट) मुंबई - 50
अजय देवगन
ए/61, वर्षा, चौथा गुलमोहर एक्सटेंशन रोड
जेवीपीडी स्कीम जुहू, मुंबई - 49
आजिंक्य देव
ए-4, रितुराज अपार्टमेंट
एसएनडीटी कॉलेज के सामने,
जुहू रोड, सांताक्रुज (वेस्ट) मुंबई - 49
आकाश खुराना
19, डनहिल, डॉ अम्बेडकर रोड,
खार (वेस्ट), मुंबईClick here to see more news from this city - 52
अकबर खान
सोना विला, जस्सावाला वादी, एनक्लेव,
जे-49 डिस्को होटल के सामने
जुहू रोड, मुंबई - 49
अखिलेन्द्र मिश्रा
2-डी/602, पाटलीपुत्र नगर
जोगेश्वरी (वेस्ट), मुंबई - 102
अक्षय आनन्द
502/ए, चंचल बिल्डिंग कल्याण कॉम्पलेक्स,
यारी रोड, वर्सोवा अंधेरी (वेस्ट), मुंबई - 61
अक्षय खन्ना
13/सी, लिपालाजो, लिटिल गिब्स रोड,
मलाबार हिल्स, मुंबई - 6
अक्षय कुमार
सी विंग, स्कॉयपेन 11वीं मंजिल,
फ्लैट नं 1101 ओबेरॉय काम्पलैक्स
अंधेरी (वेस्ट) मुंबई - 53
आलोकनाथ
901, स्कॉयडेक, ओबेरॉय काम्पलैक्स लिंक रोड,
अंधेरी (वेस्ट) मुंबई - 58
अमन वर्मा
23/24, दूसरी मंजिल, सी विंग ट्रोयका,
तीसरा एक्सटेंशन रोड लोखंडावाला काम्पलैक्स
अंधेरी (वेस्ट), मुंबई - 53
अमर उपाध्याय
401, सुदर्शन नगर, खण्डेलवाल लेआउट एवरशाईन नगर,
लिंक रोड मलाड (वेस्ट), मुंबई - 64
अमिषा पटेल
शंकर बिल्डिंग, फ्लैट नंबर 51, पाँचवी मंजिल,
बी रोड चर्चगेट, मुंबई - 20
अमिता नांगिया
8 ए, सूर्यकिरण,
प्रताप सोसायटी के पीछे
अंधेरी (वेस्ट), मुंबईClick here to see more news from this city - 53
अमिताभ बच्चन
प्रतीक्षा, 10 वाँ रास्ता
जेवीपीडी स्कीम
जुहू, मुंबई - 49
अमोल पालेकर
401/402/जी, अलकनंदा शिवानंद गार्डन
कोथरुड, पुणे - 29
अनंग देसाई
3ए/302, ओकलैण्ड पार्क
यमुना नगर, लोखण्डवाला काम्प्लैक्स
अंधेरी (वेस्ट), मुंबई - 53
अनंत जोग
116/3977, गीत गोविन्द सोसायटी
तिलक नगर, चेम्बूर मुंबई - 89
अनंत महादेवन
बी/603, रत्नाकर, यारी रोड वर्सोवा,
अंधेरी (वेस्ट) मुंबई - 61
अनिल धवन
124, निभाना, पाली हिल
बांद्रा (वेस्ट) मुंबई - 50
अनिल कपूर
31, श्रृंगार प्रेसिडेंसी सोसायटी
7 वाँ रास्ता, जेवीपीडी स्कीम मुंबई - 49
अनिता गुहा
मिराबेले, लिंकिंग रोड
बांद्रा (वेस्ट) मुंबई - 50
अनिता कंवल
702/ए विंग,
ब्रोकहिल टॉवर्स क्रास रोड - 3,
लोखंडावाला काम्प्लैक्स
अंधेरी (वेस्ट), मुंबई - 53
अनिता राज
104, निभाना, पाली हिल
बांद्रा (वेस्ट), मुंबईClick here to see more news from this city - 50
अंजला झंवेरी
802, धनलक्ष्मी, एसवीपी नगर
म्हाडा कॉम्प्लैक्स
अंधेरी (वेस्ट) मुंबई - 53
अंजलि जठार
आनंद आश्रम, पहली मंजिल बिल्डिंग - 22,
पंडिता रामबाई रोड मुंबई - 7
अंजन श्रीवास्तव
बी/108, मनीष सोनल सोसायटी
38 मनीष नगर, 4 बंगला
अंधेरी (वेस्ट), मुंबई - 53
अंजना मुमताज
202, बीच हैवन
जुहू, मुंबई - 49
अंजू महेन्द्रू
पॉम ब्रीज़, प्लॉट 50, 9 वाँ रास्ता
जेवीपीडी स्कीम, मुंबई - 49
अन्नू कपूर
एफ/19, फ्लैट 504, ग्रीन क्रेस्ट
परसरामपुरा टॉवर के सामने यमुना नगर,
अंधेरी (वेस्ट) मुंबई - 53
अंतरा माली
88, 2री मंजिल म्हाडा कमर्शियल काम्पलैक्स
ओशिवारा, अंधेरी (वेस्ट)
मुंबई - 102
अनुपम खेर
जीआयजीआय अपार्टमेंट जुहू बीच,
जुहू मुंबई - 49
अनुराधा पटेल
1001, डी विंग, अभिषेक अपार्टमेंट
जुहू वर्सोवा रोड अंधेरी (वेस्ट) मुंबई - 58
अपर्णा सेन
सोनाली अपार्टमेंट, 8 वी मंजिल
बी/2, अलीपोर पार्क रोड
कोलकाता - 27
अपूर्व अग्निहोत्री
102/एफ, अमित नगर, यारी रोड वर्सोवा,
अंधेरी (वेस्ट) मुंबईClick here to see more news from this city - 61
अरबाज खान
3, गैलेक्सी अपार्टमेंट, बीजे रोड बैंडस्टेण्ड,
बांद्रा (वेस्ट) मुंबई - 50
अर्चना पूरनसिंह
702/बी-1, सुन्दरवन कॉम्प्लैक्स
लोखंडावाला रोड,
अंधेरी (वेस्ट) मुंबई - 53
आरिफ ज़कारिया
97, एलमेडा रोड
बांद्रा (वेस्ट) मुंबई - 50
अर्जुन रामपाल
17 वाँ डायमंड अपार्टमेंट
माउंट मैरी रोड
बांद्रा (वेस्ट), मुंबई - 50
अरूणा ईरानी
603-बी, गज़दर अपार्टमेंट जुहू होटल के पास
जुहू, मुंबई - 49
अरशद वारसी
903, शिव ज्योति, पाँच मार्ग
यारी रोड, वर्सोवा
अंधेरी (वेस्ट), मुंबई - 61
अरूण गोविल
305, अमरनाथ टॉवर यारी रोड
अंधेरी (वेस्ट) मुंबई - 53
आशा पारेख
ए/102, फेअरशोर अपार्टमेंट जुहू तारा रोड,
होटल सी प्रिंसेस के पास
जुहू, मुंबई - 49
आशीष विद्यार्थी
फ्लैट-213, युगधर्म सबकुछ सुपर मार्केट के पास
लिंक रोड, मलाड (वेस्ट) मुंबईClick here to see more news from this city - 95
अशोक सराफ
फ्लैट नंबर - 1305/1306 इंद्रदर्शन,
लोखंडावाला काम्प्लैक्स तारापोर गार्डन के पास
अंधेरी (वेस्ट) मुंबई - 53
आशुतोष राणा
503, पेलिकान अपार्टमेंट गुलमोहर गार्डन के सामने
यारी रोड, अंधेरी (वेस्ट)
मुंबई - 61
अश्विनी भावे
ए/9, ग्रीन व्यू, सबर्बन को-ऑप सोसायटी
शिव सृष्टि, कुर्ला (ईस्ट)
मुंबई - 24
असरानी
बी/3, बीच हाउसिंग सोसायटी
गाँधीग्राम रोड जुहू, मुंबई - 49
अतुल अग्निहोत्री
6, अश्विनी, पाली माला रोड
मुंबई - 50
अविनाश वाधवान
1901, धीरज गौरव हाईट्स ऑफ लिंक रोड,
हुंडाई शो रूम के पीछे
अंधेरी (वेस्ट), मुंबई - 61
अवतार गिल
प्लाट नं 1, रनवन शॉपिंग सेंटर 15 वाँ रास्ता,
चेम्बूर मुंबई - 1
आयशा जुल्का
186, आराम नगर नं 2, वर्सोवा
अंधेरी (वेस्ट) मुंबई - 61
अयूब खान
बी - 301, स्वप्न आकार,
फ्लैट नं 83/डी यारी रोड, वर्सोवा
अंधेरी (वेस्ट), मुंबई - 61
धारिया हाउस, फर्स्ट फ्लोर
7 वाँ रास्ता, खार (वेस्ट) मुंबईClick here to see more news from this city - 52
आसिफ शेख
304/ए-1, मंगल नगर
बैंक ऑफ इण्डिया के सामने
यारी रोड, वर्सोवा, अंधेरी (वेस्ट) मुंबई - 61
अभिषेक बच्चन
प्रतीक्षा, 10 वाँ रास्ता जेवीपीडी स्कीम
जुहू, मुंबई - 49
एडम बेदी
बी/4, बीच हाउस पार्क
गाँधीग्राम रोड जुहू, मुंबई - 49
अदिति गोवात्रिकर
502, मेरीवेल, सेंट एंड्रयू रोड,
बांद्रा (वेस्ट), मुंबई - 50
आदित्य पंचोली
हेट बंगला, गाँधीग्राम रोड
जुहू, मुंबई - 49
आफताब शिवदासानी
22, मिस्त्री कोर्ट, सीसीआई क्लब के सामने
चर्चगेट, मुंबई - 20
ऐश्वर्या राय
12, लामेर, कांदेश्वरी रोड माउंट मेरी,
बांद्रा (वेस्ट) मुंबई - 50
अजय देवगन
ए/61, वर्षा, चौथा गुलमोहर एक्सटेंशन रोड
जेवीपीडी स्कीम जुहू, मुंबई - 49
आजिंक्य देव
ए-4, रितुराज अपार्टमेंट
एसएनडीटी कॉलेज के सामने,
जुहू रोड, सांताक्रुज (वेस्ट) मुंबई - 49
आकाश खुराना
19, डनहिल, डॉ अम्बेडकर रोड,
खार (वेस्ट), मुंबईClick here to see more news from this city - 52
अकबर खान
सोना विला, जस्सावाला वादी, एनक्लेव,
जे-49 डिस्को होटल के सामने
जुहू रोड, मुंबई - 49
अखिलेन्द्र मिश्रा
2-डी/602, पाटलीपुत्र नगर
जोगेश्वरी (वेस्ट), मुंबई - 102
अक्षय आनन्द
502/ए, चंचल बिल्डिंग कल्याण कॉम्पलेक्स,
यारी रोड, वर्सोवा अंधेरी (वेस्ट), मुंबई - 61
अक्षय खन्ना
13/सी, लिपालाजो, लिटिल गिब्स रोड,
मलाबार हिल्स, मुंबई - 6
अक्षय कुमार
सी विंग, स्कॉयपेन 11वीं मंजिल,
फ्लैट नं 1101 ओबेरॉय काम्पलैक्स
अंधेरी (वेस्ट) मुंबई - 53
आलोकनाथ
901, स्कॉयडेक, ओबेरॉय काम्पलैक्स लिंक रोड,
अंधेरी (वेस्ट) मुंबई - 58
अमन वर्मा
23/24, दूसरी मंजिल, सी विंग ट्रोयका,
तीसरा एक्सटेंशन रोड लोखंडावाला काम्पलैक्स
अंधेरी (वेस्ट), मुंबई - 53
अमर उपाध्याय
401, सुदर्शन नगर, खण्डेलवाल लेआउट एवरशाईन नगर,
लिंक रोड मलाड (वेस्ट), मुंबई - 64
अमिषा पटेल
शंकर बिल्डिंग, फ्लैट नंबर 51, पाँचवी मंजिल,
बी रोड चर्चगेट, मुंबई - 20
अमिता नांगिया
8 ए, सूर्यकिरण,
प्रताप सोसायटी के पीछे
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अमिताभ बच्चन
प्रतीक्षा, 10 वाँ रास्ता
जेवीपीडी स्कीम
जुहू, मुंबई - 49
अमोल पालेकर
401/402/जी, अलकनंदा शिवानंद गार्डन
कोथरुड, पुणे - 29
अनंग देसाई
3ए/302, ओकलैण्ड पार्क
यमुना नगर, लोखण्डवाला काम्प्लैक्स
अंधेरी (वेस्ट), मुंबई - 53
अनंत जोग
116/3977, गीत गोविन्द सोसायटी
तिलक नगर, चेम्बूर मुंबई - 89
अनंत महादेवन
बी/603, रत्नाकर, यारी रोड वर्सोवा,
अंधेरी (वेस्ट) मुंबई - 61
अनिल धवन
124, निभाना, पाली हिल
बांद्रा (वेस्ट) मुंबई - 50
अनिल कपूर
31, श्रृंगार प्रेसिडेंसी सोसायटी
7 वाँ रास्ता, जेवीपीडी स्कीम मुंबई - 49
अनिता गुहा
मिराबेले, लिंकिंग रोड
बांद्रा (वेस्ट) मुंबई - 50
अनिता कंवल
702/ए विंग,
ब्रोकहिल टॉवर्स क्रास रोड - 3,
लोखंडावाला काम्प्लैक्स
अंधेरी (वेस्ट), मुंबई - 53
अनिता राज
104, निभाना, पाली हिल
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अंजला झंवेरी
802, धनलक्ष्मी, एसवीपी नगर
म्हाडा कॉम्प्लैक्स
अंधेरी (वेस्ट) मुंबई - 53
अंजलि जठार
आनंद आश्रम, पहली मंजिल बिल्डिंग - 22,
पंडिता रामबाई रोड मुंबई - 7
अंजन श्रीवास्तव
बी/108, मनीष सोनल सोसायटी
38 मनीष नगर, 4 बंगला
अंधेरी (वेस्ट), मुंबई - 53
अंजना मुमताज
202, बीच हैवन
जुहू, मुंबई - 49
अंजू महेन्द्रू
पॉम ब्रीज़, प्लॉट 50, 9 वाँ रास्ता
जेवीपीडी स्कीम, मुंबई - 49
अन्नू कपूर
एफ/19, फ्लैट 504, ग्रीन क्रेस्ट
परसरामपुरा टॉवर के सामने यमुना नगर,
अंधेरी (वेस्ट) मुंबई - 53
अंतरा माली
88, 2री मंजिल म्हाडा कमर्शियल काम्पलैक्स
ओशिवारा, अंधेरी (वेस्ट)
मुंबई - 102
अनुपम खेर
जीआयजीआय अपार्टमेंट जुहू बीच,
जुहू मुंबई - 49
अनुराधा पटेल
1001, डी विंग, अभिषेक अपार्टमेंट
जुहू वर्सोवा रोड अंधेरी (वेस्ट) मुंबई - 58
अपर्णा सेन
सोनाली अपार्टमेंट, 8 वी मंजिल
बी/2, अलीपोर पार्क रोड
कोलकाता - 27
अपूर्व अग्निहोत्री
102/एफ, अमित नगर, यारी रोड वर्सोवा,
अंधेरी (वेस्ट) मुंबईClick here to see more news from this city - 61
अरबाज खान
3, गैलेक्सी अपार्टमेंट, बीजे रोड बैंडस्टेण्ड,
बांद्रा (वेस्ट) मुंबई - 50
अर्चना पूरनसिंह
702/बी-1, सुन्दरवन कॉम्प्लैक्स
लोखंडावाला रोड,
अंधेरी (वेस्ट) मुंबई - 53
आरिफ ज़कारिया
97, एलमेडा रोड
बांद्रा (वेस्ट) मुंबई - 50
अर्जुन रामपाल
17 वाँ डायमंड अपार्टमेंट
माउंट मैरी रोड
बांद्रा (वेस्ट), मुंबई - 50
अरूणा ईरानी
603-बी, गज़दर अपार्टमेंट जुहू होटल के पास
जुहू, मुंबई - 49
अरशद वारसी
903, शिव ज्योति, पाँच मार्ग
यारी रोड, वर्सोवा
अंधेरी (वेस्ट), मुंबई - 61
अरूण गोविल
305, अमरनाथ टॉवर यारी रोड
अंधेरी (वेस्ट) मुंबई - 53
आशा पारेख
ए/102, फेअरशोर अपार्टमेंट जुहू तारा रोड,
होटल सी प्रिंसेस के पास
जुहू, मुंबई - 49
आशीष विद्यार्थी
फ्लैट-213, युगधर्म सबकुछ सुपर मार्केट के पास
लिंक रोड, मलाड (वेस्ट) मुंबईClick here to see more news from this city - 95
अशोक सराफ
फ्लैट नंबर - 1305/1306 इंद्रदर्शन,
लोखंडावाला काम्प्लैक्स तारापोर गार्डन के पास
अंधेरी (वेस्ट) मुंबई - 53
आशुतोष राणा
503, पेलिकान अपार्टमेंट गुलमोहर गार्डन के सामने
यारी रोड, अंधेरी (वेस्ट)
मुंबई - 61
अश्विनी भावे
ए/9, ग्रीन व्यू, सबर्बन को-ऑप सोसायटी
शिव सृष्टि, कुर्ला (ईस्ट)
मुंबई - 24
असरानी
बी/3, बीच हाउसिंग सोसायटी
गाँधीग्राम रोड जुहू, मुंबई - 49
अतुल अग्निहोत्री
6, अश्विनी, पाली माला रोड
मुंबई - 50
अविनाश वाधवान
1901, धीरज गौरव हाईट्स ऑफ लिंक रोड,
हुंडाई शो रूम के पीछे
अंधेरी (वेस्ट), मुंबई - 61
अवतार गिल
प्लाट नं 1, रनवन शॉपिंग सेंटर 15 वाँ रास्ता,
चेम्बूर मुंबई - 1
आयशा जुल्का
186, आराम नगर नं 2, वर्सोवा
अंधेरी (वेस्ट) मुंबई - 61
अयूब खान
बी - 301, स्वप्न आकार,
फ्लैट नं 83/डी यारी रोड, वर्सोवा
अंधेरी (वेस्ट), मुंबई - 61
सितारों का अता-पता (एस)
सदाशिव अमरापुरकर
201, पंचधाना 'ए' विंग,
ऑफिस यारी रोड, वरसोवा, अंधेरी (पश्चिम)
मुंबई-61
सचिन
बी/609, पिअरी अपार्टमेंट्स, स्वामी समर्थ
नगर, क्रास रोड, नंबर 3, लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स,
अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-58
साधना सिंह
बंगलो नं. 14, ब्राइटन टावर,
लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स,
अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-58
सईद जाफरी
सजल फ्लैट 503, वीरा देसाई रोड,
अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-58
सैफ अली खान
बेलस्कॉट बंगलो नं. 5,
लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स,
अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-58
सलमान खान
3, गैलेक्सी अपार्टमेंट, बी.जे.रोड,
बंद स्टैंड, बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-50
समीरा रेड्डी
9/बी, चाँद टेरेस, सेंट एंड्रयूज रोड,
होली फैमिली हॉस्पिटल के सामने,
बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-50
संजय दत्त
58, नरगिस दत्त रोड, पाली हिल,
बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-50
संजय कपूर
18, अर्जुन हाउस, मैगनम टावर,
लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स,
अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-58
सनोबर कबीर
201, शिव करण, ऑफिस यारी रोड,
7 बंगलोज, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-61
सतीश कौशिक
बी/34, ट्रैंकिल ट्रीट, यारी रोड,
वरसोवा, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-61
सतीश शाह
201/202, गुरुकुल, 14, कलानगर,
बांद्रा (पूर्व), मुंबई-51
सौरभ शुक्ला
एफ-19/102, ग्रीन क्रेस्ट, यमुना नगर,
ओशिवारा, लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स,
अंधेरी (पश्चिम)
मुंबई-53
शबाना आजमी
702, सागर सम्राट,
ग्रीनफील्ड रोड, जुहू,
मुंबई-49
शाबाज खान
फ्लैट.-604,
बीआईडीजी-11, स्टारशिप म्हाडा,
ओशिवारा, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-53
शाहरुख खान
मन्नत, 44, लेक्स एंड,
बंदस्टैंड, बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-53
शाहिद कपूर
ए/201, वुडलैंड अपार्टमेंट्स
लोखंडवाला (पश्चिम),
मुंबई-53
शक्ति कपूर
7वीं मंजिल, पाम बीच,
मुंबई-49
शमा सिकंदर
ए-17/104, अल-कैफ, मिल्लत नगर,
लोखंडवाला के निकट, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-53
शम्मी कपूर
ब्लू हेवन, मलाबार हिल, माउंट प्लीजंट रोड,
मलाबार हिल,
मुंबई-6
शरत सक्सेना
8/ए, तक्षशिला प्लॉट 21,
महाकाली केव्ज रोड, अंधेरी (पूर्व)
मुंबई-93
शरबानी मुखर्जी
ग्रोट्टो विला, 2री हसनाबाद लेन,
सांताक्रुज (पश्चिम),
मुंबई-54
शशि कपूर
112, एटलस अपार्टमेंट्स,
जमुनादास मेहता रोड,
मुंबई-6
शशिकला
16, वल्लभ-बी, सेजल पार्क,
न्यू लिंक रोड, गोरेगाँव (पश्चिम),
मुंबई-104
शत्रुघ्न सिन्हा
49, रामायण, नूतन लक्ष्मी सोसायटी,
9वाँ रोड, जेवीपीडी स्कीम,
मुंबई-49
शीबा
2502, सिल्वर आर्क, शास्त्री नगर,
अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-58
शैफाली छाया
702, यूनिक पार्क, पद्मा नगर,
न्यू लिंक रोड, मलाड (पश्चिम),
मुंबई-64
शेखर कपूर
ए-5, बीच हाउस, गाँधीग्राम रोड,
हरे रामा हरे कृष्ण के सामने,
जुहू, मुंबई-49
शिखा स्वरूप
309, बी/1, सी विंग, देवाडिगा सोसायटी,
ओम नगर, अंधेरी (पूर्व),
मुंबई-99
शिल्पा शेट्टी
700/डी, आदित्य अपार्टमेंट्स, वरसोवा
टेलीफोन एक्सचेंज के सामने, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-16
शुभा खोटे
शुभांगिनी मिलिट्री रोड,
आर्मी ऑफिस के सामने
इंस्टिट्यूट, जुहू, मुंबई-49
सिमी ग्रेवाल
पलवोवा, 6ठी मंजिल, लिटिल गिब्स रोड,
मलाबार हिल, मुंबई-6
सोनाली बेंद्रे
रॉयल एकार्ड, बीआईडीजी-4, फ्लैट-62
लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-53
सोनाली कुलकर्णी
403, सागर दर्शन, चौथी मंजिल,
जुहू वरसोवा लिंक रोड,
अंधेरी (पश्चिम)मुंबई-53
सोनू निगम
1201, अमरनाथ टावर अमरनाथ कॉम्प्लेक्स,
7 बंगलोज, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-61
श्रीदेवी
लेन्स व्यू बीआईडीजी, 5वीं मंजिल,
प्रथमेश स्कूल के निकट,
वीरा देसाई रोड, एक्सटेंशन,
अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-53
सुचित्रा सेन
52/4/1, प्रथमेश बरुआ
सारणी,
कोलकाता-700019
सुदेश बेरी
11/डी/विलेरॉय पार्क, ठाकुर विलेज,
कांडीवलि (पूर्व), मुंबई-101
सोहैल खान
3, गैलेक्सी अपार्टमेंट्स, बी.जे.रोड,
बंद स्टैंड, बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-50
सुनील शेट्टी
18-बी, पृथ्वी अपार्टमेंट्स, अल्टामाउंट रोड,
मुंबई-26
सुनीता राव
802, विमल स्मृति, प्लॉट नंबर 770,
डिप्टी घांती रोड, दादर पारसी कॉलोनी,
दादर (पूर्व), मुंबई-14
सन्नी देओल
प्लॉट नंबर 22, 11वाँ रोड
जेवीपीडी स्कीम,
मुंबई-49
सुप्रिया पाठक
61/62, स्काय हेवन, यारी रोड,
वरसोवा, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-61
सुप्रिया पिलगाँवकर
बी/6-9, पियरी अपार्टमेंट्स, स्वामी समर्थ
क्रास रोड-3, लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स, अंधेरी (पश्चिम)
मुंबई-53
सुरेश ओबेरॉय
5, करतार कुंज, गोल्डन बीच,
रुईया पार्क, जुहू, नियर हरे राम हरे कृष्ण मंदिर,
मुंबई-49
सुष्मिता मुखर्जी
रो हाउस, 11, क्रिस्टल पैलेस,
लिंक रोड, मलाड (पश्चिम),
मुंबई-64
सुष्मिता सेन
601, सद्गुरु सुंदरी अपार्टमेंट्स,
डॉ. अंबेडकर रोड, बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-50
स्वरूप संपत
11, सी ब्रीज, 13वाँ रोड,
जेवीपीडी स्कीम,
मुंबई-49
संजय खान
संजय प्लाजा, ए.बी.नायर रोड,
जुहू, मुंबई-49
201, पंचधाना 'ए' विंग,
ऑफिस यारी रोड, वरसोवा, अंधेरी (पश्चिम)
मुंबई-61
सचिन
बी/609, पिअरी अपार्टमेंट्स, स्वामी समर्थ
नगर, क्रास रोड, नंबर 3, लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स,
अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-58
साधना सिंह
बंगलो नं. 14, ब्राइटन टावर,
लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स,
अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-58
सईद जाफरी
सजल फ्लैट 503, वीरा देसाई रोड,
अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-58
सैफ अली खान
बेलस्कॉट बंगलो नं. 5,
लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स,
अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-58
सलमान खान
3, गैलेक्सी अपार्टमेंट, बी.जे.रोड,
बंद स्टैंड, बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-50
समीरा रेड्डी
9/बी, चाँद टेरेस, सेंट एंड्रयूज रोड,
होली फैमिली हॉस्पिटल के सामने,
बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-50
संजय दत्त
58, नरगिस दत्त रोड, पाली हिल,
बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-50
संजय कपूर
18, अर्जुन हाउस, मैगनम टावर,
लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स,
अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-58
सनोबर कबीर
201, शिव करण, ऑफिस यारी रोड,
7 बंगलोज, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-61
सतीश कौशिक
बी/34, ट्रैंकिल ट्रीट, यारी रोड,
वरसोवा, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-61
सतीश शाह
201/202, गुरुकुल, 14, कलानगर,
बांद्रा (पूर्व), मुंबई-51
सौरभ शुक्ला
एफ-19/102, ग्रीन क्रेस्ट, यमुना नगर,
ओशिवारा, लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स,
अंधेरी (पश्चिम)
मुंबई-53
शबाना आजमी
702, सागर सम्राट,
ग्रीनफील्ड रोड, जुहू,
मुंबई-49
शाबाज खान
फ्लैट.-604,
बीआईडीजी-11, स्टारशिप म्हाडा,
ओशिवारा, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-53
शाहरुख खान
मन्नत, 44, लेक्स एंड,
बंदस्टैंड, बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-53
शाहिद कपूर
ए/201, वुडलैंड अपार्टमेंट्स
लोखंडवाला (पश्चिम),
मुंबई-53
शक्ति कपूर
7वीं मंजिल, पाम बीच,
मुंबई-49
शमा सिकंदर
ए-17/104, अल-कैफ, मिल्लत नगर,
लोखंडवाला के निकट, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-53
शम्मी कपूर
ब्लू हेवन, मलाबार हिल, माउंट प्लीजंट रोड,
मलाबार हिल,
मुंबई-6
शरत सक्सेना
8/ए, तक्षशिला प्लॉट 21,
महाकाली केव्ज रोड, अंधेरी (पूर्व)
मुंबई-93
शरबानी मुखर्जी
ग्रोट्टो विला, 2री हसनाबाद लेन,
सांताक्रुज (पश्चिम),
मुंबई-54
शशि कपूर
112, एटलस अपार्टमेंट्स,
जमुनादास मेहता रोड,
मुंबई-6
शशिकला
16, वल्लभ-बी, सेजल पार्क,
न्यू लिंक रोड, गोरेगाँव (पश्चिम),
मुंबई-104
शत्रुघ्न सिन्हा
49, रामायण, नूतन लक्ष्मी सोसायटी,
9वाँ रोड, जेवीपीडी स्कीम,
मुंबई-49
शीबा
2502, सिल्वर आर्क, शास्त्री नगर,
अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-58
शैफाली छाया
702, यूनिक पार्क, पद्मा नगर,
न्यू लिंक रोड, मलाड (पश्चिम),
मुंबई-64
शेखर कपूर
ए-5, बीच हाउस, गाँधीग्राम रोड,
हरे रामा हरे कृष्ण के सामने,
जुहू, मुंबई-49
शिखा स्वरूप
309, बी/1, सी विंग, देवाडिगा सोसायटी,
ओम नगर, अंधेरी (पूर्व),
मुंबई-99
शिल्पा शेट्टी
700/डी, आदित्य अपार्टमेंट्स, वरसोवा
टेलीफोन एक्सचेंज के सामने, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-16
शुभा खोटे
शुभांगिनी मिलिट्री रोड,
आर्मी ऑफिस के सामने
इंस्टिट्यूट, जुहू, मुंबई-49
सिमी ग्रेवाल
पलवोवा, 6ठी मंजिल, लिटिल गिब्स रोड,
मलाबार हिल, मुंबई-6
सोनाली बेंद्रे
रॉयल एकार्ड, बीआईडीजी-4, फ्लैट-62
लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-53
सोनाली कुलकर्णी
403, सागर दर्शन, चौथी मंजिल,
जुहू वरसोवा लिंक रोड,
अंधेरी (पश्चिम)मुंबई-53
सोनू निगम
1201, अमरनाथ टावर अमरनाथ कॉम्प्लेक्स,
7 बंगलोज, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-61
श्रीदेवी
लेन्स व्यू बीआईडीजी, 5वीं मंजिल,
प्रथमेश स्कूल के निकट,
वीरा देसाई रोड, एक्सटेंशन,
अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-53
सुचित्रा सेन
52/4/1, प्रथमेश बरुआ
सारणी,
कोलकाता-700019
सुदेश बेरी
11/डी/विलेरॉय पार्क, ठाकुर विलेज,
कांडीवलि (पूर्व), मुंबई-101
सोहैल खान
3, गैलेक्सी अपार्टमेंट्स, बी.जे.रोड,
बंद स्टैंड, बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-50
सुनील शेट्टी
18-बी, पृथ्वी अपार्टमेंट्स, अल्टामाउंट रोड,
मुंबई-26
सुनीता राव
802, विमल स्मृति, प्लॉट नंबर 770,
डिप्टी घांती रोड, दादर पारसी कॉलोनी,
दादर (पूर्व), मुंबई-14
सन्नी देओल
प्लॉट नंबर 22, 11वाँ रोड
जेवीपीडी स्कीम,
मुंबई-49
सुप्रिया पाठक
61/62, स्काय हेवन, यारी रोड,
वरसोवा, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-61
सुप्रिया पिलगाँवकर
बी/6-9, पियरी अपार्टमेंट्स, स्वामी समर्थ
क्रास रोड-3, लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स, अंधेरी (पश्चिम)
मुंबई-53
सुरेश ओबेरॉय
5, करतार कुंज, गोल्डन बीच,
रुईया पार्क, जुहू, नियर हरे राम हरे कृष्ण मंदिर,
मुंबई-49
सुष्मिता मुखर्जी
रो हाउस, 11, क्रिस्टल पैलेस,
लिंक रोड, मलाड (पश्चिम),
मुंबई-64
सुष्मिता सेन
601, सद्गुरु सुंदरी अपार्टमेंट्स,
डॉ. अंबेडकर रोड, बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-50
स्वरूप संपत
11, सी ब्रीज, 13वाँ रोड,
जेवीपीडी स्कीम,
मुंबई-49
संजय खान
संजय प्लाजा, ए.बी.नायर रोड,
जुहू, मुंबई-49
सितारों का अता-पता (टी - ज़ेड)
तब्बू
1-बी/301, ग्रीन एकड्स, लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-53
तनिशा
उषा किरण एम.एल.धानुकर मार्ग
मुंबई-26
तनूजा
उषा किरण एम.एल.धानुकर मार्ग
मुंबई-26
तारा देशपांडे
बी-21, जेवर महल, 66,
मरीन ड्राइव,
मुंबई-20
तारा शर्मा1,गुडस्टान, 34, भुलाभाई देसाई फिड,
मुंबई-26
तेजस्विनी कोल्हापुरे
अभिनव बंगलो,
गाँधीग्राम रोड, जुहू
मुंबई-49
टीनू आनंद101, लक्ष्यदीप, चौथा गुलमोहर क्रास रोड,
जेवीपीडी स्कीम, मुंबई-49
टॉम अल्टर
चौथी मंजिल, मेथोडिस्ट सेंटर-21
वायएमसीए रोड,
मुंबई-6
तुषार कपूर
26, ग्रेटर बॉम्बे को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी,
गुलमोहर क्रॉस रोड, नंबर 5, जेवीपीडी स्कीम,
जुहू, मुंबई-49
उदय चोपड़ा5, शाह इंडस्ट्रियल एस्टेट,
वीरा देसाई रोड, फन रिपब्लिक के बगल में,
अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-53
उपासना सिंह
प्लॉट-54, संतोष बंगलो, आरएससी-4,
एसवीपी नगर, अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-53
उर्मिला मातोंडकर602/बी, परसरामपुरिया टावर,
यमुना नगर, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-53
वर्षा उसगांवकर
वचन बंगलो, मीरा बाग-14,
सांताक्रुज (पश्चिम)
मुंबई-54
विजू खोटे
55-एच, गोरेगाँवकर रोड,
गामदेवी, मुंबई-7
विकास कलंत्री
2, वहेदना अपार्टमेंट्स,
75, हिल रोड, बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-50
विक्रम गोखले
104/ए, मातेश्री रेसीडेंसी,
65, प्रार्थना समाज रोड,
विले पार्ले (पूर्व), मुंबई-57
विनोद खन्ना
13/सी, हिपाइआजो, लिटिल गिब्स रोड,
मलाबार हिल, मुंबई-6
विवेक मुशरान
301, मसाबिले, नियर रिक अश.,
पाली रोड बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-50
विवेक ओबेरॉय
301, बंगलो 5, करतार कुंज,
गोल्डन बीच, रुइया पार्क,
जुहू, मुंबई-49
विवेक वासवानी
141/डी, दियामाल पार्क,
कफी परेड,
मुंबई-5
वृजेश हिरजी
1/4, जुहू विशाल सोसायटी,
नार्थ-साउथ रोड नंबर 5,
जेवीपीडी अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-49
वहीदा रहमान
साहित गैलेक्सी अपार्टमेंट्स, एबीजी रोड,
बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-50
यश टोंक
फ्लैट नंबर 40, प्लॉट नंबर 225,
रत्नादीप चारकोप मार्केट, कांडीवलि (पश्चिम),
मुंबई-67
यशपाल शर्मा003-बी, विंग, बी-37, सुरभि
गोकुलधाम, गोरेगाँव (पूर्व),
मुंबई-63
युक्ता मुखी
310/बी, एक्सलेंसी, लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स,
अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-53
जरीना वहाब
फ्लैट-103, मैग्नम ओपस, नाना नानी पार्क के सामने,
7 बंगलोज, वरसोवा,
अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-61
जीनत अमान
सोनी अपार्टमेंट, 19, रिबेलो रोड,
मेहबूब स्टूडियो के सामने,
माउंट मैरी हिल,
बांद्रा (पश्चिम), मुंबई-50
1-बी/301, ग्रीन एकड्स, लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-53
तनिशा
उषा किरण एम.एल.धानुकर मार्ग
मुंबई-26
तनूजा
उषा किरण एम.एल.धानुकर मार्ग
मुंबई-26
तारा देशपांडे
बी-21, जेवर महल, 66,
मरीन ड्राइव,
मुंबई-20
तारा शर्मा1,गुडस्टान, 34, भुलाभाई देसाई फिड,
मुंबई-26
तेजस्विनी कोल्हापुरे
अभिनव बंगलो,
गाँधीग्राम रोड, जुहू
मुंबई-49
टीनू आनंद101, लक्ष्यदीप, चौथा गुलमोहर क्रास रोड,
जेवीपीडी स्कीम, मुंबई-49
टॉम अल्टर
चौथी मंजिल, मेथोडिस्ट सेंटर-21
वायएमसीए रोड,
मुंबई-6
तुषार कपूर
26, ग्रेटर बॉम्बे को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी,
गुलमोहर क्रॉस रोड, नंबर 5, जेवीपीडी स्कीम,
जुहू, मुंबई-49
उदय चोपड़ा5, शाह इंडस्ट्रियल एस्टेट,
वीरा देसाई रोड, फन रिपब्लिक के बगल में,
अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-53
उपासना सिंह
प्लॉट-54, संतोष बंगलो, आरएससी-4,
एसवीपी नगर, अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-53
उर्मिला मातोंडकर602/बी, परसरामपुरिया टावर,
यमुना नगर, अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-53
वर्षा उसगांवकर
वचन बंगलो, मीरा बाग-14,
सांताक्रुज (पश्चिम)
मुंबई-54
विजू खोटे
55-एच, गोरेगाँवकर रोड,
गामदेवी, मुंबई-7
विकास कलंत्री
2, वहेदना अपार्टमेंट्स,
75, हिल रोड, बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-50
विक्रम गोखले
104/ए, मातेश्री रेसीडेंसी,
65, प्रार्थना समाज रोड,
विले पार्ले (पूर्व), मुंबई-57
विनोद खन्ना
13/सी, हिपाइआजो, लिटिल गिब्स रोड,
मलाबार हिल, मुंबई-6
विवेक मुशरान
301, मसाबिले, नियर रिक अश.,
पाली रोड बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-50
विवेक ओबेरॉय
301, बंगलो 5, करतार कुंज,
गोल्डन बीच, रुइया पार्क,
जुहू, मुंबई-49
विवेक वासवानी
141/डी, दियामाल पार्क,
कफी परेड,
मुंबई-5
वृजेश हिरजी
1/4, जुहू विशाल सोसायटी,
नार्थ-साउथ रोड नंबर 5,
जेवीपीडी अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-49
वहीदा रहमान
साहित गैलेक्सी अपार्टमेंट्स, एबीजी रोड,
बांद्रा (पश्चिम),
मुंबई-50
यश टोंक
फ्लैट नंबर 40, प्लॉट नंबर 225,
रत्नादीप चारकोप मार्केट, कांडीवलि (पश्चिम),
मुंबई-67
यशपाल शर्मा003-बी, विंग, बी-37, सुरभि
गोकुलधाम, गोरेगाँव (पूर्व),
मुंबई-63
युक्ता मुखी
310/बी, एक्सलेंसी, लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स,
अंधेरी (पश्चिम),
मुंबई-53
जरीना वहाब
फ्लैट-103, मैग्नम ओपस, नाना नानी पार्क के सामने,
7 बंगलोज, वरसोवा,
अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-61
जीनत अमान
सोनी अपार्टमेंट, 19, रिबेलो रोड,
मेहबूब स्टूडियो के सामने,
माउंट मैरी हिल,
बांद्रा (पश्चिम), मुंबई-50
ऐश्वर्या
ऐश्वर्या नजर आएँगी मुमताज के रूप में!
मुमताज महल की भूमिका के लिए ऐश्वर्या से अच्छा विकल्प हो ही नहीं सकता। इसलिए बेन किंग्सले ने अपनी आगामी फिल्म ‘ताज’ के लिए ऐश्वर्या को चुना है, जबकि शाहजहाँ की भूमिका वे खुद निभाएँगे।
भारतीय दर्शकों के लिए बेग किंग्सले एक परिचित नाम है क्योंकि ‘गाँधी’ फिल्म में उन्होंने महात्मा गाँधी की भूमिका निभाई थी। 27 वर्ष बाद बेन फिर भारत लौटे हैं। वे मुगल बादशाह शाहजहाँ और मुमताज की प्रेम कहानी पर आधारित फिल्म बनाने की सोच रहे हैं।
इस फिल्म की चर्चा अरसे से है और किंग्सले ने इस विषय पर काफी रिसर्च किया है। सूत्रों के मुताबिक सब तय हो चुका है और जल्दी ही इस बारे में घोषणा की जाएगी। खूबसूरत ऐश्वर्या के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण भूमिका होगी।
जब ऐश्वर्या मिस वर्ल्ड बनीं
19 नवंबर 1994 वह दिन था, जब करोड़ों हिन्दुस्तानी टीवी के आगे आँखें लगाए बैठे थे। ये सारी आँखें उस बिल्लौरी आँखों वाली लड़की को ढूँढ रही थीं, जिसने अपने अद्वितीय सौंदर्य से हर किसी को अचंभित कर दिया था।
दक्षिण अफ्रीका के सनसिटी में आयोजित मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता के आयोजक ऐश्वर्या राय नामक भारतीय सुंदरी के विलक्षण रूप पर हतप्रभ थे। यह नवयौवना स्पर्धा के आरंभिक चरण में मिस फोटोजनिक का खिताब जीत चुकी थी और ज्यादातर विश्लेषकों का मत था कि प्रतियोगिता का मुख्य खिताब वही जीतेगी। इसीलिए निर्णायकों ने जब विश्व सुंदरी स्पर्धा की विजेता के बतौर ऐश्वर्या राय म लिया तो किसी को आश्चर्य नहीं हुआ, सिवाय खुद 20 साल की उस तरुणी के, जो हाथों में अपना चेहरा छुपाए खुशी के आँसू छलका रही थी। नितांत मासूमियत के साथ व्यक्त किया गया यह हाव-भाव बाद में सौंदर्य प्रतियोगिताओं की हर स्पर्धा के लिए चिर-परिचित शैली बन गया।
ऐश्वर्या के मिस वर्ल्ड चुने जाते ही खार (मुंबई) स्थित उन के बंगले पर बधाइयाँ आना शुरू हो गईं। ऐश की माँ वृंदा अपने हाथों से सबको मिठाई बाँट रही थी। आम हिन्दुस्तानी यह देखकर अचंभित था कि एक ही वर्ष में दो भारतीय बालाएँ सुष्मिता !! और ऐश्वर्या राय मिस यूनिवर्स और मिस वर्ल्ड जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय खिताब जीतने में कैसे सफल हो गईं। तीन दशक बाद कोई भारतीय लड़की विश्व सुंदरी का ताज पहनने में कामयाब हुई थी। यह पल हर देशवासी के लिए गर्व का भी अवसर था और हैरत का भी।
कुछ राजनीतिक, सामाजिक विश्लेषकों ने कयास लगाया कि यह बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा भारत के विशाल प्रसाधन बाजार में सेंध लगाने की साजिश है। जो भी हो, ऐश्वर्या राय का विश्व सुंदरी बनना एक महत्वपूर्ण घटना थी। खासकर बॉलीवुड के लिए, क्योंकि इसके बाद ही भारतीय सिनेमा को अगली सुपर तारिका मिली।
ऐश्वर्या के लिए मिस वर्ल्ड तक का सफर आसान भी था और मुश्किल भी। आसान इसलिए कि अपनी दैवीय सुंदरता की वजह से वे स्पर्धा में भाग लेने से पूर्व ही विजेता घोषित की जा चुकी थीं। मुश्किल इस वजह से कि अपनी ही एक हमवतन कोमलांगी के कारण उन्हें ब्रह्मांड सुंदरी के खिताब से वंचित रहना पड़ा। इन दोनों अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं के लिए प्रतियोगियों का चयन मिस इंडिया प्रतियोगिता के माध्यम से किया जाता है।
इस स्पर्धा की विजेता आमतौर पर मिस यूनिवर्स के खिताब हेतु भेजी जाती है, जबकि उपविजेता को मिस वर्ल्ड स्पर्धा में भाग लेना होता है। फेमिना मिस इंडिया स्पर्धा के आयोजक तक मान रहे थे कि ऐश्वर्या ही विजेता बनेंगी। लेकिन स्पर्धा के प्रश्नोत्तर खंड में बंगाली बाला सुष्मिता सेन दक्षिण भारतीय ऐश्वर्या से बाजी मार गईं। सुष्मिता को विजेता चुना गया और ऐश को उपविजेता।
मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता के दौरान ऐश से पूछा गया कि वे खिताब जीतने पर क्या करेंगी? ऐश का जवाब था - 'निराश्रित बच्चों की सेवा करूँगी?' प्रतियोगिता जीतने के बाद ऐश्वर्या को संयुक्त राष्ट्र ने अपना सांस्कृतिक राजदूत नियुक्त किया और उन्हें निर्धन बच्चों की सेवा का दायित्व सौंपा।
दूसरी ओर भारत में कुछ महिला संगठन विश्व सुंदरी स्पर्धा पर अश्लीलता का आरोप लगाते हुए प्रतिबंध की माँग कर रहे थे। ऐश ने इन्हें जवाब दिया कि वे नारेबाजी या आलोचना के बजाय जरूरतमंदों के बीच जाकर काम करें। ऐश और सुष्मिता से प्रेरित होकर लारा दत्ता, प्रियंका जैसी भारतीय सुंदरियों ने अंतरराष्ट्रीय सौंदर्य स्पर्धाओं में खिताब जीते। ऐश्वर्या के विश्व सुंदरी बनने का ही प्रताप था कि अमिताभ बच्चन अपनी एबीसीएल कंपनी के साथ मिस वर्ल्ड स्पर्धा के प्रायोजन हेतु आगे आए।
मुंबई की ओबेरॉय होटल में कैंसर पीड़ितों के सहायतार्थ आयोजित एक फैशन-शो से ऐश्वर्या राय ने ग्लैमर की दुनिया में कदम रखा था। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी वे पूरी दुनिया में चर्चित हो जाएँगी। मिस वर्ल्ड चुने जाने के बाद ऐश्वर्या को सबसे ज्यादा पीड़ा इस बात से हुई कि कुछ समालोचकों ने उन्हें बार्बी डॉल कहना शुरू कर दिया।
बॉलीवुड में लंबा समय गुजारने के बाद ऐश्वर्या यह साबित कर चुकी हैं कि उनमें सुंदरता के अलावा भी बहुत कुछ है, जो रजतपट की श्वेत आभा पर सतरंगी किरदारों के साथ उभरकर आता है। सूरत और सीरत दोनों पैमानों पर ऐश विजेता सिद्ध हुई हैं। बॉलीवुड भी बधाई का पात्र है कि उसने इस स्वप्न सुंदरी के भीतर छुपी प्रतिभा को पहचान कर निखरने का मौका दिया।
मुमताज महल की भूमिका के लिए ऐश्वर्या से अच्छा विकल्प हो ही नहीं सकता। इसलिए बेन किंग्सले ने अपनी आगामी फिल्म ‘ताज’ के लिए ऐश्वर्या को चुना है, जबकि शाहजहाँ की भूमिका वे खुद निभाएँगे।
भारतीय दर्शकों के लिए बेग किंग्सले एक परिचित नाम है क्योंकि ‘गाँधी’ फिल्म में उन्होंने महात्मा गाँधी की भूमिका निभाई थी। 27 वर्ष बाद बेन फिर भारत लौटे हैं। वे मुगल बादशाह शाहजहाँ और मुमताज की प्रेम कहानी पर आधारित फिल्म बनाने की सोच रहे हैं।
इस फिल्म की चर्चा अरसे से है और किंग्सले ने इस विषय पर काफी रिसर्च किया है। सूत्रों के मुताबिक सब तय हो चुका है और जल्दी ही इस बारे में घोषणा की जाएगी। खूबसूरत ऐश्वर्या के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण भूमिका होगी।
जब ऐश्वर्या मिस वर्ल्ड बनीं
19 नवंबर 1994 वह दिन था, जब करोड़ों हिन्दुस्तानी टीवी के आगे आँखें लगाए बैठे थे। ये सारी आँखें उस बिल्लौरी आँखों वाली लड़की को ढूँढ रही थीं, जिसने अपने अद्वितीय सौंदर्य से हर किसी को अचंभित कर दिया था।
दक्षिण अफ्रीका के सनसिटी में आयोजित मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता के आयोजक ऐश्वर्या राय नामक भारतीय सुंदरी के विलक्षण रूप पर हतप्रभ थे। यह नवयौवना स्पर्धा के आरंभिक चरण में मिस फोटोजनिक का खिताब जीत चुकी थी और ज्यादातर विश्लेषकों का मत था कि प्रतियोगिता का मुख्य खिताब वही जीतेगी। इसीलिए निर्णायकों ने जब विश्व सुंदरी स्पर्धा की विजेता के बतौर ऐश्वर्या राय म लिया तो किसी को आश्चर्य नहीं हुआ, सिवाय खुद 20 साल की उस तरुणी के, जो हाथों में अपना चेहरा छुपाए खुशी के आँसू छलका रही थी। नितांत मासूमियत के साथ व्यक्त किया गया यह हाव-भाव बाद में सौंदर्य प्रतियोगिताओं की हर स्पर्धा के लिए चिर-परिचित शैली बन गया।
ऐश्वर्या के मिस वर्ल्ड चुने जाते ही खार (मुंबई) स्थित उन के बंगले पर बधाइयाँ आना शुरू हो गईं। ऐश की माँ वृंदा अपने हाथों से सबको मिठाई बाँट रही थी। आम हिन्दुस्तानी यह देखकर अचंभित था कि एक ही वर्ष में दो भारतीय बालाएँ सुष्मिता !! और ऐश्वर्या राय मिस यूनिवर्स और मिस वर्ल्ड जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय खिताब जीतने में कैसे सफल हो गईं। तीन दशक बाद कोई भारतीय लड़की विश्व सुंदरी का ताज पहनने में कामयाब हुई थी। यह पल हर देशवासी के लिए गर्व का भी अवसर था और हैरत का भी।
कुछ राजनीतिक, सामाजिक विश्लेषकों ने कयास लगाया कि यह बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा भारत के विशाल प्रसाधन बाजार में सेंध लगाने की साजिश है। जो भी हो, ऐश्वर्या राय का विश्व सुंदरी बनना एक महत्वपूर्ण घटना थी। खासकर बॉलीवुड के लिए, क्योंकि इसके बाद ही भारतीय सिनेमा को अगली सुपर तारिका मिली।
ऐश्वर्या के लिए मिस वर्ल्ड तक का सफर आसान भी था और मुश्किल भी। आसान इसलिए कि अपनी दैवीय सुंदरता की वजह से वे स्पर्धा में भाग लेने से पूर्व ही विजेता घोषित की जा चुकी थीं। मुश्किल इस वजह से कि अपनी ही एक हमवतन कोमलांगी के कारण उन्हें ब्रह्मांड सुंदरी के खिताब से वंचित रहना पड़ा। इन दोनों अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं के लिए प्रतियोगियों का चयन मिस इंडिया प्रतियोगिता के माध्यम से किया जाता है।
इस स्पर्धा की विजेता आमतौर पर मिस यूनिवर्स के खिताब हेतु भेजी जाती है, जबकि उपविजेता को मिस वर्ल्ड स्पर्धा में भाग लेना होता है। फेमिना मिस इंडिया स्पर्धा के आयोजक तक मान रहे थे कि ऐश्वर्या ही विजेता बनेंगी। लेकिन स्पर्धा के प्रश्नोत्तर खंड में बंगाली बाला सुष्मिता सेन दक्षिण भारतीय ऐश्वर्या से बाजी मार गईं। सुष्मिता को विजेता चुना गया और ऐश को उपविजेता।
मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता के दौरान ऐश से पूछा गया कि वे खिताब जीतने पर क्या करेंगी? ऐश का जवाब था - 'निराश्रित बच्चों की सेवा करूँगी?' प्रतियोगिता जीतने के बाद ऐश्वर्या को संयुक्त राष्ट्र ने अपना सांस्कृतिक राजदूत नियुक्त किया और उन्हें निर्धन बच्चों की सेवा का दायित्व सौंपा।
दूसरी ओर भारत में कुछ महिला संगठन विश्व सुंदरी स्पर्धा पर अश्लीलता का आरोप लगाते हुए प्रतिबंध की माँग कर रहे थे। ऐश ने इन्हें जवाब दिया कि वे नारेबाजी या आलोचना के बजाय जरूरतमंदों के बीच जाकर काम करें। ऐश और सुष्मिता से प्रेरित होकर लारा दत्ता, प्रियंका जैसी भारतीय सुंदरियों ने अंतरराष्ट्रीय सौंदर्य स्पर्धाओं में खिताब जीते। ऐश्वर्या के विश्व सुंदरी बनने का ही प्रताप था कि अमिताभ बच्चन अपनी एबीसीएल कंपनी के साथ मिस वर्ल्ड स्पर्धा के प्रायोजन हेतु आगे आए।
मुंबई की ओबेरॉय होटल में कैंसर पीड़ितों के सहायतार्थ आयोजित एक फैशन-शो से ऐश्वर्या राय ने ग्लैमर की दुनिया में कदम रखा था। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी वे पूरी दुनिया में चर्चित हो जाएँगी। मिस वर्ल्ड चुने जाने के बाद ऐश्वर्या को सबसे ज्यादा पीड़ा इस बात से हुई कि कुछ समालोचकों ने उन्हें बार्बी डॉल कहना शुरू कर दिया।
बॉलीवुड में लंबा समय गुजारने के बाद ऐश्वर्या यह साबित कर चुकी हैं कि उनमें सुंदरता के अलावा भी बहुत कुछ है, जो रजतपट की श्वेत आभा पर सतरंगी किरदारों के साथ उभरकर आता है। सूरत और सीरत दोनों पैमानों पर ऐश विजेता सिद्ध हुई हैं। बॉलीवुड भी बधाई का पात्र है कि उसने इस स्वप्न सुंदरी के भीतर छुपी प्रतिभा को पहचान कर निखरने का मौका दिया।
खबर-संसार
अभिषेक-ऐश की जोड़ी अव्वल
'सिलेब्रिटी कपल' में इस समय अभिषेक और ऐश्वर्या बच्चन की जोड़ी का डंका बज रहा है और अधिकांश लोग इस दंपति को ‘हैप्पीली मैरिड’ जोड़ी मानते हैं और उनसे प्रेरणा लेते हैं। यह खूबसूरत जोड़ा युवाओं में इस कदर लोकप्रिय है कि इसने अमिताभ और जया बच्चन को भी पीछे छोड़ दिया है।
पिछले दिनों करवाए गए एक सर्वेक्षण के नतीजों से यह बात सामने आई है, जिसमें अभिषेक और ऐश की जोड़ी को सर्वेक्षण के दायरे में आए 32 फीसदी लोगों ने 'फेवरेट सिलेब्रिटी कपल' चुना।
किंग खान और उनकी पत्नी गौरी को सर्वेक्षण में अभि-ऐश के बाद सर्वाधिक 29 फीसदी मत मिले, जबकि बिग बी और जया बच्चन की जोड़ी को 20 फीसदी लोगों ने अपनी पसंदीदा जोड़ी चुना है और तीसरा स्थान दिया है।
सर्वेक्षण में सर्वाधिक हैरानी की बात यह है कि ढलती उम्र में भी बिग बी और जया बच्चन को लोग 'हैप्पीली मैरिड कपल' की श्रेणी में रखते हुए उन्हें अपना प्रेरणास्रोत मानते हैं।
सुखिर्यों के लिहाज से अभिषेक से आगे रहने वाले किंग खान और उनकी पत्नी गौरी के करीबी प्रतिद्वंद्वी आमिर खान और किरण खान को लोगों ने चार फीसदी मतों के साथ चौथे स्थान पर रखा हैं। इसका मतलब साफ है कि लोग आमिर को तो एक उम्दा कलाकार मानते हैं लेकिन घरेलू मोर्चे पर वे लोगों की पसंद पर खरे नहीं उतरे।
इस पायदान पर नवविवाहित जोड़ी राजस्थान रॉयल्स कपल राज और शिल्पा को मात्र चार फीसदी जबकि मुन्ना भाई यानी संजय और मान्यता को मात्र दो फीसदी लोगों ने 'हैप्पीली मैरिड' दंपति की श्रेणी में रखा है।
इंटरनेट मैट्रिमोनियिल साइट शादी डॉट कॉम द्वारा वेलेंटाइन डे से पूर्व करवाए एक इस सर्वेक्षण से और भी कई रोचक बातें उभर कर सामने आई हैं।
सर्वेक्षण दर्शाता है कि शादी डॉट कॉम द्वारा करवाए गए सर्वेक्षण में दुनियाभर से 3.6 लाख लोगों ने भाग लिया और इस साइट के साथ ही फेसबुक पर अपने विचार व्यक्त किए।
सर्वेक्षण के परिणामों के अनुसार वेलेंटाइन क्विज में भाग लेने वाले 42.64 फीसदी लोगों ने अपने बारे में खुलासा किया कि वे प्यार के नाम पर फ्लर्ट करते हैं जबकि 40.54 फीसदी ने कहा कि वे बेहद केयर करने वाले हैं।
9.31 फीसदी ने कहा कि वे अपने प्रियतम को लुभाने के लिए रोमांटिक होना पसंद करेंगे जबकि केवल 7.51 फीसदी ने कहा कि सही जीवनसाथी चुनने में वह खुशमिजाजी को काफी महत्व देते हैं।
ब्लॉगिंग दिलाती है मुफ्त की पब्लिसिटी
विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर और भारतीय राजनीति को ‘कलरफुल एंड ड्रामेटिक’ बनाने वाले अमरसिंह से लेकर राज्य स्तर के विधायक और पार्षद तक आजकल ब्लॉगिंग में व्यस्त हैं और ‘मुफ्त की पब्लिसिटी’ लूट रहे हैं।
मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अखबारों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में विज्ञापन और प्रचार की बड़ी कीमत अदा करनी पड़ती है और इसकी कुछ सीमाएँ भी हैं लेकिन इंटरनेट स्पेस एकदम फ्री है। इस प्रकार नेता मुफ्त के प्रचार के लिए सोशल नेटवर्किंग साइटों का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं।
नवभारत टाइम्स के वरिष्ठ सहायक संपादक बाल मुकुंद का कहना है कि नेता मुफ्त पब्लिसिटी, युवाओं तक पहुँच और अपने-अपने शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ बगावत, तीनों ही लक्ष्यों को एक साथ साधने के लिए ब्लॉग का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह एक नया जरिया है जिससे वे अधिक से अधिक लोगों तक अपनी बात पहुँचाना चाहते हैं।
एक नेता ने कहा कि ब्लॉगिंग अपनी बात रखने का सर्वाधिक सरल तरीका है क्योंकि इसमें 'हींग लगे न फिटकरी और रंग भी चोखा' वाली बात है।
उधर, सर्च इंजन गूगल से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि इंटरनेट स्पेस विशाल और पूरी तरह शुल्क मुक्त है। ऐसे में किसी को इसके इस्तेमाल से रोकने का कहीं कोई प्रावधान नहीं है और इसका इस्तेमाल पूरी तरह स्वविवेक पर आधारित है।
NDनईदुनिया के प्रधान संपादक आलोक मेहता ने कहा कि नव धनाढ्य मध्य वर्ग से जुड़े नेताओं का यह नया शगल है जिससे कुछ होने जाने वाला नहीं है क्योंकि आम जनता आज भी अखबार ही पढ़ती है। उनका कहना है कि आडवाणी और राहुल गाँधी जैसे बड़े नेताओं को यह दिखाने के लिए उनके दलों के नेता ब्लॉगिंग कर रहे हैं कि वे बहुत बड़े टेक्नोकेट्र हैं।
कांग्रेस नेता शशि थरूर संभवत: ऐसे पहले केंद्रीय मंत्री हैं, जिन्होंने अपनी ब्लॉगिंग के जरिए राजनीतिक हलचल पैदा की। थरूर ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी द्वारा शुरू किए गए किफायत अभियान के संदर्भ में इकॉनोमी क्लास में यात्रा करने को सोशल नेटवर्किंग साइट ‘ट्विटर’ पर कैटल क्लास कहकर विवाद खड़ा कर दिया था।
इन दिनों पूर्व सपा नेता अमरसिंह का ब्लॉग भी चर्चा में है और उन्होंने तो पिछले दिनों एक समारोह तक में कह डाला कि सिंगापुर में गुर्दो के ऑपरेशन के बाद खाली समय में ब्लॉगिंग करना और ब्लॉग में कांग्रेस तथा सोनिया गांधी की तारीफ करना ही सपा से उनकी विदाई का कारण बना।
भाजपा के फायर ब्रांड नेता और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा विजय कुमार मल्होत्रा भी ट्विटर पर विराजमान हैं। राजद नेता लालू प्रसाद यादव ने भी कई साल पहले ब्लॉगिंग शुरू की थी लेकिन पिछले कुछ साल से उनका ब्लॉग अपडेट नहीं हुआ है। उधर कांग्रेसी नेता प्रिया दत्त, मिलिंद देवड़ा तथा सचिन पायलट की भी वेबसाइट हैं। मिलिंद तो फेसबुक पर भी उपलब्ध हैं।
न केवल केंद्रीय स्तर के नेता बल्कि कई दक्षिण भारतीय राज्यों के मंत्रियों और विधायकों के बीच भी ब्लॉगिंग जोर पकड़ रही है, जिनमें कर्नाटक से भाजपा के एस सुरेश कुमार, राजीव चंद्रशेखर, के रघुपति भट्ट, तमिलनाडु से द्रमुक नेता तथा मुख्यमंत्री एम करुणानिधि के पुत्र एमके स्टालिन आदि प्रमुख हैं।
'सिलेब्रिटी कपल' में इस समय अभिषेक और ऐश्वर्या बच्चन की जोड़ी का डंका बज रहा है और अधिकांश लोग इस दंपति को ‘हैप्पीली मैरिड’ जोड़ी मानते हैं और उनसे प्रेरणा लेते हैं। यह खूबसूरत जोड़ा युवाओं में इस कदर लोकप्रिय है कि इसने अमिताभ और जया बच्चन को भी पीछे छोड़ दिया है।
पिछले दिनों करवाए गए एक सर्वेक्षण के नतीजों से यह बात सामने आई है, जिसमें अभिषेक और ऐश की जोड़ी को सर्वेक्षण के दायरे में आए 32 फीसदी लोगों ने 'फेवरेट सिलेब्रिटी कपल' चुना।
किंग खान और उनकी पत्नी गौरी को सर्वेक्षण में अभि-ऐश के बाद सर्वाधिक 29 फीसदी मत मिले, जबकि बिग बी और जया बच्चन की जोड़ी को 20 फीसदी लोगों ने अपनी पसंदीदा जोड़ी चुना है और तीसरा स्थान दिया है।
सर्वेक्षण में सर्वाधिक हैरानी की बात यह है कि ढलती उम्र में भी बिग बी और जया बच्चन को लोग 'हैप्पीली मैरिड कपल' की श्रेणी में रखते हुए उन्हें अपना प्रेरणास्रोत मानते हैं।
सुखिर्यों के लिहाज से अभिषेक से आगे रहने वाले किंग खान और उनकी पत्नी गौरी के करीबी प्रतिद्वंद्वी आमिर खान और किरण खान को लोगों ने चार फीसदी मतों के साथ चौथे स्थान पर रखा हैं। इसका मतलब साफ है कि लोग आमिर को तो एक उम्दा कलाकार मानते हैं लेकिन घरेलू मोर्चे पर वे लोगों की पसंद पर खरे नहीं उतरे।
इस पायदान पर नवविवाहित जोड़ी राजस्थान रॉयल्स कपल राज और शिल्पा को मात्र चार फीसदी जबकि मुन्ना भाई यानी संजय और मान्यता को मात्र दो फीसदी लोगों ने 'हैप्पीली मैरिड' दंपति की श्रेणी में रखा है।
इंटरनेट मैट्रिमोनियिल साइट शादी डॉट कॉम द्वारा वेलेंटाइन डे से पूर्व करवाए एक इस सर्वेक्षण से और भी कई रोचक बातें उभर कर सामने आई हैं।
सर्वेक्षण दर्शाता है कि शादी डॉट कॉम द्वारा करवाए गए सर्वेक्षण में दुनियाभर से 3.6 लाख लोगों ने भाग लिया और इस साइट के साथ ही फेसबुक पर अपने विचार व्यक्त किए।
सर्वेक्षण के परिणामों के अनुसार वेलेंटाइन क्विज में भाग लेने वाले 42.64 फीसदी लोगों ने अपने बारे में खुलासा किया कि वे प्यार के नाम पर फ्लर्ट करते हैं जबकि 40.54 फीसदी ने कहा कि वे बेहद केयर करने वाले हैं।
9.31 फीसदी ने कहा कि वे अपने प्रियतम को लुभाने के लिए रोमांटिक होना पसंद करेंगे जबकि केवल 7.51 फीसदी ने कहा कि सही जीवनसाथी चुनने में वह खुशमिजाजी को काफी महत्व देते हैं।
ब्लॉगिंग दिलाती है मुफ्त की पब्लिसिटी
विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर और भारतीय राजनीति को ‘कलरफुल एंड ड्रामेटिक’ बनाने वाले अमरसिंह से लेकर राज्य स्तर के विधायक और पार्षद तक आजकल ब्लॉगिंग में व्यस्त हैं और ‘मुफ्त की पब्लिसिटी’ लूट रहे हैं।
मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अखबारों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में विज्ञापन और प्रचार की बड़ी कीमत अदा करनी पड़ती है और इसकी कुछ सीमाएँ भी हैं लेकिन इंटरनेट स्पेस एकदम फ्री है। इस प्रकार नेता मुफ्त के प्रचार के लिए सोशल नेटवर्किंग साइटों का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं।
नवभारत टाइम्स के वरिष्ठ सहायक संपादक बाल मुकुंद का कहना है कि नेता मुफ्त पब्लिसिटी, युवाओं तक पहुँच और अपने-अपने शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ बगावत, तीनों ही लक्ष्यों को एक साथ साधने के लिए ब्लॉग का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह एक नया जरिया है जिससे वे अधिक से अधिक लोगों तक अपनी बात पहुँचाना चाहते हैं।
एक नेता ने कहा कि ब्लॉगिंग अपनी बात रखने का सर्वाधिक सरल तरीका है क्योंकि इसमें 'हींग लगे न फिटकरी और रंग भी चोखा' वाली बात है।
उधर, सर्च इंजन गूगल से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि इंटरनेट स्पेस विशाल और पूरी तरह शुल्क मुक्त है। ऐसे में किसी को इसके इस्तेमाल से रोकने का कहीं कोई प्रावधान नहीं है और इसका इस्तेमाल पूरी तरह स्वविवेक पर आधारित है।
NDनईदुनिया के प्रधान संपादक आलोक मेहता ने कहा कि नव धनाढ्य मध्य वर्ग से जुड़े नेताओं का यह नया शगल है जिससे कुछ होने जाने वाला नहीं है क्योंकि आम जनता आज भी अखबार ही पढ़ती है। उनका कहना है कि आडवाणी और राहुल गाँधी जैसे बड़े नेताओं को यह दिखाने के लिए उनके दलों के नेता ब्लॉगिंग कर रहे हैं कि वे बहुत बड़े टेक्नोकेट्र हैं।
कांग्रेस नेता शशि थरूर संभवत: ऐसे पहले केंद्रीय मंत्री हैं, जिन्होंने अपनी ब्लॉगिंग के जरिए राजनीतिक हलचल पैदा की। थरूर ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी द्वारा शुरू किए गए किफायत अभियान के संदर्भ में इकॉनोमी क्लास में यात्रा करने को सोशल नेटवर्किंग साइट ‘ट्विटर’ पर कैटल क्लास कहकर विवाद खड़ा कर दिया था।
इन दिनों पूर्व सपा नेता अमरसिंह का ब्लॉग भी चर्चा में है और उन्होंने तो पिछले दिनों एक समारोह तक में कह डाला कि सिंगापुर में गुर्दो के ऑपरेशन के बाद खाली समय में ब्लॉगिंग करना और ब्लॉग में कांग्रेस तथा सोनिया गांधी की तारीफ करना ही सपा से उनकी विदाई का कारण बना।
भाजपा के फायर ब्रांड नेता और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा विजय कुमार मल्होत्रा भी ट्विटर पर विराजमान हैं। राजद नेता लालू प्रसाद यादव ने भी कई साल पहले ब्लॉगिंग शुरू की थी लेकिन पिछले कुछ साल से उनका ब्लॉग अपडेट नहीं हुआ है। उधर कांग्रेसी नेता प्रिया दत्त, मिलिंद देवड़ा तथा सचिन पायलट की भी वेबसाइट हैं। मिलिंद तो फेसबुक पर भी उपलब्ध हैं।
न केवल केंद्रीय स्तर के नेता बल्कि कई दक्षिण भारतीय राज्यों के मंत्रियों और विधायकों के बीच भी ब्लॉगिंग जोर पकड़ रही है, जिनमें कर्नाटक से भाजपा के एस सुरेश कुमार, राजीव चंद्रशेखर, के रघुपति भट्ट, तमिलनाडु से द्रमुक नेता तथा मुख्यमंत्री एम करुणानिधि के पुत्र एमके स्टालिन आदि प्रमुख हैं।
रविवार, 14 फ़रवरी 2010
तनुश्री दत्ता : हर हाल में खुश
2004 में फेमिना मिस इंडिया रह चुकीं तनुश्री दत्ता ने पूर्व सुंदरियों की तरह अभिनय की दुनिया को अपना करियर चुना। ‘चॉकलेट’ के रूप में उनका सफर शुरू हुआ हालाँकि ‘आशिक बनाया आपने’ पहले रिलीज हुई। साढ़े चार वर्ष के करियर में उन्होंने 10-12 फिल्मों में काम किया। उनके बाद अपना करियर शुरू करने वाली नायिकाएँ आज तनुश्री से आगे निकल गई हैं। जब तनुश्री से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा ‘कौन आगे है और कौन पीछे, मैं इस तरह की बातों में बिलकुल भी यकीन नहीं करती हूँ। ये सब बेकार की बातें हैं। मेरा मानना है कि व्यक्ति का काम बोलता हूँ। मैंने जो भी फिल्में की हैं और आज जिस स्थान पर भी मैं हूँ खुश हूँ।'
इस समय तनुश्री कई फिल्मों में अभिनय कर रही हैं, लेकिन ‘रोक’ और ‘अपार्टमेंट’ को लेकर वे खासी उत्साहित हैं। दोनों फिल्मों की चर्चा करते हुए वे कहती हैं ‘एक अभिनेत्री के रूप में इन दोनों फिल्मों से जुड़कर मैं खुश हूँ क्योंकि इनमें मेरी भूमिकाएँ चुनौतीपूर्ण है। ‘अपार्टमेंट’ एक थ्रिलर है, जबकि ‘रोक’ हॉरर मूवी है। पहली बार मैं डरावनी फिल्म कर रही हूँ।‘
क्या उन्हें अदृश्य शक्ति या भूत-प्रेत पर विश्वास है? ‘बिलुकल भी नहीं। मैंने इस बारे में सिर्फ सुन रखा है, लेकिन न तो कभी भूत को देखा है और न ही इस तरह की शक्ति को महसूस किया है। मैं तो अंधविश्वासी भी नहीं हूँ।‘ यह बंगाली बाला कहती है।
‘अपार्टमेंट’ में तनुश्री को जगमोहन मूँदड़ा के निर्देशन में अभिनय करने का अवसर मिला है। मूँदड़ा बवंडर, शूट ऑन साइट, प्रोवोक्ड जैसी चर्चित फिल्में बना चुके हैं। इस अनुभवी निर्देशक की तारीफ करते हुए तनुश्री कहती हैं ‘जगमोहन के निर्देशन में मुझे एक अलग ही तरह का अनुभव हुआ। वे बेहद सुलझे हुए और अनुभवी निर्देशक हैं। उन्होंने मेरे अंदर की अभिनेत्री को बखूबी बाहर निकाला। मैंने कई नई बातें अभिनय के बारे में जानी। उनसे सीखने को बहुत मिला।‘
विवादों से तनुश्री का गहरा नाता है। ‘रकीब’ और ‘सास बहू और सेंसेक्स’ के निर्माता-निर्देशक से उनकी लड़ाई खासी चर्चित हुई। इसी तरह एक फिल्म की शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर से भी उनका विवाद हुआ था। क्या पब्लिसिटी के लिए वे इस तरह के विवाद करती हैं? ‘मैं तो हमेशा विवादों से बचती हूँ, लेकिन विवाद मेरे साथ चलते हैं तो मैं क्या कर सकती हूँ।‘ तनुश्री स्पष्ट करती हैं।
वर्ष 2010 में प्रदर्शित होने वाली अपनी फिल्मों को लेकर तनुश्री बेहद उत्साहित हैं और उनके रिलीज होने का इंतजार कर रही हैं। उन्हें पूरी उम्मीद है कि ये फिल्में उनके करियर को नई दिशा देने में कामयाब होंगी।
2004 में फेमिना मिस इंडिया रह चुकीं तनुश्री दत्ता ने पूर्व सुंदरियों की तरह अभिनय की दुनिया को अपना करियर चुना। ‘चॉकलेट’ के रूप में उनका सफर शुरू हुआ हालाँकि ‘आशिक बनाया आपने’ पहले रिलीज हुई। साढ़े चार वर्ष के करियर में उन्होंने 10-12 फिल्मों में काम किया। उनके बाद अपना करियर शुरू करने वाली नायिकाएँ आज तनुश्री से आगे निकल गई हैं। जब तनुश्री से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा ‘कौन आगे है और कौन पीछे, मैं इस तरह की बातों में बिलकुल भी यकीन नहीं करती हूँ। ये सब बेकार की बातें हैं। मेरा मानना है कि व्यक्ति का काम बोलता हूँ। मैंने जो भी फिल्में की हैं और आज जिस स्थान पर भी मैं हूँ खुश हूँ।'
इस समय तनुश्री कई फिल्मों में अभिनय कर रही हैं, लेकिन ‘रोक’ और ‘अपार्टमेंट’ को लेकर वे खासी उत्साहित हैं। दोनों फिल्मों की चर्चा करते हुए वे कहती हैं ‘एक अभिनेत्री के रूप में इन दोनों फिल्मों से जुड़कर मैं खुश हूँ क्योंकि इनमें मेरी भूमिकाएँ चुनौतीपूर्ण है। ‘अपार्टमेंट’ एक थ्रिलर है, जबकि ‘रोक’ हॉरर मूवी है। पहली बार मैं डरावनी फिल्म कर रही हूँ।‘
क्या उन्हें अदृश्य शक्ति या भूत-प्रेत पर विश्वास है? ‘बिलुकल भी नहीं। मैंने इस बारे में सिर्फ सुन रखा है, लेकिन न तो कभी भूत को देखा है और न ही इस तरह की शक्ति को महसूस किया है। मैं तो अंधविश्वासी भी नहीं हूँ।‘ यह बंगाली बाला कहती है।
‘अपार्टमेंट’ में तनुश्री को जगमोहन मूँदड़ा के निर्देशन में अभिनय करने का अवसर मिला है। मूँदड़ा बवंडर, शूट ऑन साइट, प्रोवोक्ड जैसी चर्चित फिल्में बना चुके हैं। इस अनुभवी निर्देशक की तारीफ करते हुए तनुश्री कहती हैं ‘जगमोहन के निर्देशन में मुझे एक अलग ही तरह का अनुभव हुआ। वे बेहद सुलझे हुए और अनुभवी निर्देशक हैं। उन्होंने मेरे अंदर की अभिनेत्री को बखूबी बाहर निकाला। मैंने कई नई बातें अभिनय के बारे में जानी। उनसे सीखने को बहुत मिला।‘
विवादों से तनुश्री का गहरा नाता है। ‘रकीब’ और ‘सास बहू और सेंसेक्स’ के निर्माता-निर्देशक से उनकी लड़ाई खासी चर्चित हुई। इसी तरह एक फिल्म की शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर से भी उनका विवाद हुआ था। क्या पब्लिसिटी के लिए वे इस तरह के विवाद करती हैं? ‘मैं तो हमेशा विवादों से बचती हूँ, लेकिन विवाद मेरे साथ चलते हैं तो मैं क्या कर सकती हूँ।‘ तनुश्री स्पष्ट करती हैं।
वर्ष 2010 में प्रदर्शित होने वाली अपनी फिल्मों को लेकर तनुश्री बेहद उत्साहित हैं और उनके रिलीज होने का इंतजार कर रही हैं। उन्हें पूरी उम्मीद है कि ये फिल्में उनके करियर को नई दिशा देने में कामयाब होंगी।
साहित्यिक
मैं हूं न!
मुकुंद बाबू की आज अन्तिम विदाई भी हो गई। सभी नाते-रिश्तेदार पूर्ण तृप्त हो करुणा जी की झोली में संवेदनाएं उडेल अपने-अपने नीडों की ओर उड गए। बेटी धरा भी अपने पति व बच्चों के साथ मां से मिलकर लौट गई। इस सबसे निबटते रात उतरने लगी। रह गया केवल हार्दिक और उसके बच्चे। अब चिंता हो आई- मम्मी अकेली कैसे रहेंगी? जब तक पापा रहे कोई चिन्ता नहीं थी। दोनों मिलकर आराम से रह रहे थे। अब क्या करे वह? मम्मी से क्या कहे वह? पता नहीं मम्मी इतनी जल्दी साथ भी चलेगी या नहीं? पूरी रात यही सोचते करवटों में कट गई। इससे पहले मां को लेकर कभी चिन्ता नहीं हुई थी। कुछ भी कहते संकोच नहीं हुआ था, पर पापा के जाने के बाद मम्मी को देखना रहता है, उसके मुंह से शब्द नहीं फूटते। मां के कंधे पर सिर रखने वाला बेटा अब मां का सिर अपने कंधे पर टिका लेता है। मैं हूं न मां, आप चिन्ता क्यों करती हैं? मैं चिंता क्या करूंगी? पर चालीस साल का साथ छूटा है- अच्छा-बुरा, हंसते-रोते, लडते-झगडते- कैसे भुला सकती हूं। मम्मी, मैंने भी पापा को खोया है। उनके रहते मैं कितना निश्चिन्त था। मेरी हर समस्या का समाधान उनके पास था। पापा हाथ छुडाकर चले गए हैं। कितना अकेला हो गया हूं मैं! और मां-बेटे दोनों अपने-अपने आंसू बहने देते। आकर उन्हें संभालती। बच्चे कहते- दादी मां, आप और पापा रोएंगे तो हम भी रोएंगे। हमें भी अपने दादा जी चाहिए। उनके जाने से हमारी खुशी छिन गई है। करुणा जी झट अपने आंसू पोंछ लेतीं और मुस्कराकर कहतीं- कहां रो रही हूं। बस तुम्हारे दादाजी याद आ गए। सबको उदास देखकर बच्चे भी उदास रहते। पहले की तरह मस्ती नहीं करते और न कोई चीज लेने की जिद्द। जैसे बच्चे भी समझदार हो गए। करुणा जी को नहीं छोडते क्योंकि वे सारा समय औरतों से घिरी मुख नीचा किए बैठी रहती हैं या रोती रहती हैं। अजीब सा माहौल है। बहुत हिम्मत कर हार्दिक ने कहा- मम्मी, आपसे कुछ कहना है। तेरी उलझन मैं समझ रही हूं हार्दिक। जो तू पूछना या कहना चाहता है मुझे मालूम है। जो तेरी उलझन है वह मेरी भी है। तू इसे आज महसूस कर रहा है, मैंने कई दिन पहले महसूस कर लिया था। तेरी छोटी मौसी वत्सला कुछ समय मेरे पास रहेगी। तू निश्चिन्त होकर जा। और आगे की बाद में सोचेंगे। वह कल शाम तक आ जाएगी। वह तो ठीक है मम्मी, लेकिन आपको इस अवस्था में अकेले कैसे छोड सकता हूं, और इतनी जल्दी चलने को भी कैसे कह सकता हूं। तू इतनी चिन्ता मत कर। कहा न कि वत्सला रहेगी मेरे पास। कुछ वक्त लगेगा, धीरे-धीरे जीवन पटरी पर आ जाएगा। एकदम घर में ताला लगाकर तेरे साथ चल भी नहीं सकती। इस घर का आदमी मेरा पति, तेरा पिता गया है। कोई बाहर का नहीं। अभी उनके प्रति मेरे कुछ कर्तव्य हैं। जिन्हें पूरा करना है। जब तेरी जरूरत होगी, फोन पर बता दूंगी। कल वत्सला के आने पर तू निकल जाना। तब तक हलवाई, टैन्ट वालों या अन्य किसी का हिसाब करना हो निबटा लेना। अपना सामान तैयार कर ले। खुशी को भी बता दे। संकोच करने से काम नहीं चलने वाला। कुछ देर बैठकर हार्दिक उठ गया। फिर लौटकर करुणाजी को एक लिफाफा देकर बोला- मम्मी, इसे मेरे जाने के बाद खोलना। करुणा जी ने लिफाफा अलमारी में रख लिया। वत्सला के आने पर हार्दिक चला गया। करुणा जी ने लिफाफा खोलकर देखा, हजार-हजार के दस नोटों के साथ एक छोटी सी चिट भी थी- जल्दी ही आऊंगा। करुणाजी ने लिफाफा आंखों से लगाया और जहां से निकाला था वहीं रख दिया। आंखें नम हो आई। कभी धरा आ जाती, कभी वत्सला और कभी हार्दिक। हार्दिक जब भी आता करुणा जी को एक लिफाफा थमा जाता और वे संभालकर रख लेंती। इसी प्रकार एक साल निकल गया। मुकुन्द जी की बरसी पर हार्दिक के आने से पहले ही वत्सला, धरा और करुणा जी ने सारी व्यवस्था कर ली। हार्दिक बरसी की पूर्व संध्या पर पहुंच गया। उसे आश्चर्य हुआ- मैं आ तो रहा था मम्मी। आपने सारा आयोजन कैसे किया? इतने सारे रुपए की व्यवस्था कहां से की? मैंने कुछ नहीं किया। सब तेरी बहिन और मौसी ने किया है। पैसे सारे तूने ही खर्च किए हैं? मैंने..? आश्चर्य से पूछा हार्दिक ने। हां, जब भी तू आता, मुझे रुपए थमा जाता। बस उन्हीं रुपयों से सब व्यवस्था हो गई। और मम्मी, आपका खर्चा..? सब चल गया। कुछ तेरे पापा छोड गए थे, कुछ पेंशन मिल जाती है। शायद तूने इधर नहीं सोचा। अब सारी चिन्ता छोड। सब आराम से चल रहा है। करुणाजी को लोगों ने समझाया कि बहू-बेटे के पास जाकर रहने से स्वयं को अपमानित कराना है। दो-चार दिन के लिए जाओ तो बहू से सम्मान मिलता है और जब हमेशा के लिए जाकर रहने लगो तो वही सम्मान अपमान में बदल जाता है। यह बात कहीं न कहीं करुणा जी के मन में भी थी। वे बहाने बनाकर हार्दिक के साथ जाना टालती रहीं। एक दिन थक कर हार्दिक ने कहा- मम्मी, आप क्या समझती हैं मैं आपका ध्यान नहीं रख सकता। यदि आप कभी अपमानित महसूस करें तो मुझे बता देना। मैं आपको यहीं छोड जाऊंगा। आपके रहते यह घर नहीं बेचूंगा। एक बार आप अपने बच्चों पर विश्वास करके देखिए। खुशी आपका इंतजार कर रही है। अब स्वयं को नहीं रोक सकी करुणा जी। अपना जरूरी सामान पैक किया। घर का ताला लगा दिया और स्वयं हार्दिक के साथ आ गई। करुणा जी के कमरे में ए.सी. लगा था, कलर टी.वी. था, अटैच बाथरूम यानि सुविधा का सभी सामान था। बच्चों ने करुणा जी को हांथों-हाथ लिया। उन्हें कोई किसी काम में हाथ न लगाने देता। पूरे समय काम करने के लिए नौकर जो था। बच्चे स्कूल से लौटकर दादी मां-दादी मां कहकर उन्हें घेर लेते। बच्चे दादी मां के साथ खूब खुश रहते। हार्दिक और खुशी भी करुणा जी के आने से काफी निश्चिन्त हो गए थे। वीक एंड पर सब घूमने जाते। करुणा जी बच्चों को होमवर्क करा देतीं। उनके साथ लूडो, कैरम, अन्ताक्षरी खेलतीं, कहानियां सुनातीं। करुणा जी उन्हें रस्सी घुमाना सिखातीं। धीरे-धीरे दस-बारह बच्चों का ग्रुप बन गया। करुणा जी उन्हें रोज नए-नए खेल खिलातीं। कभी कहानियां सुनातीं। बच्चे अपने प्रश्नों के उत्तर करुणाजी से पाकर सन्तुष्ट होते। करुणाजी कभी-कभी अपने साथ टॉफी, चाकलेट्स या बिस्कुट के पैकेट ले आतीं और बच्चों में बांट देती। बच्चों की मम्मियों से भी उनकी दोस्ती हो गई। बच्चे अपने जन्मदिन पर करुणाजी को अपने घर निमंत्रित करते अथवा उनके घर कोई उत्सव होता तो करुणा जी को न्यौता अवश्य मिलता। वे इला और कार्तिक के साथ चली जातीं। धीरे-धीरे सभी बच्चे अपना होमवर्क भी करुणा जी के पास बैठकर पूरा करने लगे। उन्हें पढाते हुए समय का पता ही न चलता। कब पंख लगाकर गुजर जाता। कभी दो-चार दिन के लिए घर लौटतीं तो बच्चे रोज फोन करते- अम्मा जी, कब लौट रही हैं? हमारा मन नहीं लग रहा। आप जल्दी आइए। करुणाजी की आंखें भर आतीं। ये कैसा बंधन? एक टूटा दूसरा जुड गया। आगे वक्त कैसे कटेगा वे इस चिन्ता से मुक्त हो गई। करुणा जी के लौटने पर बच्चे खूब खुश होते। धीरे-धीरे पुराने रूटीन पर लौट आते। एक दिन बच्चों की मम्मियां उनके पास आई और उनके पैरों में एक-एक लिफाफा रख दिया। उन्हें बडा आश्चर्य हुआ। उत्सुकता भी हुई कि देखें लिफाफे में क्या है? उन्होंने एक लिफाफा खोला सौ-सौ के तीन नोट रखे थे। सभी लिफाफों में रुपए थे। उन्होंने पूछा- आप सब ये रुपए मुझे क्यों दे रही हैं? मांजी, बच्चे जब से आपके सम्पर्क में आए हैं, ट्यूशन पढना छोड दिया है। आप जो भी पढाती हैं, बहुत ध्यान से सुनते हैं और याद रखते हैं। नम्बर भी अच्छे ला रहे हैं। आप इतनी मेहनत करती हैं तो हमारा भी कुछ फर्ज बनता है। ये क्या कह रही हो तुम सब? मेरे पास पैसे की कोई कमी नहीं है। बेटा-बहू मेरा खूब ध्यान रखते हैं। मैं इन रुपयों का क्या करूंगी? ज्ञान बांटने से बढता है कम नहीं होता। मेरे पास जो थोडा सा ज्ञान है इनमें बांट देती हूं। करुणा जी ने लाख मना किया पर वे सब नहीं मानीं। करुणा जी को वे रुपए लेने पडे। उनके पास तीन हजार रुपए थे। यानि साल में छत्तीस हजार। वे इतने रुपयों का क्या करेंगी? सोच रही थीं- तभी उन्हें ख्याल आया। अगले सप्ताह दिवाली है। करुणाजी ने सारी बात हार्दिक और खुशी को बताई। खुशी और हार्दिक ने हंसते हुए कहा-मम्मी, आपकी पहली कमाई है। अपने पास रखिए। नहीं हार्दिक, बच्चों की कमाई बच्चों में बांट देना चाहती हूं। हम दीपावली पर अनाथाश्रम चलेंगे। बच्चों को मिठाई और पटाखे बाटेंगे। हर साल जितना पैसा इकट्ठा होगा जरूरतमंद संस्था को दे देंगे। करुणा जी के फैसले पर दोनों ने मुहर लगा दी। इस प्रकार दो साल और निकल गए। एक दिन करुणा जी हार्दिक और खुशी से बोलीं- तुम से कुछ कहना चाहती हूं बच्चों। मैं वहां रहती थी तो घर की साज-संवार कर लेती थी। बिन देख रेख के घर बेकार हो रहा है। मैं चाहती हूं तुम उसे बेच दो। जो पैसा मिले उसका एक तिहाई धरा को भी दे देना। शेष तुम रख लेना। मम्मी! आपके इस फैसले से मैं सहमत नहीं हूं। अभी हम घर किराए पर उठा देते हैं। एक कमरा अपने पास रख लेंगे। आप चिन्ता मत करो। मैं हूं न। हां तुम दोनों मेरी पूंजी हो। तभी तो निश्चिंत हूं। कहकर करुणा जी ने दोनों को गले लगा लिया।
मुकुंद बाबू की आज अन्तिम विदाई भी हो गई। सभी नाते-रिश्तेदार पूर्ण तृप्त हो करुणा जी की झोली में संवेदनाएं उडेल अपने-अपने नीडों की ओर उड गए। बेटी धरा भी अपने पति व बच्चों के साथ मां से मिलकर लौट गई। इस सबसे निबटते रात उतरने लगी। रह गया केवल हार्दिक और उसके बच्चे। अब चिंता हो आई- मम्मी अकेली कैसे रहेंगी? जब तक पापा रहे कोई चिन्ता नहीं थी। दोनों मिलकर आराम से रह रहे थे। अब क्या करे वह? मम्मी से क्या कहे वह? पता नहीं मम्मी इतनी जल्दी साथ भी चलेगी या नहीं? पूरी रात यही सोचते करवटों में कट गई। इससे पहले मां को लेकर कभी चिन्ता नहीं हुई थी। कुछ भी कहते संकोच नहीं हुआ था, पर पापा के जाने के बाद मम्मी को देखना रहता है, उसके मुंह से शब्द नहीं फूटते। मां के कंधे पर सिर रखने वाला बेटा अब मां का सिर अपने कंधे पर टिका लेता है। मैं हूं न मां, आप चिन्ता क्यों करती हैं? मैं चिंता क्या करूंगी? पर चालीस साल का साथ छूटा है- अच्छा-बुरा, हंसते-रोते, लडते-झगडते- कैसे भुला सकती हूं। मम्मी, मैंने भी पापा को खोया है। उनके रहते मैं कितना निश्चिन्त था। मेरी हर समस्या का समाधान उनके पास था। पापा हाथ छुडाकर चले गए हैं। कितना अकेला हो गया हूं मैं! और मां-बेटे दोनों अपने-अपने आंसू बहने देते। आकर उन्हें संभालती। बच्चे कहते- दादी मां, आप और पापा रोएंगे तो हम भी रोएंगे। हमें भी अपने दादा जी चाहिए। उनके जाने से हमारी खुशी छिन गई है। करुणा जी झट अपने आंसू पोंछ लेतीं और मुस्कराकर कहतीं- कहां रो रही हूं। बस तुम्हारे दादाजी याद आ गए। सबको उदास देखकर बच्चे भी उदास रहते। पहले की तरह मस्ती नहीं करते और न कोई चीज लेने की जिद्द। जैसे बच्चे भी समझदार हो गए। करुणा जी को नहीं छोडते क्योंकि वे सारा समय औरतों से घिरी मुख नीचा किए बैठी रहती हैं या रोती रहती हैं। अजीब सा माहौल है। बहुत हिम्मत कर हार्दिक ने कहा- मम्मी, आपसे कुछ कहना है। तेरी उलझन मैं समझ रही हूं हार्दिक। जो तू पूछना या कहना चाहता है मुझे मालूम है। जो तेरी उलझन है वह मेरी भी है। तू इसे आज महसूस कर रहा है, मैंने कई दिन पहले महसूस कर लिया था। तेरी छोटी मौसी वत्सला कुछ समय मेरे पास रहेगी। तू निश्चिन्त होकर जा। और आगे की बाद में सोचेंगे। वह कल शाम तक आ जाएगी। वह तो ठीक है मम्मी, लेकिन आपको इस अवस्था में अकेले कैसे छोड सकता हूं, और इतनी जल्दी चलने को भी कैसे कह सकता हूं। तू इतनी चिन्ता मत कर। कहा न कि वत्सला रहेगी मेरे पास। कुछ वक्त लगेगा, धीरे-धीरे जीवन पटरी पर आ जाएगा। एकदम घर में ताला लगाकर तेरे साथ चल भी नहीं सकती। इस घर का आदमी मेरा पति, तेरा पिता गया है। कोई बाहर का नहीं। अभी उनके प्रति मेरे कुछ कर्तव्य हैं। जिन्हें पूरा करना है। जब तेरी जरूरत होगी, फोन पर बता दूंगी। कल वत्सला के आने पर तू निकल जाना। तब तक हलवाई, टैन्ट वालों या अन्य किसी का हिसाब करना हो निबटा लेना। अपना सामान तैयार कर ले। खुशी को भी बता दे। संकोच करने से काम नहीं चलने वाला। कुछ देर बैठकर हार्दिक उठ गया। फिर लौटकर करुणाजी को एक लिफाफा देकर बोला- मम्मी, इसे मेरे जाने के बाद खोलना। करुणा जी ने लिफाफा अलमारी में रख लिया। वत्सला के आने पर हार्दिक चला गया। करुणा जी ने लिफाफा खोलकर देखा, हजार-हजार के दस नोटों के साथ एक छोटी सी चिट भी थी- जल्दी ही आऊंगा। करुणाजी ने लिफाफा आंखों से लगाया और जहां से निकाला था वहीं रख दिया। आंखें नम हो आई। कभी धरा आ जाती, कभी वत्सला और कभी हार्दिक। हार्दिक जब भी आता करुणा जी को एक लिफाफा थमा जाता और वे संभालकर रख लेंती। इसी प्रकार एक साल निकल गया। मुकुन्द जी की बरसी पर हार्दिक के आने से पहले ही वत्सला, धरा और करुणा जी ने सारी व्यवस्था कर ली। हार्दिक बरसी की पूर्व संध्या पर पहुंच गया। उसे आश्चर्य हुआ- मैं आ तो रहा था मम्मी। आपने सारा आयोजन कैसे किया? इतने सारे रुपए की व्यवस्था कहां से की? मैंने कुछ नहीं किया। सब तेरी बहिन और मौसी ने किया है। पैसे सारे तूने ही खर्च किए हैं? मैंने..? आश्चर्य से पूछा हार्दिक ने। हां, जब भी तू आता, मुझे रुपए थमा जाता। बस उन्हीं रुपयों से सब व्यवस्था हो गई। और मम्मी, आपका खर्चा..? सब चल गया। कुछ तेरे पापा छोड गए थे, कुछ पेंशन मिल जाती है। शायद तूने इधर नहीं सोचा। अब सारी चिन्ता छोड। सब आराम से चल रहा है। करुणाजी को लोगों ने समझाया कि बहू-बेटे के पास जाकर रहने से स्वयं को अपमानित कराना है। दो-चार दिन के लिए जाओ तो बहू से सम्मान मिलता है और जब हमेशा के लिए जाकर रहने लगो तो वही सम्मान अपमान में बदल जाता है। यह बात कहीं न कहीं करुणा जी के मन में भी थी। वे बहाने बनाकर हार्दिक के साथ जाना टालती रहीं। एक दिन थक कर हार्दिक ने कहा- मम्मी, आप क्या समझती हैं मैं आपका ध्यान नहीं रख सकता। यदि आप कभी अपमानित महसूस करें तो मुझे बता देना। मैं आपको यहीं छोड जाऊंगा। आपके रहते यह घर नहीं बेचूंगा। एक बार आप अपने बच्चों पर विश्वास करके देखिए। खुशी आपका इंतजार कर रही है। अब स्वयं को नहीं रोक सकी करुणा जी। अपना जरूरी सामान पैक किया। घर का ताला लगा दिया और स्वयं हार्दिक के साथ आ गई। करुणा जी के कमरे में ए.सी. लगा था, कलर टी.वी. था, अटैच बाथरूम यानि सुविधा का सभी सामान था। बच्चों ने करुणा जी को हांथों-हाथ लिया। उन्हें कोई किसी काम में हाथ न लगाने देता। पूरे समय काम करने के लिए नौकर जो था। बच्चे स्कूल से लौटकर दादी मां-दादी मां कहकर उन्हें घेर लेते। बच्चे दादी मां के साथ खूब खुश रहते। हार्दिक और खुशी भी करुणा जी के आने से काफी निश्चिन्त हो गए थे। वीक एंड पर सब घूमने जाते। करुणा जी बच्चों को होमवर्क करा देतीं। उनके साथ लूडो, कैरम, अन्ताक्षरी खेलतीं, कहानियां सुनातीं। करुणा जी उन्हें रस्सी घुमाना सिखातीं। धीरे-धीरे दस-बारह बच्चों का ग्रुप बन गया। करुणा जी उन्हें रोज नए-नए खेल खिलातीं। कभी कहानियां सुनातीं। बच्चे अपने प्रश्नों के उत्तर करुणाजी से पाकर सन्तुष्ट होते। करुणाजी कभी-कभी अपने साथ टॉफी, चाकलेट्स या बिस्कुट के पैकेट ले आतीं और बच्चों में बांट देती। बच्चों की मम्मियों से भी उनकी दोस्ती हो गई। बच्चे अपने जन्मदिन पर करुणाजी को अपने घर निमंत्रित करते अथवा उनके घर कोई उत्सव होता तो करुणा जी को न्यौता अवश्य मिलता। वे इला और कार्तिक के साथ चली जातीं। धीरे-धीरे सभी बच्चे अपना होमवर्क भी करुणा जी के पास बैठकर पूरा करने लगे। उन्हें पढाते हुए समय का पता ही न चलता। कब पंख लगाकर गुजर जाता। कभी दो-चार दिन के लिए घर लौटतीं तो बच्चे रोज फोन करते- अम्मा जी, कब लौट रही हैं? हमारा मन नहीं लग रहा। आप जल्दी आइए। करुणाजी की आंखें भर आतीं। ये कैसा बंधन? एक टूटा दूसरा जुड गया। आगे वक्त कैसे कटेगा वे इस चिन्ता से मुक्त हो गई। करुणा जी के लौटने पर बच्चे खूब खुश होते। धीरे-धीरे पुराने रूटीन पर लौट आते। एक दिन बच्चों की मम्मियां उनके पास आई और उनके पैरों में एक-एक लिफाफा रख दिया। उन्हें बडा आश्चर्य हुआ। उत्सुकता भी हुई कि देखें लिफाफे में क्या है? उन्होंने एक लिफाफा खोला सौ-सौ के तीन नोट रखे थे। सभी लिफाफों में रुपए थे। उन्होंने पूछा- आप सब ये रुपए मुझे क्यों दे रही हैं? मांजी, बच्चे जब से आपके सम्पर्क में आए हैं, ट्यूशन पढना छोड दिया है। आप जो भी पढाती हैं, बहुत ध्यान से सुनते हैं और याद रखते हैं। नम्बर भी अच्छे ला रहे हैं। आप इतनी मेहनत करती हैं तो हमारा भी कुछ फर्ज बनता है। ये क्या कह रही हो तुम सब? मेरे पास पैसे की कोई कमी नहीं है। बेटा-बहू मेरा खूब ध्यान रखते हैं। मैं इन रुपयों का क्या करूंगी? ज्ञान बांटने से बढता है कम नहीं होता। मेरे पास जो थोडा सा ज्ञान है इनमें बांट देती हूं। करुणा जी ने लाख मना किया पर वे सब नहीं मानीं। करुणा जी को वे रुपए लेने पडे। उनके पास तीन हजार रुपए थे। यानि साल में छत्तीस हजार। वे इतने रुपयों का क्या करेंगी? सोच रही थीं- तभी उन्हें ख्याल आया। अगले सप्ताह दिवाली है। करुणाजी ने सारी बात हार्दिक और खुशी को बताई। खुशी और हार्दिक ने हंसते हुए कहा-मम्मी, आपकी पहली कमाई है। अपने पास रखिए। नहीं हार्दिक, बच्चों की कमाई बच्चों में बांट देना चाहती हूं। हम दीपावली पर अनाथाश्रम चलेंगे। बच्चों को मिठाई और पटाखे बाटेंगे। हर साल जितना पैसा इकट्ठा होगा जरूरतमंद संस्था को दे देंगे। करुणा जी के फैसले पर दोनों ने मुहर लगा दी। इस प्रकार दो साल और निकल गए। एक दिन करुणा जी हार्दिक और खुशी से बोलीं- तुम से कुछ कहना चाहती हूं बच्चों। मैं वहां रहती थी तो घर की साज-संवार कर लेती थी। बिन देख रेख के घर बेकार हो रहा है। मैं चाहती हूं तुम उसे बेच दो। जो पैसा मिले उसका एक तिहाई धरा को भी दे देना। शेष तुम रख लेना। मम्मी! आपके इस फैसले से मैं सहमत नहीं हूं। अभी हम घर किराए पर उठा देते हैं। एक कमरा अपने पास रख लेंगे। आप चिन्ता मत करो। मैं हूं न। हां तुम दोनों मेरी पूंजी हो। तभी तो निश्चिंत हूं। कहकर करुणा जी ने दोनों को गले लगा लिया।
शनिवार, 13 फ़रवरी 2010
वेलेंटाइन डे
इजहार-ए-इश्क का बढ़ता क्रेज
PRPRएक खास दिन, खास धड़कन के लिए। मोहब्बत में गिरफ्तार युवा दिलों के लिए यह खास दिन उन्हें बेसब्र बना देता है। वे इस दिन इश्क का इजहार करने के लिए तमाम खूबसूरत कोशिशें करते हैं क्योंकि वे मानते हैं कि इस दिन प्रपोज कर देने से हाँ के चांसेस ज्यादा होते हैं और रिजेक्ट होने के बहुत कम। युवा मानते हैं कि इस खास दिन पर इश्क का इजहार कर देने से एक नई और रोमांचक लव लाइफ की शुरुआत होती है। और बाजार में भी इस दिन के लिए खास गिफ्ट्स सज जाते हैं जो उनके दिलों की बात नाजुकता से कह देते हैं।
वेलेंटाइन डे नजदीक आते ही युवा दिलों में खलबली-सी मच जाती है। उनके लिए इस रोमांटिक दिन को सेलिब्रेट करने के साथ प्यार का इजहार करना भी खास मायने रखता है। प्यार करने वाले इस दिन जमाने की बंदिशों को तोड़ अपनों से मिलेंगे और प्यार का इजहार करेंगे। सभी ने इस दिन के लिए अलग-अलग प्लानिंग कर रखी है। कोई पार्क में जाकर दिन बिताएँगे तो कोई होटल में एक साथ लंच करेंगे।
युवाओं को पूरे सालभर प्यार के त्योहार का दिन वेलेंटाइन डे का इंतजार रहता है। अपने प्रेमी से प्यार का इजहार करने के लिए वे पहले से तैयारी करके रखते हैं। इसलिए तमाम विरोधों के बावजूद आज भी इस खास दिन पर एक-दूसरे को शुभकामना देने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। 14 फरवरी आते ही तमाम ब्रांड्स प्रेम की इस भावना को भुनाने में पुरजोर कोशिशों में जुट जाते हैं। युवा भी गिफ्ट्स ,चॉकलेट्स, सॉफ्ट टॉयज आदि से प्यार के इजहार के दिन को एक यादगार पल बनाने की कोशिश करते हैं।
हाँ में जवाब मिलता है इस दिन
स्वरित सिन्हा कहते हैं कि अक्सर हमें प्यार के इजहार के लिए शब्द नहीं मिल पाते और आम दिन में हम प्यार का इजहार नहीं कर पाते है, लेकिन वेलेंटाइन डे पर वेलेंटाइन को प्रपोज करने पर हाँ में जवाब मिलने का चांस ज्यादा रहता है। इस दिन वे लड़के भी लड़कियों को फेस-टू-फेस प्रपोज कर सकते हैं जो किसी और दिन प्रपोज करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं। इस दिन हर तरफ रहने वाले प्यार के माहौल के बीच किसी को प्रपोज करने से बहुत फर्क पड़ता है। इसलिए यह दिन खास हो जाता है। ङ"ख११ऋ
365 दिन हैं वेलेंटाइन डे
सुनील सावले कहते हैं कि यदि हम किसी लड़की की पसंदीदा बात और व्यवहार को सही तरीके से समझ सकते हैं तो हमें प्यार का इजहार करने के लिए वेलेंटाइन डे का इंतजार नहीं होगा। इस दिन प्यार का इजहार करने का इतना ज्यादा फर्क भी नहीं पड़ता है। यदि हम अपने वेलेंटाइन से सही मायने में प्यार करते हैं तो 365 दिन ही वेलेंटाइन डे की तरह हो सकते हैं। प्रपोज करने पर हाँ या ना में जवाब मिलना लड़की पर निर्भर करता है न कि वेलेंटाइन डे पर।
दिल की बात कहते गिफ्ट्स
विशाल अढलोक कहते हैं कि वेलेंटाइन डे प्यार का प्रतीक त्योहार है और प्यार का यह दिन हर युवाओं के लिए खास मायने रखता है। इस दिन प्यार का इजहार करने में दिक्कतें तो आती हैं, लेकिन गिफ्ट हमारा यह काम आसान कर देते हैं। वहीं वेलेंटाइन डे पर प्यार का इजहार करने की खास वजह यह है कि वेलेंटाइन को अपनी दिल की बात कहने पर उनकी ओर से जवाब हाँ होता है। इसलिए इस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता है। वहीं लड़कियाँ इस दिन ना की जगह हाँ में जवाब देना काफी पसंद करती हैं।
रिजेक्ट करने के चांस कम
सुरभि वर्मा (बदला हुआ नाम) कहती हैं कि प्यार का इजहार करने की हिम्मत न जुटा पाने वाले युवाओं की मदद वेलेंटाइन डे बखूबी करता है। हमसे प्यार का इजहार करने वाले वेलेंटाइन को रिजेक्ट करने के चांस कम ही होते हैं। यही वजह है कि वेलेंटाइन डे पर इजहार करने का क्रेज बढ़ता जा रहा है, क्योंकि इस दिन इजहार करने पर नए रिश्ते बेहतर बनते हैं। लड़कों के साथ लड़कियों की भी यह ख्वाहिश रहती है कि कोई वेलेंटाइन उन्हें इस दिन प्रपोज करे।
किसी दिन का मोहताज नहीं प्यार
साक्षी यादव (बदला हुआ नाम) कहती हैं कि लड़कियों में इस दिन प्यार का इजहार करने वाले वेलेंटाइन को हाँ करने केचांस ज्यादा जरूर होते हैं लेकिन प्यार का इजहार करने के लिए कोई दिन ज्यादा मायने नहीं रखता। इस दिन लड़का यदि किसी लड़की से प्यार का इजहार करता है तो यह जरूरी नहीं कि हमसे वाकई ही प्रेम करता हो। इसलिए कुछ प्रपोज को रिजेक्ट करने का चांस भी ज्यादा होता है। यदि कोई हमसे वाकई प्यार करता है तो वह हमें 14 फरवरी हो या फिर 14 दिसंबर कभी भी अपने प्यार का इजहार कर देगा।
लव लाइफ की नई शुरुआत
सतीश भीलाला कहते हैं कि प्यार करने वालों के लिए हर दिन कुछ खास होता है, लेकिन वेलेंटाइन डे की बात ही कुछ और है। नया साल आते ही युवाओं को इंतजार होता है इस प्रेम दिवस का। हर युवा चाहता है कि इस दिन प्यार का इजहार करने से लव लाइफ की बेहतर शुरुआत होती है। प्यार के इजहार का यह दिन खास हो तो किसी प्रश्न की गुंजाइश ही नहीं होती। युवाओं ने वेलेंटाइन डे की तैयारियाँ शुरू कर दी हैं, शायद तब कहीं जाकर इस दिन को सही मायनों में अपने वेलेंटाइन के साथ सेलिब्रेट कर सकते हैं।
वेलेंटाइन डे: सिर्फ कैंडल लाइट डिनर नहीं
- हंसिका मोटवानी
वेलेंटाइन डे मनाने का चक्कर हाल ही के कुछ सालों में ज्यादा देखने में आया है। मेरे ख्याल से ये डे मनाने में कोई बुराई नहीं है क्योंकि सभी का उद्देश्य खुशी ही देना होता है। वेलेंटाइन डे को लेकर मेरा कोई निजी एक्सपीरिएंस नहीं है पर जो देखती हूँ या दोस्तों के साथ जो डिस्कस होता है, वही आपके साथ शेयर कर रही हूँ।
अपना अपना सोच है
मेरा मानना है कि वेलेंटाइन डे जरूर मनाना चाहिए पर इसे इंडिविजुअल पर छोड़ देना चाहिए कि वह इसे मनाना चाहता है या नहीं। जिनके बॉयफ्रेंड,गर्लफ्रेंड हैं और उनसे वे रिलेशनशिप को और आगे बढ़ाना चाहते हैं और अपने मन की बात कहना चाहते हैं, तब यह दिन उनके लिए सबसे अच्छा है।
मैं वेलेंटाइन डे पर बाहर जाती हूँ, ढेर सारे रेड रोजेज खरीदती हूँ और घर पर आकर मम्मी को देती हूँ। कई बार मैंने वैंलेटाइन डे पर स्वयं को ही पेम्पर किया है। इस दिन हम स्वयं को खुश क्यों नहीं कर सकते और इसके लिए स्वयं को ही एकाध गिफ्ट देने में क्या हर्ज है? वेलेंटाइन डे केवल रेड रोजेज या कैंडल लाइट डिनर नहीं है।
इस दिन हम अपने प्रियजनों को खुश देखना चाहते हैं और उनकी खुशी को बढ़ाने के लिए प्रयास करते हैं। और खुशी छोटे से कार्ड से या फिर केवल एक कप कॉफी पर ढेर सारी बातचीत करने से भी मिल सकती है। मैं केवल वैंलेटाइन डे पर ही अपने विचार आप तक नहीं पहुँचाना चाहती बल्कि युवाओं से जुड़े तमाम मुद्दो पर मैं अपने दोस्तो के साथ डिस्कस जरूर करती हूँ।कचफिल्म अभिनेत्री
युवाओं को राजनीति में आना चाहिए
आजकल सबकुछ युवाओं के अनुसार ही सोचा जाता है और बात सही भी है। युवाओं में ऊर्जा है, जोश है और एक नया सोच है। इसका उपयोग देश की तरक्की के लिए करना ही चाहिए और प्रत्येक युवा को देश के बारे में पहले सोचना चाहिए। युवाओं को राजनीति में जरूर आना चाहिए लेकिन मेरा मानना है कि केवल युवा ही क्यों, सभी उम्र के लोगों को यह सोचना चाहिए है कि हम देश के लिए क्या कर रहे हैं? और बिना देर किए अपनी तरफ से प्रयास शुरू कर देने चाहिए।
डाउन टू अर्थ रहें
मेरी किस्मत थी कि मुझे फिल्मों में काफी कम उम्र में ब्रेक मिल गया और सफलता भी मिली। इस सफलता को मैंने अपने सिर नहीं चढ़ने दिया। आज भी मैं शूटिंग से घर पहुँचती हूँ तब घर का काम करती हूँ और परिवार के सदस्यों के लिए खाना भी मैं ही बनाती हूँ।
अपनी मम्मी के साथ किराने के स्टोर पर सामान खरीदने भी जाती हूँ और घर की साफ-सफाई में भी हाथ बँटाती हूँ। दरअसल मैं यह सब आपको इसलिए बता रही हूँ कि अगर आप जिंदगी में सफलता पाने के बाद डाउन टू अर्थ रहेंगे तब अगली सफलता जल्द मिलेगी, यह निश्चित है। और जहाँ तक सफलता प्राप्ति की बात है, लगातार प्रयत्न करना और मेहनत करने से ही सफलता मिलेगी।
फ्रैंडशिप के फाइव फंडे
दोस्त बड़ी मुश्किल से मिलते हैं। ऐसे दोस्तों की दोस्ती बहुत मायने रखती है, क्योंकि ऐसे दोस्त बिना कोई स्वार्थ और मतलब के निराशा में आपका हाथ थाम लेते हैं। बिगड़ी स्थितियों में मदद का हाथ बढ़ाते हैं और धीरे-से कंधे पर हाथ धरकर पक्की दोस्ती का अहसास कराते हैं। इसलिए पाँच चीजों का ध्यान रखकर ऐसे दोस्तों को संभाल लीजिए।
इन दिनों सलमान खान और अजय देवगन की जल्द ही रिलीज होने वाली फिल्म "लंदन ड्रीम्स" की बहुत चर्चा है। कहते हैं, यह दो दोस्त और उनकी दोस्ती की कहानी है। जिंदगी में एक भी सच्चा दोस्त हो तो जिंदगी ज्यादा बेहतर और खुशहाल हो जाती है। यह कतई जरूरी नहीं कि आपके बहुत सारे दोस्त हों लेकिन वह दोस्त आपको रिस्पेक्ट नहीं करे, आपको प्यार नहीं करे और आपको जाने-समझे नहीं तो दोस्ती के क्या मायने। इसलिए जिंदगी में एक दोस्त, एक सच्चा दोस्त होना जरूरी है, क्योंकि यही दोस्त आपका निराशा में हाथ थामकर रोशनी में ला खड़ा कर सकता है और यही दोस्त खुशी में आपके साथ नाच-गा सकता है। हर स्टूडेंट यह चाहता है कि दोस्तों की भीड़ में उसका कोई एक ही सही, ऐसा दोस्त हो जो उसको बेहतर ढंग से जाने-समझे, प्यार करे।
ऑनेस्टी
दोस्ती में ऑनेस्टी सबसे बड़ा मूल्य है। यदि फ्रैंडशिप में ऑनेस्टी होगी तो यह ज्यादा मजबूत होगी। कई बार देखा गया है कि ऑनेस्टी न होने के कारण ही कॉलेजेस में कई अच्छी दोस्ती टूट जाती हैं और जिंदगी में हमेशा के लिए एक कड़वा स्वाद दे जाती है। कई स्टूडेंट इस अनुभव को जिंदगीभर नहीं भूल पाते हैं। इसलिए अपने दोस्त के प्रति ईमानदार रहें।
लव एंड केयर
दोस्ती में प्यार-मोहब्बत न हो तो मजा ही क्या है। लेकिन प्यार-मोहब्बत का मतलब किसी तरह का स्वार्थ नहीं होता। यह किसी मतलब से नहीं की जाती और न ही इसके जरिए कोई मतलब हासिल किया जाता है। इसमें तो एक-दूसरे के प्रति लव एंड केयर की भावना होती है। एक-दूसरे का ध्यान रखा जाता है, एक-दूसरे की पसंद-नापसंद का ध्यान रखा जाता है।
यदि प्यार-मोहब्बत हो और अंडरस्टैंडिंग न हो तो भी बात नहीं बनती। कई बार दोस्तों में दरार आ जाती है और दोस्ती टूट जाती है। इसका एक बड़ा कारण होता है अंडरस्टैंडिंग की कमी। यदि दो दोस्तों के बीच बेहतर अंडरस्टैंडिंग होगी तो यह ज्यादा मजबूत होगी। अपने दोस्त को बेहतर ढंग से जानने-समझने की कोशिश करेंगे, तो गलतफहमियाँ पैदा नहीं होंगी।
रिस्पेक्ट
कई बार मौज और मस्ती के मूड में, जोश और जुनून में दोस्त अपने दोस्तों से ऐसी मजाक कर बैठते हैं, जो उन्हें नागवार गुजरता है। उन्हें इंसल्टिंग फील होता है। इसलिए यह ध्यान रखें कि आपका कितना भी अच्छा फ्रैंड हो, आपके कितने भी बेतकल्लुफ रिश्ते हों लेकिन वह आपसे चाहता है कि आप उसका रिस्पेक्ट करें। अक्सर दोस्त यह भूल जाते हैं। दोस्तों का रिस्पेक्ट करें।
कमिटमेंट
कमिटमेंट जीवन का एक ऐसा मूल्य है, जो आपको भी और आपके दोस्त को भी एक बेहतर इंसान बनाता है। कमिटमेंट का मतलब एक तरह का वादा। यह दूसरे के प्रति कुछ करने का जज्बा होता है। इसी जज्बे को कहते हैं कमिटमेंट। दूसरे के प्रति जुड़ाव का भाव, उसके प्रति जिम्मेदारी का बोध, यही कमिटमेंट होता है। दोस्तों के प्रति कमिट रहें।
एक एहसास है सबसे जुदा
दायरों के बाहर भी एक दुनिया है... ये तुमने ही मुझे बताया...वो दायरे जो हम खुद बना लेते हैं या हमें बने हुए मिलते हैं...तुम कैसे उन सभी दायरों के बाहर हमेशा मुझे मुस्कुराती हुईं खड़ी मिलतीं...हाँ तुम जब हाथ थामकर मुझे उन दायरों से बाहर ले गईं तो वो दुनिया अलग थी...
जिसका एहसास करना तो बहुत आसान हुआ करता लेकिन तुम्हारी आँखों में झाँकते हुए उन एहसासों को नाम देना उतना ही मुश्किल... हाँ बहुत मुश्किल पर जब भी तुम साथ चलते हुए यूँ ही मेरा हाथ थाम लेतीं तो यूँ लगता कि मुझे उस एहसास का नाम मिल गया हो...
तुम्हारे साथ उन भूले हुए दायरों और बहुत कहीं पीछे छूट गए रिश्तों के नाम को मैं याद ना तो किया करता और ना ही मुझे याद रहते। ऐसे कई अनगिनत तुम्हारे पूछे गए सवालों को मैं अपने कुर्ते की जेब में संभालकर रखता और तुम्हारे इंतजार में उन्हें बार-बार एक-एक करके निकालता...शायद किसी सवाल का जवाब मुझे मिल जाए...
हाँ लेकिन उन सवालों में छुपी हुई, घुली हुई तुम्हारी यादों को में एक-एक करके हाथ पर रखता और अपने चेहरे पर मल लेता...देखना चाहता कि तुम्हारी यादों के साथ मेरा चेहरा कैसा दिखता है...
सच कहूँ तो मैं ठीक से आज भी अपने चेहरे को उन यादों के साथ महसूस करने की कितनी भी कोशिश करूँ वो चेहरा कहीं दिखाई नहीं पड़ता... शायद वो चेहरा तुम अपने साथ जो ले गई हों...हाँ साथ ही ले गई होगी...नहीं तो मुझे मेरा चेहरा यूँ अजनबी-सा ना लगता, हाँ अगर कुछ याद रहता है तो वो पल जब तुमने उस रोज हमारे आस पास उन सभी एहसासों को बुला लिया था... और हम रिश्तों के दायरों से बहुत दूर कहीं एहसासों की बसाई हुई दुनिया में खुद को पाया हुआ महसूस कर रहे थे...
हाँ वो पल सबसे जुदा था... मैंने खुद को तो पाया ही तुम्हें भी पा लिया था। रिश्तों के दायरों से दूर और तुम्हारे-मेरे एहसासों के नजदीक मैं तुम्हें आज भी खुद के साथ पाता हूँ... हाँ यही तो एक एहसास है जो सबसे जुदा... सबसे सुखद है... और जो हमेशा मेरे साथ रहता है।
PRPRएक खास दिन, खास धड़कन के लिए। मोहब्बत में गिरफ्तार युवा दिलों के लिए यह खास दिन उन्हें बेसब्र बना देता है। वे इस दिन इश्क का इजहार करने के लिए तमाम खूबसूरत कोशिशें करते हैं क्योंकि वे मानते हैं कि इस दिन प्रपोज कर देने से हाँ के चांसेस ज्यादा होते हैं और रिजेक्ट होने के बहुत कम। युवा मानते हैं कि इस खास दिन पर इश्क का इजहार कर देने से एक नई और रोमांचक लव लाइफ की शुरुआत होती है। और बाजार में भी इस दिन के लिए खास गिफ्ट्स सज जाते हैं जो उनके दिलों की बात नाजुकता से कह देते हैं।
वेलेंटाइन डे नजदीक आते ही युवा दिलों में खलबली-सी मच जाती है। उनके लिए इस रोमांटिक दिन को सेलिब्रेट करने के साथ प्यार का इजहार करना भी खास मायने रखता है। प्यार करने वाले इस दिन जमाने की बंदिशों को तोड़ अपनों से मिलेंगे और प्यार का इजहार करेंगे। सभी ने इस दिन के लिए अलग-अलग प्लानिंग कर रखी है। कोई पार्क में जाकर दिन बिताएँगे तो कोई होटल में एक साथ लंच करेंगे।
युवाओं को पूरे सालभर प्यार के त्योहार का दिन वेलेंटाइन डे का इंतजार रहता है। अपने प्रेमी से प्यार का इजहार करने के लिए वे पहले से तैयारी करके रखते हैं। इसलिए तमाम विरोधों के बावजूद आज भी इस खास दिन पर एक-दूसरे को शुभकामना देने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। 14 फरवरी आते ही तमाम ब्रांड्स प्रेम की इस भावना को भुनाने में पुरजोर कोशिशों में जुट जाते हैं। युवा भी गिफ्ट्स ,चॉकलेट्स, सॉफ्ट टॉयज आदि से प्यार के इजहार के दिन को एक यादगार पल बनाने की कोशिश करते हैं।
हाँ में जवाब मिलता है इस दिन
स्वरित सिन्हा कहते हैं कि अक्सर हमें प्यार के इजहार के लिए शब्द नहीं मिल पाते और आम दिन में हम प्यार का इजहार नहीं कर पाते है, लेकिन वेलेंटाइन डे पर वेलेंटाइन को प्रपोज करने पर हाँ में जवाब मिलने का चांस ज्यादा रहता है। इस दिन वे लड़के भी लड़कियों को फेस-टू-फेस प्रपोज कर सकते हैं जो किसी और दिन प्रपोज करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं। इस दिन हर तरफ रहने वाले प्यार के माहौल के बीच किसी को प्रपोज करने से बहुत फर्क पड़ता है। इसलिए यह दिन खास हो जाता है। ङ"ख११ऋ
365 दिन हैं वेलेंटाइन डे
सुनील सावले कहते हैं कि यदि हम किसी लड़की की पसंदीदा बात और व्यवहार को सही तरीके से समझ सकते हैं तो हमें प्यार का इजहार करने के लिए वेलेंटाइन डे का इंतजार नहीं होगा। इस दिन प्यार का इजहार करने का इतना ज्यादा फर्क भी नहीं पड़ता है। यदि हम अपने वेलेंटाइन से सही मायने में प्यार करते हैं तो 365 दिन ही वेलेंटाइन डे की तरह हो सकते हैं। प्रपोज करने पर हाँ या ना में जवाब मिलना लड़की पर निर्भर करता है न कि वेलेंटाइन डे पर।
दिल की बात कहते गिफ्ट्स
विशाल अढलोक कहते हैं कि वेलेंटाइन डे प्यार का प्रतीक त्योहार है और प्यार का यह दिन हर युवाओं के लिए खास मायने रखता है। इस दिन प्यार का इजहार करने में दिक्कतें तो आती हैं, लेकिन गिफ्ट हमारा यह काम आसान कर देते हैं। वहीं वेलेंटाइन डे पर प्यार का इजहार करने की खास वजह यह है कि वेलेंटाइन को अपनी दिल की बात कहने पर उनकी ओर से जवाब हाँ होता है। इसलिए इस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता है। वहीं लड़कियाँ इस दिन ना की जगह हाँ में जवाब देना काफी पसंद करती हैं।
रिजेक्ट करने के चांस कम
सुरभि वर्मा (बदला हुआ नाम) कहती हैं कि प्यार का इजहार करने की हिम्मत न जुटा पाने वाले युवाओं की मदद वेलेंटाइन डे बखूबी करता है। हमसे प्यार का इजहार करने वाले वेलेंटाइन को रिजेक्ट करने के चांस कम ही होते हैं। यही वजह है कि वेलेंटाइन डे पर इजहार करने का क्रेज बढ़ता जा रहा है, क्योंकि इस दिन इजहार करने पर नए रिश्ते बेहतर बनते हैं। लड़कों के साथ लड़कियों की भी यह ख्वाहिश रहती है कि कोई वेलेंटाइन उन्हें इस दिन प्रपोज करे।
किसी दिन का मोहताज नहीं प्यार
साक्षी यादव (बदला हुआ नाम) कहती हैं कि लड़कियों में इस दिन प्यार का इजहार करने वाले वेलेंटाइन को हाँ करने केचांस ज्यादा जरूर होते हैं लेकिन प्यार का इजहार करने के लिए कोई दिन ज्यादा मायने नहीं रखता। इस दिन लड़का यदि किसी लड़की से प्यार का इजहार करता है तो यह जरूरी नहीं कि हमसे वाकई ही प्रेम करता हो। इसलिए कुछ प्रपोज को रिजेक्ट करने का चांस भी ज्यादा होता है। यदि कोई हमसे वाकई प्यार करता है तो वह हमें 14 फरवरी हो या फिर 14 दिसंबर कभी भी अपने प्यार का इजहार कर देगा।
लव लाइफ की नई शुरुआत
सतीश भीलाला कहते हैं कि प्यार करने वालों के लिए हर दिन कुछ खास होता है, लेकिन वेलेंटाइन डे की बात ही कुछ और है। नया साल आते ही युवाओं को इंतजार होता है इस प्रेम दिवस का। हर युवा चाहता है कि इस दिन प्यार का इजहार करने से लव लाइफ की बेहतर शुरुआत होती है। प्यार के इजहार का यह दिन खास हो तो किसी प्रश्न की गुंजाइश ही नहीं होती। युवाओं ने वेलेंटाइन डे की तैयारियाँ शुरू कर दी हैं, शायद तब कहीं जाकर इस दिन को सही मायनों में अपने वेलेंटाइन के साथ सेलिब्रेट कर सकते हैं।
वेलेंटाइन डे: सिर्फ कैंडल लाइट डिनर नहीं
- हंसिका मोटवानी
वेलेंटाइन डे मनाने का चक्कर हाल ही के कुछ सालों में ज्यादा देखने में आया है। मेरे ख्याल से ये डे मनाने में कोई बुराई नहीं है क्योंकि सभी का उद्देश्य खुशी ही देना होता है। वेलेंटाइन डे को लेकर मेरा कोई निजी एक्सपीरिएंस नहीं है पर जो देखती हूँ या दोस्तों के साथ जो डिस्कस होता है, वही आपके साथ शेयर कर रही हूँ।
अपना अपना सोच है
मेरा मानना है कि वेलेंटाइन डे जरूर मनाना चाहिए पर इसे इंडिविजुअल पर छोड़ देना चाहिए कि वह इसे मनाना चाहता है या नहीं। जिनके बॉयफ्रेंड,गर्लफ्रेंड हैं और उनसे वे रिलेशनशिप को और आगे बढ़ाना चाहते हैं और अपने मन की बात कहना चाहते हैं, तब यह दिन उनके लिए सबसे अच्छा है।
मैं वेलेंटाइन डे पर बाहर जाती हूँ, ढेर सारे रेड रोजेज खरीदती हूँ और घर पर आकर मम्मी को देती हूँ। कई बार मैंने वैंलेटाइन डे पर स्वयं को ही पेम्पर किया है। इस दिन हम स्वयं को खुश क्यों नहीं कर सकते और इसके लिए स्वयं को ही एकाध गिफ्ट देने में क्या हर्ज है? वेलेंटाइन डे केवल रेड रोजेज या कैंडल लाइट डिनर नहीं है।
इस दिन हम अपने प्रियजनों को खुश देखना चाहते हैं और उनकी खुशी को बढ़ाने के लिए प्रयास करते हैं। और खुशी छोटे से कार्ड से या फिर केवल एक कप कॉफी पर ढेर सारी बातचीत करने से भी मिल सकती है। मैं केवल वैंलेटाइन डे पर ही अपने विचार आप तक नहीं पहुँचाना चाहती बल्कि युवाओं से जुड़े तमाम मुद्दो पर मैं अपने दोस्तो के साथ डिस्कस जरूर करती हूँ।कचफिल्म अभिनेत्री
युवाओं को राजनीति में आना चाहिए
आजकल सबकुछ युवाओं के अनुसार ही सोचा जाता है और बात सही भी है। युवाओं में ऊर्जा है, जोश है और एक नया सोच है। इसका उपयोग देश की तरक्की के लिए करना ही चाहिए और प्रत्येक युवा को देश के बारे में पहले सोचना चाहिए। युवाओं को राजनीति में जरूर आना चाहिए लेकिन मेरा मानना है कि केवल युवा ही क्यों, सभी उम्र के लोगों को यह सोचना चाहिए है कि हम देश के लिए क्या कर रहे हैं? और बिना देर किए अपनी तरफ से प्रयास शुरू कर देने चाहिए।
डाउन टू अर्थ रहें
मेरी किस्मत थी कि मुझे फिल्मों में काफी कम उम्र में ब्रेक मिल गया और सफलता भी मिली। इस सफलता को मैंने अपने सिर नहीं चढ़ने दिया। आज भी मैं शूटिंग से घर पहुँचती हूँ तब घर का काम करती हूँ और परिवार के सदस्यों के लिए खाना भी मैं ही बनाती हूँ।
अपनी मम्मी के साथ किराने के स्टोर पर सामान खरीदने भी जाती हूँ और घर की साफ-सफाई में भी हाथ बँटाती हूँ। दरअसल मैं यह सब आपको इसलिए बता रही हूँ कि अगर आप जिंदगी में सफलता पाने के बाद डाउन टू अर्थ रहेंगे तब अगली सफलता जल्द मिलेगी, यह निश्चित है। और जहाँ तक सफलता प्राप्ति की बात है, लगातार प्रयत्न करना और मेहनत करने से ही सफलता मिलेगी।
फ्रैंडशिप के फाइव फंडे
दोस्त बड़ी मुश्किल से मिलते हैं। ऐसे दोस्तों की दोस्ती बहुत मायने रखती है, क्योंकि ऐसे दोस्त बिना कोई स्वार्थ और मतलब के निराशा में आपका हाथ थाम लेते हैं। बिगड़ी स्थितियों में मदद का हाथ बढ़ाते हैं और धीरे-से कंधे पर हाथ धरकर पक्की दोस्ती का अहसास कराते हैं। इसलिए पाँच चीजों का ध्यान रखकर ऐसे दोस्तों को संभाल लीजिए।
इन दिनों सलमान खान और अजय देवगन की जल्द ही रिलीज होने वाली फिल्म "लंदन ड्रीम्स" की बहुत चर्चा है। कहते हैं, यह दो दोस्त और उनकी दोस्ती की कहानी है। जिंदगी में एक भी सच्चा दोस्त हो तो जिंदगी ज्यादा बेहतर और खुशहाल हो जाती है। यह कतई जरूरी नहीं कि आपके बहुत सारे दोस्त हों लेकिन वह दोस्त आपको रिस्पेक्ट नहीं करे, आपको प्यार नहीं करे और आपको जाने-समझे नहीं तो दोस्ती के क्या मायने। इसलिए जिंदगी में एक दोस्त, एक सच्चा दोस्त होना जरूरी है, क्योंकि यही दोस्त आपका निराशा में हाथ थामकर रोशनी में ला खड़ा कर सकता है और यही दोस्त खुशी में आपके साथ नाच-गा सकता है। हर स्टूडेंट यह चाहता है कि दोस्तों की भीड़ में उसका कोई एक ही सही, ऐसा दोस्त हो जो उसको बेहतर ढंग से जाने-समझे, प्यार करे।
ऑनेस्टी
दोस्ती में ऑनेस्टी सबसे बड़ा मूल्य है। यदि फ्रैंडशिप में ऑनेस्टी होगी तो यह ज्यादा मजबूत होगी। कई बार देखा गया है कि ऑनेस्टी न होने के कारण ही कॉलेजेस में कई अच्छी दोस्ती टूट जाती हैं और जिंदगी में हमेशा के लिए एक कड़वा स्वाद दे जाती है। कई स्टूडेंट इस अनुभव को जिंदगीभर नहीं भूल पाते हैं। इसलिए अपने दोस्त के प्रति ईमानदार रहें।
लव एंड केयर
दोस्ती में प्यार-मोहब्बत न हो तो मजा ही क्या है। लेकिन प्यार-मोहब्बत का मतलब किसी तरह का स्वार्थ नहीं होता। यह किसी मतलब से नहीं की जाती और न ही इसके जरिए कोई मतलब हासिल किया जाता है। इसमें तो एक-दूसरे के प्रति लव एंड केयर की भावना होती है। एक-दूसरे का ध्यान रखा जाता है, एक-दूसरे की पसंद-नापसंद का ध्यान रखा जाता है।
यदि प्यार-मोहब्बत हो और अंडरस्टैंडिंग न हो तो भी बात नहीं बनती। कई बार दोस्तों में दरार आ जाती है और दोस्ती टूट जाती है। इसका एक बड़ा कारण होता है अंडरस्टैंडिंग की कमी। यदि दो दोस्तों के बीच बेहतर अंडरस्टैंडिंग होगी तो यह ज्यादा मजबूत होगी। अपने दोस्त को बेहतर ढंग से जानने-समझने की कोशिश करेंगे, तो गलतफहमियाँ पैदा नहीं होंगी।
रिस्पेक्ट
कई बार मौज और मस्ती के मूड में, जोश और जुनून में दोस्त अपने दोस्तों से ऐसी मजाक कर बैठते हैं, जो उन्हें नागवार गुजरता है। उन्हें इंसल्टिंग फील होता है। इसलिए यह ध्यान रखें कि आपका कितना भी अच्छा फ्रैंड हो, आपके कितने भी बेतकल्लुफ रिश्ते हों लेकिन वह आपसे चाहता है कि आप उसका रिस्पेक्ट करें। अक्सर दोस्त यह भूल जाते हैं। दोस्तों का रिस्पेक्ट करें।
कमिटमेंट
कमिटमेंट जीवन का एक ऐसा मूल्य है, जो आपको भी और आपके दोस्त को भी एक बेहतर इंसान बनाता है। कमिटमेंट का मतलब एक तरह का वादा। यह दूसरे के प्रति कुछ करने का जज्बा होता है। इसी जज्बे को कहते हैं कमिटमेंट। दूसरे के प्रति जुड़ाव का भाव, उसके प्रति जिम्मेदारी का बोध, यही कमिटमेंट होता है। दोस्तों के प्रति कमिट रहें।
एक एहसास है सबसे जुदा
दायरों के बाहर भी एक दुनिया है... ये तुमने ही मुझे बताया...वो दायरे जो हम खुद बना लेते हैं या हमें बने हुए मिलते हैं...तुम कैसे उन सभी दायरों के बाहर हमेशा मुझे मुस्कुराती हुईं खड़ी मिलतीं...हाँ तुम जब हाथ थामकर मुझे उन दायरों से बाहर ले गईं तो वो दुनिया अलग थी...
जिसका एहसास करना तो बहुत आसान हुआ करता लेकिन तुम्हारी आँखों में झाँकते हुए उन एहसासों को नाम देना उतना ही मुश्किल... हाँ बहुत मुश्किल पर जब भी तुम साथ चलते हुए यूँ ही मेरा हाथ थाम लेतीं तो यूँ लगता कि मुझे उस एहसास का नाम मिल गया हो...
तुम्हारे साथ उन भूले हुए दायरों और बहुत कहीं पीछे छूट गए रिश्तों के नाम को मैं याद ना तो किया करता और ना ही मुझे याद रहते। ऐसे कई अनगिनत तुम्हारे पूछे गए सवालों को मैं अपने कुर्ते की जेब में संभालकर रखता और तुम्हारे इंतजार में उन्हें बार-बार एक-एक करके निकालता...शायद किसी सवाल का जवाब मुझे मिल जाए...
हाँ लेकिन उन सवालों में छुपी हुई, घुली हुई तुम्हारी यादों को में एक-एक करके हाथ पर रखता और अपने चेहरे पर मल लेता...देखना चाहता कि तुम्हारी यादों के साथ मेरा चेहरा कैसा दिखता है...
सच कहूँ तो मैं ठीक से आज भी अपने चेहरे को उन यादों के साथ महसूस करने की कितनी भी कोशिश करूँ वो चेहरा कहीं दिखाई नहीं पड़ता... शायद वो चेहरा तुम अपने साथ जो ले गई हों...हाँ साथ ही ले गई होगी...नहीं तो मुझे मेरा चेहरा यूँ अजनबी-सा ना लगता, हाँ अगर कुछ याद रहता है तो वो पल जब तुमने उस रोज हमारे आस पास उन सभी एहसासों को बुला लिया था... और हम रिश्तों के दायरों से बहुत दूर कहीं एहसासों की बसाई हुई दुनिया में खुद को पाया हुआ महसूस कर रहे थे...
हाँ वो पल सबसे जुदा था... मैंने खुद को तो पाया ही तुम्हें भी पा लिया था। रिश्तों के दायरों से दूर और तुम्हारे-मेरे एहसासों के नजदीक मैं तुम्हें आज भी खुद के साथ पाता हूँ... हाँ यही तो एक एहसास है जो सबसे जुदा... सबसे सुखद है... और जो हमेशा मेरे साथ रहता है।
शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2010
गुदगुदी
प्रेमी और प्रेमिका
प्रेमिका (गुस्से में)- आज के बाद मैं तुमसे कभी भी बात नहीं करूँगी।
प्रेमी- क्या, तुम गूँगी होने वाली हो?
प्रेमिका- नहीं..., मैं तुम्हें बहरा करने वाली हूँ।
चिंटूजी अपनी बीवी और बच्चे के साथ फिल्म देखने गए।
फिल्म चलते-चलते एक 'लव सीन' आ टपका।
जैसे ही हीरोइन और हीरो गले मिलकर प्यार करने लगे।
बच्चा जोर से चिल्लाया - मम्मी, पापा! देखो- देखो! ये बेईमान तो सरासर आपकी नकल कर रहा हैं।
प्रेमिका (गुस्से में)- आज के बाद मैं तुमसे कभी भी बात नहीं करूँगी।
प्रेमी- क्या, तुम गूँगी होने वाली हो?
प्रेमिका- नहीं..., मैं तुम्हें बहरा करने वाली हूँ।
चिंटूजी अपनी बीवी और बच्चे के साथ फिल्म देखने गए।
फिल्म चलते-चलते एक 'लव सीन' आ टपका।
जैसे ही हीरोइन और हीरो गले मिलकर प्यार करने लगे।
बच्चा जोर से चिल्लाया - मम्मी, पापा! देखो- देखो! ये बेईमान तो सरासर आपकी नकल कर रहा हैं।
मनोरंजन
दो सहेलियाँ : किस्मत की कठपुतलियाँ
राजस्थान फिल्मकारों का हमेशा से प्रिय स्थान रहा है। कई फिल्मों की यहाँ शूटिंग हुई है। जी टीवी पर मार्च में आरंभ होने जा रहे है धारावाहिक ‘दो सहेलियाँ : किस्मत की कठपुतलियाँ’ की शूटिंग जैसलमेर और उसके आसपास के स्थानों पर की जा रही है।
रेगिस्तान की रेत, राजस्थानी हवेलियाँ, ऊँट और राजस्थानी संस्कृति की झलक इस धारावाहिक में देखने को मिलेगी। सीरियल के नाम से ही स्पष्ट है कि यह दो सहेलियों की कहानी है, जिनमें अमीरी-गरीबी, ऊँच-नीच जैसे कई अंतर हैं, लेकिन ये सारी बातें उनकी दोस्ती के रास्ते में रूकावट नहीं है।
धारावाहिक के एसोसिएट क्रिएटिव डायरेक्टर राहत अली खान बताते हैं कि कहानी की पृष्ठभूमि में राजस्थान है, इसलिए यहाँ पर शूटिंग की जा रही है ताकि सीरियल में वास्तविकता नजर आए। लगभग 50 एपिसोड के बाद में शूटिंग की जाएगी। कहानी के बारे में वे बताते हैं कि 6 वर्ष की उम्र से भवरी और मैथिली के बीच दोस्ती दिखाई जाएगी जो उनके युवा होने तक चलती है।
दोनों सहेलियों की दोस्ती गाँव वालों को अखरती है क्योंकि एक लड़की ऊँची जाति से है। इस वजह से उनके बीच रूकावट डालने के कई प्रयास किए जाते हैं। बंदिशों के बावजूद वे छुपकर मिलती हैं। जाति प्रथा से दोनों किस तरह निपटती हैं और उनकी जिंदगी में क्या उतार-चढ़ाव आते है, यह धारावाहिक में दिखाया जाएगा। इस धारावाहिक का निर्देशन संजय उपाध्याय ने किया है, जो गोविंद निहलानी के साथ काम कर चुके हैं, जबकि रत्ना सिंह प्रोड्यूसर हैं।
भवरी और मैथिली का किरदार क्रमश: अंकिता श्रीवास्तव और सुलग्ना पाणिग्रही निभा रही हैं।
माई नेम इज खान : साधारण आदमी की असाधारण यात्रा
निर्माता : हीरू यश जौहर, गौरी खान
निर्देशक : करण जौहर
कहानी-स्क्रीनप्ले : शिबानी बाठिजा
गीत : निरंजन आयंगार
संगीत : शंकर-अहसान-लॉय
कलाकार : शाहरुख खान, काजोल, जिमी शेरगिल, ज़रीना वहाब
यू/ए * दो घंटे 40 मिनट
रेटिंग : 3.5/5
ज्यादातर लोग धर्म के आधार पर राय बनाते हैं कि वह इंसान अच्छा है या बुरा है। 9/11 के बाद इस तरह के लोगों की संख्या में जबर्दस्त इजाफा हुआ है। अमेरिका और यूरोप में एशियाई लोगों के प्रति अन्य देशों के लोगों में नफरत बढ़ी है। ‘ट्विन टॉवर्स’ पर हमला करने वाले मुस्लिम थे, इसलिए सारे मुसलमानों को संदेह की दृष्टि से देखा जाने लगा। जबकि व्यक्ति का अच्छा या बुरा होना किसी धर्म से संबंध नहीं रखता है।
‘माई नेम इज खान’ में बरसों पुरानी सीधी और सादी बात कही गई है। ‘दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं अच्छे या बुरे।‘ इस लाइन के इर्दगिर्द निर्देशक करण जौहर और लेखिका शिबानी बाठिजा ने कहानी का तानाबाना बुना है। उपरोक्त बातें यदि सीधी-सीधी कही जाती तो संभव है कि ‘माई नेम इज खान’ डॉक्यूमेंट्री बन जाती और ज्यादा लोगों तक बात नहीं पहुँच पाती। इसलिए मनोरंजन को प्राथमिकता देते हुए लवस्टोरी को रखा गया और बैकड्रॉप में 9/11 की घटना से लोगों के जीवन और नजरिये पर क्या प्रभाव हुआ यह दिखाया गया।
कहानी है रिज़वान खान (शाहरुख खान) की। वह एस्पर्गर नामक बीमारी से पीड़ित है। ऐसा इंसान रहता तो बहुत होशियार है, लेकिन कुछ चीजों से वह डरता है। घबराता है। इसलिए आम लोगों से थोड़ा अलग दिखता है। रिज़वान पीला रंग देखकर बैचेन हो जाता है। अनजाने लोगों का साथ और भीड़ से उसे घबराहट होती है। शोर या तेज आवाज वह बर्दाश्त नहीं कर पाता। लेकिन वह खूब किताबें पढ़ता है। उसकी याददाश्त बेहद तेज है। टाइम-टेबल से वह काम करता है।
रिजवान पर अपनी माँ (जरीना वहाब) की बातों का गहरा असर है, जिसने उसे बचपन में इंसानियत के पाठ पढ़ाए थे। माँ के निधन के बाद रिज़वान अपने छोटे भाई जाकिर (जिमी शेरगिल) के पास अमेरिका चला जाता है। अपने भाई की कंपनी के प्रोडक्ट्स वह बाजार में जाकर बेचता है और उसकी मुलाकात मंदिरा (काजोल) से होती है।
मंदिरा अपने पति से अलग हो चुकी है और उसका एक बेटा है। रिजवान और मंदिरा एक-दूसरे को चाहने लगते हैं। जाकिर नहीं चाहता कि रिजवान हिंदू लड़की से शादी करे, लेकिन रिजवान उसकी बात नहीं मानता। शादी के बाद रिजवान और मंदिरा खुशहाल जिंदगी जीते हैं, लेकिन 9/11 की घटना के बाद उनकी जिंदगी में भूचाल आ जाता है।
एक ऐसी घटना घटती है कि रिजवान को मंदिरा अपनी जिंदगी से बाहर फेंक देती है। मंदिरा को फिर पाने के लिए रिजवान अमेरिका यात्रा पर निकलता है और किस तरह वह उसे वापस पाता है यह फिल्म का सार है।
कहानी में रोमांस और इमोशन का अच्छा स्कोप है और करण जौहर ने इसका पूरा फायदा उठाया है। उन्होंने कई छोटे-छोटे ऐसे दृश्य रचे हैं जो सीधे दिल को छू जाते हैं। काजोलBeautful & Gorgeous Photos of Kajol और शाहरुख के रोमांस वाला भाग बेहतरीन है। इसमें करण को ज्यादा मेहनत नहीं करना पड़ी होगी क्योंकि शाहरुख-काजोल में गजब की कैमेस्ट्री है। ‘बाजीगर’ को रिलीज हुए बरसों हो गए लेकिन इस गोल्डन कपल में अभी भी ताजगी नजर आती है।
समुद्र किनारे खड़े होकर शहर की ओर देखते हुए रिजवान कामयाब होने की बात कहता है। यह दृश्य शाहरुख की जिंदगी से लिया गया है। फिल्मों में आने के पहले मुंबईClick here to see more news from this city में समुद्र किनारे खड़े होकर उन्होंने इस शहर पर छा जाने का ख्वाब देखा था।
मध्यांतर के पहले वाला हिस्सा शानदार है। फिल्म की पहली फ्रेम से ही दर्शक रिजवान और मंदिरा के परिवार का हिस्सा बन जाता है और उनके दर्द और खुशी को वह महसूस करता है। फिल्म के दूसरे हिस्से में कुछ गैर-जरूरी दृश्य हैं और कहीं-कहीं फिल्म अति नाटकीयता का शिकार हुई है, लेकिन ये कमियाँ फिल्म की खूबियों के मुकाबले बहुत कम है।
फिल्म के मुख्य किरदार को एस्पर्जर सिंड्रोम से ग्रस्त क्यों दिखाया गया? इसके दो कारण है। पहला, फिल्म कुछ अलग दिखे, शाहरुख को कुछ कर दिखाने का अवसर मिले। और दूसरा कारण ये कि इंसानियत, धर्म, अच्छाई और बुराई को वो इंसान उन भले-चंगे लोगों से ज्यादा अच्छी तरह समझता है, जिसे लोगों को समझने में कठिनाई होती है।
शाहरुख खान के आलोचक अक्सर कहते हैं कि वे हर किरदार को शाहरुख बना देते हैं, लेकिन यहाँ वे रिजवान वे ऐसे घुल गए कि शाहरुख याद ही नहीं रहते। रिजवान की बॉडी लैंग्वेज, चलने और बोलने का अंदाज, उसकी कमियाँ, उसकी खूबियाँ को उन्होंने इतनी सूक्ष्मता से पकड़ा है कि लगने लगता है कि उनसे बेहतरीन इस किरदार को कोई और नहीं निभा सकता था। खासतौर पर रिजवान जब शरमाकर हँसता है तो उन दृश्यों में शाहरुख का अभिनय देखने लायक है। उन्होंने स्क्रिप्ट से उठकर अभिनय किया है। जो लोग कहानी से सहमत नहीं भी हो, उन लोगों को भी शाहरुख का अभिनय बाँधकर रखता है।
काजोल में चंचलता बरकरार है। मंदिरा के रूप में उनकी एक्टिंग देखने लायक है। कई दृश्यों में उनकी आँखें संवाद से ज्यादा बेहतर तरीके से अपनी बात कहती है। छोटी-छोटी भूमिकाओं में कई कलाकार हैं और सभी ने अपना काम बखूबी किया है।
रवि के चन्द्रन की सिनेमेटोग्राफी अंतरराष्ट्रीय स्तर की है। फिल्म का संपादन उम्दा है। शंकर-अहसान-लॉय ने फिल्म के मूड के अनुरूप संगीत दिया है।
‘माई नेम इज खान’ में कई मैसेजेस हैं, जिसमें अहम ये कि धर्म का चश्मा पहनकर व्यक्ति का आँकलन न किया जाए। शाहरुख-काजोल का अभिनय, करण का उम्दा निर्देशन और मनोरंजन के साथ संदेश ये बातें फिल्म को देखने लायक बनाती है।
पेरिस हिल्टन ने गुपचुप रचाई सगाई
28 वर्षीय पेरिस हिल्टन पहले कह चुकी हैं कि वर्ष 2010 में वे शादी के बंधन में बँध जाएगी। इस दिशा में उन्होंने एक कदम बढ़ा लिया है और अपने प्रेमी डॉफ रेनहॉर्ट से गुपचुप तरीके से सगाई रचा ली है।
अमेरिका में विशाल होटल चेन की मालकिन पेरिस के बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने ‘द हिल्स’ के पूर्व स्टार डॉफ के प्रस्ताव को एक चैरिटी समारोह में स्वीकार लिया है।
मिल गया सच्चा प्यार
डॉफ की तारीफ करते हुए पेरिस नहीं थकती हैं। वे कहती हैं कि जब से उन्हें डॉफ का साथ मिला है उनकी जिंदगी ही बदल गई है। जीवन जीने का अंदाज बदल गया है। वे पहले की तुलना में अब ज्यादा खुशी महसूस करती हैं। सच्चा प्यार क्या होता है ये उन्हें डॉफ से मिलने के बाद ही महसूस हुआ।
सबसे खूबसूरत लड़की
पेरिस को डॉफ दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की मानते हैं। उनके अनुसार वे सुंदर होने के साथ-साथ बुद्धिमान भी हैं और उनका पूरा परिवार पेरिस को बेहद चाहता है। डॉफ के मुताबिक पेरिस में एक आदर्श पत्नी बनने के सारे गुण हैं।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष अगस्त माह में डॉफ और पेरिस के बीच छोटी-मोटी अनबन हो गई थी, लेकिन बाद में वे फिर एक हो गए।
राजस्थान फिल्मकारों का हमेशा से प्रिय स्थान रहा है। कई फिल्मों की यहाँ शूटिंग हुई है। जी टीवी पर मार्च में आरंभ होने जा रहे है धारावाहिक ‘दो सहेलियाँ : किस्मत की कठपुतलियाँ’ की शूटिंग जैसलमेर और उसके आसपास के स्थानों पर की जा रही है।
रेगिस्तान की रेत, राजस्थानी हवेलियाँ, ऊँट और राजस्थानी संस्कृति की झलक इस धारावाहिक में देखने को मिलेगी। सीरियल के नाम से ही स्पष्ट है कि यह दो सहेलियों की कहानी है, जिनमें अमीरी-गरीबी, ऊँच-नीच जैसे कई अंतर हैं, लेकिन ये सारी बातें उनकी दोस्ती के रास्ते में रूकावट नहीं है।
धारावाहिक के एसोसिएट क्रिएटिव डायरेक्टर राहत अली खान बताते हैं कि कहानी की पृष्ठभूमि में राजस्थान है, इसलिए यहाँ पर शूटिंग की जा रही है ताकि सीरियल में वास्तविकता नजर आए। लगभग 50 एपिसोड के बाद में शूटिंग की जाएगी। कहानी के बारे में वे बताते हैं कि 6 वर्ष की उम्र से भवरी और मैथिली के बीच दोस्ती दिखाई जाएगी जो उनके युवा होने तक चलती है।
दोनों सहेलियों की दोस्ती गाँव वालों को अखरती है क्योंकि एक लड़की ऊँची जाति से है। इस वजह से उनके बीच रूकावट डालने के कई प्रयास किए जाते हैं। बंदिशों के बावजूद वे छुपकर मिलती हैं। जाति प्रथा से दोनों किस तरह निपटती हैं और उनकी जिंदगी में क्या उतार-चढ़ाव आते है, यह धारावाहिक में दिखाया जाएगा। इस धारावाहिक का निर्देशन संजय उपाध्याय ने किया है, जो गोविंद निहलानी के साथ काम कर चुके हैं, जबकि रत्ना सिंह प्रोड्यूसर हैं।
भवरी और मैथिली का किरदार क्रमश: अंकिता श्रीवास्तव और सुलग्ना पाणिग्रही निभा रही हैं।
माई नेम इज खान : साधारण आदमी की असाधारण यात्रा
निर्माता : हीरू यश जौहर, गौरी खान
निर्देशक : करण जौहर
कहानी-स्क्रीनप्ले : शिबानी बाठिजा
गीत : निरंजन आयंगार
संगीत : शंकर-अहसान-लॉय
कलाकार : शाहरुख खान, काजोल, जिमी शेरगिल, ज़रीना वहाब
यू/ए * दो घंटे 40 मिनट
रेटिंग : 3.5/5
ज्यादातर लोग धर्म के आधार पर राय बनाते हैं कि वह इंसान अच्छा है या बुरा है। 9/11 के बाद इस तरह के लोगों की संख्या में जबर्दस्त इजाफा हुआ है। अमेरिका और यूरोप में एशियाई लोगों के प्रति अन्य देशों के लोगों में नफरत बढ़ी है। ‘ट्विन टॉवर्स’ पर हमला करने वाले मुस्लिम थे, इसलिए सारे मुसलमानों को संदेह की दृष्टि से देखा जाने लगा। जबकि व्यक्ति का अच्छा या बुरा होना किसी धर्म से संबंध नहीं रखता है।
‘माई नेम इज खान’ में बरसों पुरानी सीधी और सादी बात कही गई है। ‘दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं अच्छे या बुरे।‘ इस लाइन के इर्दगिर्द निर्देशक करण जौहर और लेखिका शिबानी बाठिजा ने कहानी का तानाबाना बुना है। उपरोक्त बातें यदि सीधी-सीधी कही जाती तो संभव है कि ‘माई नेम इज खान’ डॉक्यूमेंट्री बन जाती और ज्यादा लोगों तक बात नहीं पहुँच पाती। इसलिए मनोरंजन को प्राथमिकता देते हुए लवस्टोरी को रखा गया और बैकड्रॉप में 9/11 की घटना से लोगों के जीवन और नजरिये पर क्या प्रभाव हुआ यह दिखाया गया।
कहानी है रिज़वान खान (शाहरुख खान) की। वह एस्पर्गर नामक बीमारी से पीड़ित है। ऐसा इंसान रहता तो बहुत होशियार है, लेकिन कुछ चीजों से वह डरता है। घबराता है। इसलिए आम लोगों से थोड़ा अलग दिखता है। रिज़वान पीला रंग देखकर बैचेन हो जाता है। अनजाने लोगों का साथ और भीड़ से उसे घबराहट होती है। शोर या तेज आवाज वह बर्दाश्त नहीं कर पाता। लेकिन वह खूब किताबें पढ़ता है। उसकी याददाश्त बेहद तेज है। टाइम-टेबल से वह काम करता है।
रिजवान पर अपनी माँ (जरीना वहाब) की बातों का गहरा असर है, जिसने उसे बचपन में इंसानियत के पाठ पढ़ाए थे। माँ के निधन के बाद रिज़वान अपने छोटे भाई जाकिर (जिमी शेरगिल) के पास अमेरिका चला जाता है। अपने भाई की कंपनी के प्रोडक्ट्स वह बाजार में जाकर बेचता है और उसकी मुलाकात मंदिरा (काजोल) से होती है।
मंदिरा अपने पति से अलग हो चुकी है और उसका एक बेटा है। रिजवान और मंदिरा एक-दूसरे को चाहने लगते हैं। जाकिर नहीं चाहता कि रिजवान हिंदू लड़की से शादी करे, लेकिन रिजवान उसकी बात नहीं मानता। शादी के बाद रिजवान और मंदिरा खुशहाल जिंदगी जीते हैं, लेकिन 9/11 की घटना के बाद उनकी जिंदगी में भूचाल आ जाता है।
एक ऐसी घटना घटती है कि रिजवान को मंदिरा अपनी जिंदगी से बाहर फेंक देती है। मंदिरा को फिर पाने के लिए रिजवान अमेरिका यात्रा पर निकलता है और किस तरह वह उसे वापस पाता है यह फिल्म का सार है।
कहानी में रोमांस और इमोशन का अच्छा स्कोप है और करण जौहर ने इसका पूरा फायदा उठाया है। उन्होंने कई छोटे-छोटे ऐसे दृश्य रचे हैं जो सीधे दिल को छू जाते हैं। काजोलBeautful & Gorgeous Photos of Kajol और शाहरुख के रोमांस वाला भाग बेहतरीन है। इसमें करण को ज्यादा मेहनत नहीं करना पड़ी होगी क्योंकि शाहरुख-काजोल में गजब की कैमेस्ट्री है। ‘बाजीगर’ को रिलीज हुए बरसों हो गए लेकिन इस गोल्डन कपल में अभी भी ताजगी नजर आती है।
समुद्र किनारे खड़े होकर शहर की ओर देखते हुए रिजवान कामयाब होने की बात कहता है। यह दृश्य शाहरुख की जिंदगी से लिया गया है। फिल्मों में आने के पहले मुंबईClick here to see more news from this city में समुद्र किनारे खड़े होकर उन्होंने इस शहर पर छा जाने का ख्वाब देखा था।
मध्यांतर के पहले वाला हिस्सा शानदार है। फिल्म की पहली फ्रेम से ही दर्शक रिजवान और मंदिरा के परिवार का हिस्सा बन जाता है और उनके दर्द और खुशी को वह महसूस करता है। फिल्म के दूसरे हिस्से में कुछ गैर-जरूरी दृश्य हैं और कहीं-कहीं फिल्म अति नाटकीयता का शिकार हुई है, लेकिन ये कमियाँ फिल्म की खूबियों के मुकाबले बहुत कम है।
फिल्म के मुख्य किरदार को एस्पर्जर सिंड्रोम से ग्रस्त क्यों दिखाया गया? इसके दो कारण है। पहला, फिल्म कुछ अलग दिखे, शाहरुख को कुछ कर दिखाने का अवसर मिले। और दूसरा कारण ये कि इंसानियत, धर्म, अच्छाई और बुराई को वो इंसान उन भले-चंगे लोगों से ज्यादा अच्छी तरह समझता है, जिसे लोगों को समझने में कठिनाई होती है।
शाहरुख खान के आलोचक अक्सर कहते हैं कि वे हर किरदार को शाहरुख बना देते हैं, लेकिन यहाँ वे रिजवान वे ऐसे घुल गए कि शाहरुख याद ही नहीं रहते। रिजवान की बॉडी लैंग्वेज, चलने और बोलने का अंदाज, उसकी कमियाँ, उसकी खूबियाँ को उन्होंने इतनी सूक्ष्मता से पकड़ा है कि लगने लगता है कि उनसे बेहतरीन इस किरदार को कोई और नहीं निभा सकता था। खासतौर पर रिजवान जब शरमाकर हँसता है तो उन दृश्यों में शाहरुख का अभिनय देखने लायक है। उन्होंने स्क्रिप्ट से उठकर अभिनय किया है। जो लोग कहानी से सहमत नहीं भी हो, उन लोगों को भी शाहरुख का अभिनय बाँधकर रखता है।
काजोल में चंचलता बरकरार है। मंदिरा के रूप में उनकी एक्टिंग देखने लायक है। कई दृश्यों में उनकी आँखें संवाद से ज्यादा बेहतर तरीके से अपनी बात कहती है। छोटी-छोटी भूमिकाओं में कई कलाकार हैं और सभी ने अपना काम बखूबी किया है।
रवि के चन्द्रन की सिनेमेटोग्राफी अंतरराष्ट्रीय स्तर की है। फिल्म का संपादन उम्दा है। शंकर-अहसान-लॉय ने फिल्म के मूड के अनुरूप संगीत दिया है।
‘माई नेम इज खान’ में कई मैसेजेस हैं, जिसमें अहम ये कि धर्म का चश्मा पहनकर व्यक्ति का आँकलन न किया जाए। शाहरुख-काजोल का अभिनय, करण का उम्दा निर्देशन और मनोरंजन के साथ संदेश ये बातें फिल्म को देखने लायक बनाती है।
पेरिस हिल्टन ने गुपचुप रचाई सगाई
28 वर्षीय पेरिस हिल्टन पहले कह चुकी हैं कि वर्ष 2010 में वे शादी के बंधन में बँध जाएगी। इस दिशा में उन्होंने एक कदम बढ़ा लिया है और अपने प्रेमी डॉफ रेनहॉर्ट से गुपचुप तरीके से सगाई रचा ली है।
अमेरिका में विशाल होटल चेन की मालकिन पेरिस के बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने ‘द हिल्स’ के पूर्व स्टार डॉफ के प्रस्ताव को एक चैरिटी समारोह में स्वीकार लिया है।
मिल गया सच्चा प्यार
डॉफ की तारीफ करते हुए पेरिस नहीं थकती हैं। वे कहती हैं कि जब से उन्हें डॉफ का साथ मिला है उनकी जिंदगी ही बदल गई है। जीवन जीने का अंदाज बदल गया है। वे पहले की तुलना में अब ज्यादा खुशी महसूस करती हैं। सच्चा प्यार क्या होता है ये उन्हें डॉफ से मिलने के बाद ही महसूस हुआ।
सबसे खूबसूरत लड़की
पेरिस को डॉफ दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की मानते हैं। उनके अनुसार वे सुंदर होने के साथ-साथ बुद्धिमान भी हैं और उनका पूरा परिवार पेरिस को बेहद चाहता है। डॉफ के मुताबिक पेरिस में एक आदर्श पत्नी बनने के सारे गुण हैं।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष अगस्त माह में डॉफ और पेरिस के बीच छोटी-मोटी अनबन हो गई थी, लेकिन बाद में वे फिर एक हो गए।
आज का सन्देश
बाघ बचाईये
देश भर में सिर्फ १०१८ बाघ ही बचें है.जंगलों में बाघों का सिकार बढ़ता ही जा रहा है.देश की शान है बाघ,इनका शिकार न करे.रक्षा करें.बाघ बचाईये.आईये हम सब मिलकर बाघों की रक्षा करनें का संकल्प लें.
देश भर में सिर्फ १०१८ बाघ ही बचें है.जंगलों में बाघों का सिकार बढ़ता ही जा रहा है.देश की शान है बाघ,इनका शिकार न करे.रक्षा करें.बाघ बचाईये.आईये हम सब मिलकर बाघों की रक्षा करनें का संकल्प लें.
महाशिवरात्रि
पर्वों का पर्व है महाशिवरात्रि
महाशिवरात्रि विशेष
रोहित बंछोर
NDशिवरात्रि मात्र एक हिन्दू त्योहार नहीं जिस दिन विविध पकवान पकाकर ग्रहण कर लिए जाए। यह न तो मात्र एक पर्व ही है जिस मौके पर किसी शिवलिंग अथवा शिवालय पर जाकर धूप-अगरबत्ती जलाकर इसकी इतिश्री कर दी जाय। न तो यह एक उत्सव ही है जिस दिन भगवान शिव की बारात के उपलक्ष्य में खोखली खुशी का इजहार कर दिया जाय। यह एक अति पावन महान उपहार है जो पारब्रह्म परमेश्वर के तीन रूपों में से एक रूप की पूर्ण उपासना के द्वारा वरदान के रूप में जीव मात्र को प्राप्त है।
यह पर्व परम पावन उपलब्धि है जो जीव मात्र को प्राप्त होकर उसके परम भाग्यशाली होने का संकेत देता है। यह परम सिद्धिदायक उस महान स्वरूप की उपासना का क्षण है जिसके बारे में संत शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास जी ने त्रिलोकपति मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के मुखारविन्द से कहलवाया है-
'शिवद्रोही मम दास कहावा। सो नर सपनेहु मोहि नहिं भावा।'
किन्तु इसकी उत्कट गुरुता एवं महत्ता को शिवसागर में और ज्यादा विषद रूप में देखा जा सकता है-
'धारयत्यखिलं दैवत्यं विष्णु विरंचि शक्तिसंयुतम्। जगदस्तित्वं यंत्रमंत्रं नमामि तंत्रात्मकं शिवम्।'
अर्थात् विविध शक्तियाँ, विष्णु एवं ब्रह्मा जिसके कारण देवी एवं देवता के रूप में विराजमान हैं, जिसके कारण जगत का अस्तित्व है, जो यंत्र हैं, मंत्र हैं। ऐसे तंत्र के रूप में विराजमान भगवान शिव को नमस्कार है।
ND'त्रिपथगामिनी गंगा जिनकी जटा में शरण एवं विश्राम पाती हैं, त्रिलोक (आकाश, पाताल एवं मृत्यु ) वासियों के त्रिकाल (भूत, भविष्य एवं वर्तमान) को जिनके त्रिनेत्र त्रिगुणात्मक (सतोगुणी, रजोगुणी एवं तमोगुणी) बनाते हैं, जिनके तीनों नेत्रों से उत्सर्जित होने वाली तीन अग्नि (जठराग्नि, बड़वाग्नि एवं दावाग्नि) जीव मात्र का शरीर पोषण करती हैं, जिनके त्रैराशिक तत्वों से जगत को त्रिरूप (आकार, प्रकार एवं विकार) प्राप्त होता है, जिनका त्रिविग्रह (शेषशायी विष्णु, शेषनागधारी शंकर तथा शेषावतार रुद्र) त्रिलोक के त्रिताप (दैहिक, दैविक एवं भौतिक) को त्रिविध रूप (यंत्र, मंत्र एवं तंत्र) के द्वारा नष्ट करता है ऐसे त्रिवेद (ऋग्, साम तथा यजुः अथवा मतान्तर से भग-रेती, भगवान-लिंग तथा अर्द्धनारीश्वर) रूप भगवान शिव आज मधुमास पूर्वा प्रदोषपरा त्रयोदशी तिथि को प्रसन्न हो।'
दक्षिण भारत का प्रसिद्ध एवं परमादरणीय ग्रन्थ 'नटराजम्' अपने इन उपरोक्त वाक्यों में भगवान शिव का सम्पूर्ण आलोक प्रस्तुत कर देता है। उपरोक्त वाक्यों पर ध्यान देने से यह बात विल्कुल स्पष्ट हो जाती है कि मधुमास अर्थात् चैत्र माह के पूर्व अर्थात् फाल्गुन मास की प्रदोषपरा अर्थात त्रयोदशी या शिवरात्रि को प्रपूजित भगवान शिव कुछ भी देना शेष नहीं रखते हैं। शिवरात्रि की प्रत्यक्ष महिमा से ओत-प्रोत एक परदेसी जो स्वयं अमेरिका में प्राच्य शोध संस्थान के विभागाध्यक्ष हैं अपनी स्मृति गाथा में लिखते हैं-
महाशिवरात्रि विशेष
रोहित बंछोर
NDशिवरात्रि मात्र एक हिन्दू त्योहार नहीं जिस दिन विविध पकवान पकाकर ग्रहण कर लिए जाए। यह न तो मात्र एक पर्व ही है जिस मौके पर किसी शिवलिंग अथवा शिवालय पर जाकर धूप-अगरबत्ती जलाकर इसकी इतिश्री कर दी जाय। न तो यह एक उत्सव ही है जिस दिन भगवान शिव की बारात के उपलक्ष्य में खोखली खुशी का इजहार कर दिया जाय। यह एक अति पावन महान उपहार है जो पारब्रह्म परमेश्वर के तीन रूपों में से एक रूप की पूर्ण उपासना के द्वारा वरदान के रूप में जीव मात्र को प्राप्त है।
यह पर्व परम पावन उपलब्धि है जो जीव मात्र को प्राप्त होकर उसके परम भाग्यशाली होने का संकेत देता है। यह परम सिद्धिदायक उस महान स्वरूप की उपासना का क्षण है जिसके बारे में संत शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास जी ने त्रिलोकपति मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के मुखारविन्द से कहलवाया है-
'शिवद्रोही मम दास कहावा। सो नर सपनेहु मोहि नहिं भावा।'
किन्तु इसकी उत्कट गुरुता एवं महत्ता को शिवसागर में और ज्यादा विषद रूप में देखा जा सकता है-
'धारयत्यखिलं दैवत्यं विष्णु विरंचि शक्तिसंयुतम्। जगदस्तित्वं यंत्रमंत्रं नमामि तंत्रात्मकं शिवम्।'
अर्थात् विविध शक्तियाँ, विष्णु एवं ब्रह्मा जिसके कारण देवी एवं देवता के रूप में विराजमान हैं, जिसके कारण जगत का अस्तित्व है, जो यंत्र हैं, मंत्र हैं। ऐसे तंत्र के रूप में विराजमान भगवान शिव को नमस्कार है।
ND'त्रिपथगामिनी गंगा जिनकी जटा में शरण एवं विश्राम पाती हैं, त्रिलोक (आकाश, पाताल एवं मृत्यु ) वासियों के त्रिकाल (भूत, भविष्य एवं वर्तमान) को जिनके त्रिनेत्र त्रिगुणात्मक (सतोगुणी, रजोगुणी एवं तमोगुणी) बनाते हैं, जिनके तीनों नेत्रों से उत्सर्जित होने वाली तीन अग्नि (जठराग्नि, बड़वाग्नि एवं दावाग्नि) जीव मात्र का शरीर पोषण करती हैं, जिनके त्रैराशिक तत्वों से जगत को त्रिरूप (आकार, प्रकार एवं विकार) प्राप्त होता है, जिनका त्रिविग्रह (शेषशायी विष्णु, शेषनागधारी शंकर तथा शेषावतार रुद्र) त्रिलोक के त्रिताप (दैहिक, दैविक एवं भौतिक) को त्रिविध रूप (यंत्र, मंत्र एवं तंत्र) के द्वारा नष्ट करता है ऐसे त्रिवेद (ऋग्, साम तथा यजुः अथवा मतान्तर से भग-रेती, भगवान-लिंग तथा अर्द्धनारीश्वर) रूप भगवान शिव आज मधुमास पूर्वा प्रदोषपरा त्रयोदशी तिथि को प्रसन्न हो।'
दक्षिण भारत का प्रसिद्ध एवं परमादरणीय ग्रन्थ 'नटराजम्' अपने इन उपरोक्त वाक्यों में भगवान शिव का सम्पूर्ण आलोक प्रस्तुत कर देता है। उपरोक्त वाक्यों पर ध्यान देने से यह बात विल्कुल स्पष्ट हो जाती है कि मधुमास अर्थात् चैत्र माह के पूर्व अर्थात् फाल्गुन मास की प्रदोषपरा अर्थात त्रयोदशी या शिवरात्रि को प्रपूजित भगवान शिव कुछ भी देना शेष नहीं रखते हैं। शिवरात्रि की प्रत्यक्ष महिमा से ओत-प्रोत एक परदेसी जो स्वयं अमेरिका में प्राच्य शोध संस्थान के विभागाध्यक्ष हैं अपनी स्मृति गाथा में लिखते हैं-
गुरुवार, 11 फ़रवरी 2010
वेलेंटाइन डे स्पेशल
कितना खूबसूरत है प्यार !
कौन-सा जादू है इस नन्हे शब्द 'प्यार' में कि सुनते ही रोम-रोम में शहद का मीठा अहसास जाग उठता है। जिसे लव हुआ नहीं, उसकी इच्छा है कि हो जाए, जिसे हो चुका है वह अपने सारे 'एफर्ट्स' उसे बनाए रखने में लगा रहा है। प्रेम, प्यार, इश्क, मोहब्बत, नेह, प्रीति, अनुराग, चाहत, आशिकी, लव। ओह! कितने-कितने नाम। और मतलब कितना स्वीट, सोबर और ब्यूटीफूल। आज प्रेम जैसा कोमल शब्द उस मखमली लगाव का अहसास क्यों नहीं कराता जो वह पहले कराता रहा है?
जो इन नाजुक भावनाओं की कच्ची राह से गुजर चुका है वही जानता है कि प्यार क्या है? कभी हरी दूब का कोमल स्पर्श, तो कभी चमकते चाँद की उजली चाँदनी।
सच्चा प्यार फीजिकल एट्रेक्शन नहीं है, बल्कि सुंदर सजीले रंगों की मनभावन बरखा है प्यार। अपने वेलेंटाइन की एक झलक देख लेने की 'पिंक' बेचैनी है प्यार। 'उसके' पास होने अहसास को याद करने की 'ऑरेंज' इच्छा है प्यार। उसकी आवाज सुनने को तरसते कानों की 'रेड' गुदगुदी है प्यार।
उसकी स्माइल के पर दिल में गुलाल की लहर का उठना है प्यार। उसके पहले उपहार से शरबती आँखों की बढ़ जाने वाली चमकीली रौनक है प्यार। कितने रंग छुपे हैं प्यार के अहसास में?
सूखे हुए फूल की झरी हुई पँखुरी है प्यार। किसी किताब के कवर में छुपी चॉकलेट की पन्नी भी प्यार है और बेरंग घिसा हुआ लोहे का छल्ला भी। प्यार कुछ भी हो सकता है। कभी भी हो सकता है। बस, जरूरत है गहरे-गहरे और बहुत गहरे अहसास की।
प्यार का अर्थ सिर्फ और सिर्फ देना है। और देने का भाव भी ऐसा कि सब कुछ देकर भी लगे कि अभी तो कुछ नहीं दिया।
प्यार किसी को पूरी तरह से पा लेने का स्वार्थ नहीं है, बल्कि डेटिंग पर अकेले में एक-दूजे को देखते रहने की भोली तमन्ना है प्यार। बाइक पर अपने साथी से लिपट जाना ही नहीं है प्यार, एक-दूसरे का रिस्पेक्ट और डिग्निटी है प्यार। उधार लेकर प्रेशियस गिफ्ट खरीदना ही नहीं है प्यार, बल्कि अपनी सैलेरी से खरीदा भावों से भीगा एक रेड रोज भी है प्यार। प्यार को और क्या नाम दिए जाएँ, वह तो बस प्यार है, उसे पनपने के लिए हेल्दी स्पेस दीजिए। वेलेंटाइन 'डे' के नाम पर लव को 'डैमेज' मत कीजिए।
प्यार की राह में थामे चलो हाथ
तेरे प्यार के सागर में डूबकर
हुआ है अहसास मुझे जन्नत का
जिंदगी की राहों में साथ तेरे चलकर
लगता है सपना भी मुझे हकीकत सा
इन्हीं पक्तिंयों की तरह प्यार भी एक ऐसा नशा है, जिसमें खोकर प्रेमी सपनों की उड़नतश्तरी में अपने भविष्य के सफर पर निकल पड़ते हैं। प्यार का हर लम्हा इतना प्यारा होता है कि उसमें जिंदगी की संपूर्णता का अहसास होता है। हर प्रेमी चाहता है कि उस लम्हें को थामकर बस उसी लम्हें की यादों में अपनी जिंदगी गुजार दें।
बदलते दौर के साथ आज प्रेमियों के लिए प्यार के मायने भी बदल गए है। उनके लिए आज प्यार करने की अहमियत तो है परंतु इस रिश्ते को उम्रभर निभाकर साथ चलने की समझ नहीं है। प्यार कोई मामूली चीज नहीं है, जिसे बाजार से खरीदा जा सके, यह कोई आदान-प्रदान की वस्तु नहीं है, जिसे दोस्तों के बीच बाँटा जा सके, प्यार तो आपसी समझ और अहसास का नाम है। यह तो दिलों की गहराईयों से उठती वो तरंग है, जो प्रेमियों को भीतर तक हिला कर रख देती है और उसे जिंदगी जीने का एक नया ढंग सीखाती है।
रिश्ते की अहमियत को जानना जरूरी :
प्यार करने से ज्यादा अहम होता है उसकी कद्र करना। यदि आप प्यार की गहराईयों को नहीं समझ पाएँगे तो शायद आप कभी प्यार ही नहीं कर पाएँगे। प्यार का एक अर्थ होता है सम्मान। यह कोई मजाक का रिश्ता नहीं है, जिसका मखौल बनाकर हर शाम दोस्तों की महफिल में अपने प्रेमी के नाम पर चुटकियाँ ली जाए। यह तो गोपनीयता का रिश्ता है, जिसके आवरण को सरेआम अनावृत करना अपने ही प्यार को बदनाम करना है। इस रिश्ते को जितना गोपनीय रखा जाए, उतना ही आप इस रिश्ते का आनन्द ले पाएँगे।
स्वार्थ से परे है ये रिश्ता :
कहते हैं जिस रिश्ते में 'प्रेम' का सामना 'स्वार्थ' से होता है वह रिश्ता अपनेपन का नहीं बल्कि 'औपचारिकता' व 'अजनबीपन' का रिश्ता है। प्रेम के रिश्तों में तो स्वार्थ और अहम के स्थान पर अदब, आग्रह और अपनापन होता है, जो इस रिश्ते को बोझिल बनाने से रोकता है। इस रिश्ते में अपने प्रेमी की खुशी में अपनी खुशियों की जगह बनाई जाती है ताकि आपसे प्यार करने वाले को यह आभास हो कि आपके लिए वो ही सर्वोपरि है।
रिश्ते में हो गंभीरता :
प्रेमी का चुनाव नहीं होता है, वो तो जाने-अनजाने किसी बहाने से हमारे जीवन में दस्तक देकर हमारी जिंदगी बन जाता है। प्रेम का रिश्ता शरारतों व हँसी-ठिठौली का रिश्ता है लेकिन इसका यह अभिप्राय नहीं है कि इस मौज-मस्ती में हम गंभीरता का ही त्याग कर दे। प्रेमी कोई इस्तेमाल की वस्तु नहीं है, जिसका जी भर के इस्तेमाल करके उसे उसके हाल पर छोड़ दिया जाए। यह तो आपका उम्रभर साथ निभाने वाला वफादार साथी है, जो आपसे रिश्ते में वफा व गंभीरता की उम्मीद लगाए बैठा है। हर रिश्ते की तरह प्रेम के रिश्ते में भी गंभीरता का होना लाजिमी है, क्योंकि इसी से यह रिश्ता टिकाऊ व दीर्घायु बनता है।
बदले की भावना न पनपने दे :
एक-दूसरे की बराबरी करने व उसे नीचा दिखाने के लिए उसके कृत्य को उसी के सामने दोहराना समझदारी का नहीं बल्कि मूर्खता का परिचायक है। प्रेम की गाड़ी को जीवन के पथ पर सरपट चलाने के लिए जरूरी है दोनों में से किसी एक का समझदार व गंभीर होना। एक-दूसरे के प्रति द्वेष भावना रखकर यदि आप प्यार का ढोंग करेंगे तो माफ कीजिएगा आप अपना और अपने प्रेमी दोनों का वक्त और जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं।
आलोचक है अच्छे :
जिस तरह सर्फ एक्सेल के होते हुए 'दाग' अच्छे लगते है। उसी प्रकार आलोचकों का साथ होने पर प्रेमियों के लिए प्यार करने का मजा ही अलग है। आलोचक ही वो लोग है जो अफवाहों के बीच किसी रिश्ते को जन्म देते हैं और चर्चाओं के बाजार को गर्म रखते हैं। ये फुरसती लोग अपने ढंग से प्यार को नई दिशा और गति देते हैं और प्रेमी अपनी समझदारी से अपने रिश्ते को नया आयाम और ऊचाईयाँ देते हैं। इसलिए बेहतर होगा ऐसे आलोचकों की सुनने के बजाय अपने रिश्ते को गंभीर बनाने के प्रयास किए जाए तथा साल के हर दिन अपने प्रेमी से प्रेम का इजहार किया जाए।
गुलाब कहें 'आई लव यू...'
मानव इतिहास में प्रेम, पवित्रता, समर्पण, प्रेरणा, सौंदर्य, लालित्य, संवेदना, साधना और आसक्ति के प्रतीक के रूप में गुलाब का उल्लेख मिलता है। यदि आप अपने प्यार का इजहार कुछ अलग ही अंदाज में करना चाहते हैं, तो आप गुलाब के फूलों का उपहार भेज दीजिए। गुलाब आपके दिल की जुबाँ को बयान कर देते हैं। 1600 ई. में गुलाब के बारे में एक पर्शियल पोएट्री सामने आई, चार्ल्स द्वितीय ने इस पर्शियल पोएट्री को योरप तक पहुँचाया।
सन् 1716 में लेडी मैरी वार्टले मॉग्टेग्यू ने फ्लॉवर लैंग्वेज को टर्की से इंग्लैंड पहुँचाया। इसके बाद यह फ्रांस पहुँची, धीरे-धीरे फ्लॉवर मैसेज की एक बुक तैयार हो गई, जिसमें 800 से अधिक फ्लॉवर मैसेज हो चुके हैं। प्रेमियों के बीच गुलाब के लेन-देन का सिलसिला काफी लोकप्रिय है।
आज दुनिया भर के अधिकतर प्रेमी अपने प्रेम का इजहार गुलाब देकर ही करते हैं। रोज कुछ इस तरह से अपना संदेश देता है।
- सुर्ख गुलाब कहता है, 'मैं तुमसे प्यार करता हूँ।'
- सफेद गुलाब कहता है, 'हमारा प्यार पवित्र है।'
- लाल और सफेद गुलाब एक साथ होने पर यह संकेत है एकता और आग व पानी का।'
- पूरी तरह से खिला, भरा-भरा लाल गुलाब कहता है, 'आप बहुत खूबसूरत हैं।'
- एक पूरे खिले हुए गुलाब के साथ रखी दो कलियाँ आश्वासन देती है सुरक्षा का।'
- सफेद गुलाब की बंद कली समझाती है अभी आप बेहद छोटे हैं प्यार करने के लिए।
- पीला गुलाब कुछ संशय में रहता है और कहता है, 'मैं तुमसे प्यार करता हूँ, पर तुम्हारे दिल में क्या है, यह मैं नहीं जानता।'
- अगर टहनी पर काँटों के अलावा एक पत्ती भी न हो तो मतलब है, यहाँ कुछ नहीं है न डर, न आशा, तुम्हारी खूबसूरती, तुम्हारी मधुरता में मेरी सारी चेतना खो सी गई है।
- नारंगी गुलाब का कहना है, 'मेरा प्यार अनंत है तुम्हारे लिए और 'तुम मेरी हो सिर्फ मेरी हो।'
- चार पत्तियों को जोड़ता हुआ गुलाबों के गुच्छे का मतलब है, बेस्ट ऑफ लक।
- काँटे निकली लंबी टहनी पर इठलाती बंद कली दम भरती है, 'प्यार किया है प्यार करेंगे हमको किसी का डर नहीं।'
- एक अकेली लंबी डंडी के साथ सुर्ख गुलाब का अर्थ होता है, 'मैं अभी भी तुम्हें प्यार करता हूँ।'
- चमेलिया गुलाब, मैं तुम्हें प्यार करता हूँ क्या तुम भी प्यार करती हो, यानी एक तरफा प्यार।
- पूरे खिले लाल गुलाबों का गुच्छा कृतज्ञता, आधार, श्रद्धा नमन।
- कालिमा लिए हुए गुलाब की कली-हाँ मैंने भी प्यार किया है।
- संकरित गुलाब-मैं तुम्हें हमेशा याद रखूँगा।
- रिबन से बँधे दो गुलाब-सगाई हो चुकी है।
- बर्नेट गुलाब-'मैं तुम्हें चाहता रहूँगा कयामत तक।'
- दो कलियों के साथ खिलता हुआ एक गुलाब-गोपनीयता का प्रतीक।
- गुलाब का बना ताज- तुम्हें पुरस्कार मिला हमें अपार खुशी मिली, मेरी ओर से बधाई स्वीकार।
- मुरझाया हुआ सफेद गुलाब, 'आप मुझे प्रभावित नहीं कर सकें' या मैं तुम्हें प्यार नहीं करती।
- गहरा बरगंडी गुलाब, 'तुम अपनी सुंदरता से बेखबर हो।'
- लाल गुलाब-चाहत, खुशी, सौंदर्य, आवेग।
- पीला गुलाब-ईर्ष्या, प्रेम में कमी।
- सफेद गुलाब-रोशनी का फूल, मासूमियत, पवित्रता, अणध्यात्मिकता, सौम्यता।
- गुलाबी गुलाब- सादगी, प्रेम।
- लाल गुलाब की कली- निश्छल प्यार।
- सफेद गुलाब की कली- लड़कपन।
- मुरझाया गुलाब का गुच्छा- नकारा प्रेम, तुम्हारा प्यार मुझे स्वीकार नहीं।
- गुलाब के साथ काँटे- हर तरह से तुम्हें स्वीकार करूँगा।
प्रेमियों के नाम वेलेंटाइन का खत
प्यार करने वालों को मेरा सलाम,
आज मेरा दिन है, वेलेंटाइन डे। मेरी एक और बरसी, प्यार की याद में समर्पित एक और 14 फरवरी। मैंने जब रोम के युवकों की चोरी छुपे शादियाँ करवाई तो कभी सोचा न था कि मेरी ये चोरी एक दिन ऐसा रंग लाएगी। मैंने जब जेलर की बेटी को प्रेम संदेश दिया तो मैंने ये भी नहीं सोचा था कि इस संदेश को सदियों तक पीढ़ियाँ दोहराएँगी।
मैंने नहीं सोचा था कि जिस रात में पकड़ा गया उस रात जिस जोड़े की मैंने शादी कराई उनके साथ प्यार भी हमेशा-हमेशा के लिए आजाद हो जाएगा। मैंने यह भी नहीं सोचा था कि जो बातें मैंने जेलर की बेटी से घंटो बैठकर साझा की वो ऐसी दास्तान बन जाएगी जो भले ही कलम से न लिखी जाए लेकिन सबके जहन में कसक बनकर जिंदा रहेगी।
लेकिन मैंने ये कभी नहीं सोचा था कि 969 AD का प्यार 2010 तक आते-आते मोबाइल और इंटरनेट का प्यार बन जाएगा। मैंने ये भी नहीं सोचा था कि प्यार महँगे गुलाबों की खुशबू में खो जाएगा। मैंने ये भी नहीं सोचा था कि प्यार बाइक पर घूमने का लुफ्त हो जाएगा। मैंने नहीं सोचा था कि प्यार पिक एंड ड्रॉप फेसिलिटी बन जाएगा। मैंने ये भी नहीं सोचा था की प्यार क्लॉडियस की जेल से छूटकर राजनीति की गिरफ्त में आ जाएगा।
माना की जमाने के साथ हर चीज बदलती है लेकिन प्यार 'हर चीज' जैसी तो कोई चीज नहीं है। प्यार तो एहसास है और एहसास हर जमाने में एहसास ही हुआ करता है। प्यार के इजहार को बदलने के चक्कर में लगता है प्यार को ही बदला जा रहा है। जेल में मेरे कद्रदानों के भेजे फूल मुझे आज भी ताजा लगते हैं और उनके प्यार भरे संदेश मुझे आज भी जिंदगी से भर देते हैं। फिर दुनिया में प्यार कैसे बदल सकता है।
मैंने कुछ नहीं सोचा और प्यार भी सोचने की चीज नहीं हैं। कभी-कभी सही काम करने की भी सजा भुगतनी पड़ती है और बहुत सारे अच्छे काम भी हैं जो बिना सोचे किए जाते हैं। मैंने भी ऐसा ही काम किया था जिसकी मुझे सजा मिली। मैंने दिलों को मिलाया क्योंकि वो मुझे सही लगा।
मैं आपसे भी यही चाहता हूँ कि प्यार करें तो बिना सोचे समझे। आपका प्यार जैसा है वैसा ही स्वीकार करें। सोचने समझने के लिए जिंदगी में और भी चीजें हैं। खैर, मेरे न सोचने से इतना सब हो गया तो अगर ये सोचूँ कि प्यार वापस अपनी असली शक्ल लेगा तो शायद जरूर हो ही जाए।
प्यार के साथ,
आपका वेलेंटाइन
कौन-सा जादू है इस नन्हे शब्द 'प्यार' में कि सुनते ही रोम-रोम में शहद का मीठा अहसास जाग उठता है। जिसे लव हुआ नहीं, उसकी इच्छा है कि हो जाए, जिसे हो चुका है वह अपने सारे 'एफर्ट्स' उसे बनाए रखने में लगा रहा है। प्रेम, प्यार, इश्क, मोहब्बत, नेह, प्रीति, अनुराग, चाहत, आशिकी, लव। ओह! कितने-कितने नाम। और मतलब कितना स्वीट, सोबर और ब्यूटीफूल। आज प्रेम जैसा कोमल शब्द उस मखमली लगाव का अहसास क्यों नहीं कराता जो वह पहले कराता रहा है?
जो इन नाजुक भावनाओं की कच्ची राह से गुजर चुका है वही जानता है कि प्यार क्या है? कभी हरी दूब का कोमल स्पर्श, तो कभी चमकते चाँद की उजली चाँदनी।
सच्चा प्यार फीजिकल एट्रेक्शन नहीं है, बल्कि सुंदर सजीले रंगों की मनभावन बरखा है प्यार। अपने वेलेंटाइन की एक झलक देख लेने की 'पिंक' बेचैनी है प्यार। 'उसके' पास होने अहसास को याद करने की 'ऑरेंज' इच्छा है प्यार। उसकी आवाज सुनने को तरसते कानों की 'रेड' गुदगुदी है प्यार।
उसकी स्माइल के पर दिल में गुलाल की लहर का उठना है प्यार। उसके पहले उपहार से शरबती आँखों की बढ़ जाने वाली चमकीली रौनक है प्यार। कितने रंग छुपे हैं प्यार के अहसास में?
सूखे हुए फूल की झरी हुई पँखुरी है प्यार। किसी किताब के कवर में छुपी चॉकलेट की पन्नी भी प्यार है और बेरंग घिसा हुआ लोहे का छल्ला भी। प्यार कुछ भी हो सकता है। कभी भी हो सकता है। बस, जरूरत है गहरे-गहरे और बहुत गहरे अहसास की।
प्यार का अर्थ सिर्फ और सिर्फ देना है। और देने का भाव भी ऐसा कि सब कुछ देकर भी लगे कि अभी तो कुछ नहीं दिया।
प्यार किसी को पूरी तरह से पा लेने का स्वार्थ नहीं है, बल्कि डेटिंग पर अकेले में एक-दूजे को देखते रहने की भोली तमन्ना है प्यार। बाइक पर अपने साथी से लिपट जाना ही नहीं है प्यार, एक-दूसरे का रिस्पेक्ट और डिग्निटी है प्यार। उधार लेकर प्रेशियस गिफ्ट खरीदना ही नहीं है प्यार, बल्कि अपनी सैलेरी से खरीदा भावों से भीगा एक रेड रोज भी है प्यार। प्यार को और क्या नाम दिए जाएँ, वह तो बस प्यार है, उसे पनपने के लिए हेल्दी स्पेस दीजिए। वेलेंटाइन 'डे' के नाम पर लव को 'डैमेज' मत कीजिए।
प्यार की राह में थामे चलो हाथ
तेरे प्यार के सागर में डूबकर
हुआ है अहसास मुझे जन्नत का
जिंदगी की राहों में साथ तेरे चलकर
लगता है सपना भी मुझे हकीकत सा
इन्हीं पक्तिंयों की तरह प्यार भी एक ऐसा नशा है, जिसमें खोकर प्रेमी सपनों की उड़नतश्तरी में अपने भविष्य के सफर पर निकल पड़ते हैं। प्यार का हर लम्हा इतना प्यारा होता है कि उसमें जिंदगी की संपूर्णता का अहसास होता है। हर प्रेमी चाहता है कि उस लम्हें को थामकर बस उसी लम्हें की यादों में अपनी जिंदगी गुजार दें।
बदलते दौर के साथ आज प्रेमियों के लिए प्यार के मायने भी बदल गए है। उनके लिए आज प्यार करने की अहमियत तो है परंतु इस रिश्ते को उम्रभर निभाकर साथ चलने की समझ नहीं है। प्यार कोई मामूली चीज नहीं है, जिसे बाजार से खरीदा जा सके, यह कोई आदान-प्रदान की वस्तु नहीं है, जिसे दोस्तों के बीच बाँटा जा सके, प्यार तो आपसी समझ और अहसास का नाम है। यह तो दिलों की गहराईयों से उठती वो तरंग है, जो प्रेमियों को भीतर तक हिला कर रख देती है और उसे जिंदगी जीने का एक नया ढंग सीखाती है।
रिश्ते की अहमियत को जानना जरूरी :
प्यार करने से ज्यादा अहम होता है उसकी कद्र करना। यदि आप प्यार की गहराईयों को नहीं समझ पाएँगे तो शायद आप कभी प्यार ही नहीं कर पाएँगे। प्यार का एक अर्थ होता है सम्मान। यह कोई मजाक का रिश्ता नहीं है, जिसका मखौल बनाकर हर शाम दोस्तों की महफिल में अपने प्रेमी के नाम पर चुटकियाँ ली जाए। यह तो गोपनीयता का रिश्ता है, जिसके आवरण को सरेआम अनावृत करना अपने ही प्यार को बदनाम करना है। इस रिश्ते को जितना गोपनीय रखा जाए, उतना ही आप इस रिश्ते का आनन्द ले पाएँगे।
स्वार्थ से परे है ये रिश्ता :
कहते हैं जिस रिश्ते में 'प्रेम' का सामना 'स्वार्थ' से होता है वह रिश्ता अपनेपन का नहीं बल्कि 'औपचारिकता' व 'अजनबीपन' का रिश्ता है। प्रेम के रिश्तों में तो स्वार्थ और अहम के स्थान पर अदब, आग्रह और अपनापन होता है, जो इस रिश्ते को बोझिल बनाने से रोकता है। इस रिश्ते में अपने प्रेमी की खुशी में अपनी खुशियों की जगह बनाई जाती है ताकि आपसे प्यार करने वाले को यह आभास हो कि आपके लिए वो ही सर्वोपरि है।
रिश्ते में हो गंभीरता :
प्रेमी का चुनाव नहीं होता है, वो तो जाने-अनजाने किसी बहाने से हमारे जीवन में दस्तक देकर हमारी जिंदगी बन जाता है। प्रेम का रिश्ता शरारतों व हँसी-ठिठौली का रिश्ता है लेकिन इसका यह अभिप्राय नहीं है कि इस मौज-मस्ती में हम गंभीरता का ही त्याग कर दे। प्रेमी कोई इस्तेमाल की वस्तु नहीं है, जिसका जी भर के इस्तेमाल करके उसे उसके हाल पर छोड़ दिया जाए। यह तो आपका उम्रभर साथ निभाने वाला वफादार साथी है, जो आपसे रिश्ते में वफा व गंभीरता की उम्मीद लगाए बैठा है। हर रिश्ते की तरह प्रेम के रिश्ते में भी गंभीरता का होना लाजिमी है, क्योंकि इसी से यह रिश्ता टिकाऊ व दीर्घायु बनता है।
बदले की भावना न पनपने दे :
एक-दूसरे की बराबरी करने व उसे नीचा दिखाने के लिए उसके कृत्य को उसी के सामने दोहराना समझदारी का नहीं बल्कि मूर्खता का परिचायक है। प्रेम की गाड़ी को जीवन के पथ पर सरपट चलाने के लिए जरूरी है दोनों में से किसी एक का समझदार व गंभीर होना। एक-दूसरे के प्रति द्वेष भावना रखकर यदि आप प्यार का ढोंग करेंगे तो माफ कीजिएगा आप अपना और अपने प्रेमी दोनों का वक्त और जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं।
आलोचक है अच्छे :
जिस तरह सर्फ एक्सेल के होते हुए 'दाग' अच्छे लगते है। उसी प्रकार आलोचकों का साथ होने पर प्रेमियों के लिए प्यार करने का मजा ही अलग है। आलोचक ही वो लोग है जो अफवाहों के बीच किसी रिश्ते को जन्म देते हैं और चर्चाओं के बाजार को गर्म रखते हैं। ये फुरसती लोग अपने ढंग से प्यार को नई दिशा और गति देते हैं और प्रेमी अपनी समझदारी से अपने रिश्ते को नया आयाम और ऊचाईयाँ देते हैं। इसलिए बेहतर होगा ऐसे आलोचकों की सुनने के बजाय अपने रिश्ते को गंभीर बनाने के प्रयास किए जाए तथा साल के हर दिन अपने प्रेमी से प्रेम का इजहार किया जाए।
गुलाब कहें 'आई लव यू...'
मानव इतिहास में प्रेम, पवित्रता, समर्पण, प्रेरणा, सौंदर्य, लालित्य, संवेदना, साधना और आसक्ति के प्रतीक के रूप में गुलाब का उल्लेख मिलता है। यदि आप अपने प्यार का इजहार कुछ अलग ही अंदाज में करना चाहते हैं, तो आप गुलाब के फूलों का उपहार भेज दीजिए। गुलाब आपके दिल की जुबाँ को बयान कर देते हैं। 1600 ई. में गुलाब के बारे में एक पर्शियल पोएट्री सामने आई, चार्ल्स द्वितीय ने इस पर्शियल पोएट्री को योरप तक पहुँचाया।
सन् 1716 में लेडी मैरी वार्टले मॉग्टेग्यू ने फ्लॉवर लैंग्वेज को टर्की से इंग्लैंड पहुँचाया। इसके बाद यह फ्रांस पहुँची, धीरे-धीरे फ्लॉवर मैसेज की एक बुक तैयार हो गई, जिसमें 800 से अधिक फ्लॉवर मैसेज हो चुके हैं। प्रेमियों के बीच गुलाब के लेन-देन का सिलसिला काफी लोकप्रिय है।
आज दुनिया भर के अधिकतर प्रेमी अपने प्रेम का इजहार गुलाब देकर ही करते हैं। रोज कुछ इस तरह से अपना संदेश देता है।
- सुर्ख गुलाब कहता है, 'मैं तुमसे प्यार करता हूँ।'
- सफेद गुलाब कहता है, 'हमारा प्यार पवित्र है।'
- लाल और सफेद गुलाब एक साथ होने पर यह संकेत है एकता और आग व पानी का।'
- पूरी तरह से खिला, भरा-भरा लाल गुलाब कहता है, 'आप बहुत खूबसूरत हैं।'
- एक पूरे खिले हुए गुलाब के साथ रखी दो कलियाँ आश्वासन देती है सुरक्षा का।'
- सफेद गुलाब की बंद कली समझाती है अभी आप बेहद छोटे हैं प्यार करने के लिए।
- पीला गुलाब कुछ संशय में रहता है और कहता है, 'मैं तुमसे प्यार करता हूँ, पर तुम्हारे दिल में क्या है, यह मैं नहीं जानता।'
- अगर टहनी पर काँटों के अलावा एक पत्ती भी न हो तो मतलब है, यहाँ कुछ नहीं है न डर, न आशा, तुम्हारी खूबसूरती, तुम्हारी मधुरता में मेरी सारी चेतना खो सी गई है।
- नारंगी गुलाब का कहना है, 'मेरा प्यार अनंत है तुम्हारे लिए और 'तुम मेरी हो सिर्फ मेरी हो।'
- चार पत्तियों को जोड़ता हुआ गुलाबों के गुच्छे का मतलब है, बेस्ट ऑफ लक।
- काँटे निकली लंबी टहनी पर इठलाती बंद कली दम भरती है, 'प्यार किया है प्यार करेंगे हमको किसी का डर नहीं।'
- एक अकेली लंबी डंडी के साथ सुर्ख गुलाब का अर्थ होता है, 'मैं अभी भी तुम्हें प्यार करता हूँ।'
- चमेलिया गुलाब, मैं तुम्हें प्यार करता हूँ क्या तुम भी प्यार करती हो, यानी एक तरफा प्यार।
- पूरे खिले लाल गुलाबों का गुच्छा कृतज्ञता, आधार, श्रद्धा नमन।
- कालिमा लिए हुए गुलाब की कली-हाँ मैंने भी प्यार किया है।
- संकरित गुलाब-मैं तुम्हें हमेशा याद रखूँगा।
- रिबन से बँधे दो गुलाब-सगाई हो चुकी है।
- बर्नेट गुलाब-'मैं तुम्हें चाहता रहूँगा कयामत तक।'
- दो कलियों के साथ खिलता हुआ एक गुलाब-गोपनीयता का प्रतीक।
- गुलाब का बना ताज- तुम्हें पुरस्कार मिला हमें अपार खुशी मिली, मेरी ओर से बधाई स्वीकार।
- मुरझाया हुआ सफेद गुलाब, 'आप मुझे प्रभावित नहीं कर सकें' या मैं तुम्हें प्यार नहीं करती।
- गहरा बरगंडी गुलाब, 'तुम अपनी सुंदरता से बेखबर हो।'
- लाल गुलाब-चाहत, खुशी, सौंदर्य, आवेग।
- पीला गुलाब-ईर्ष्या, प्रेम में कमी।
- सफेद गुलाब-रोशनी का फूल, मासूमियत, पवित्रता, अणध्यात्मिकता, सौम्यता।
- गुलाबी गुलाब- सादगी, प्रेम।
- लाल गुलाब की कली- निश्छल प्यार।
- सफेद गुलाब की कली- लड़कपन।
- मुरझाया गुलाब का गुच्छा- नकारा प्रेम, तुम्हारा प्यार मुझे स्वीकार नहीं।
- गुलाब के साथ काँटे- हर तरह से तुम्हें स्वीकार करूँगा।
प्रेमियों के नाम वेलेंटाइन का खत
प्यार करने वालों को मेरा सलाम,
आज मेरा दिन है, वेलेंटाइन डे। मेरी एक और बरसी, प्यार की याद में समर्पित एक और 14 फरवरी। मैंने जब रोम के युवकों की चोरी छुपे शादियाँ करवाई तो कभी सोचा न था कि मेरी ये चोरी एक दिन ऐसा रंग लाएगी। मैंने जब जेलर की बेटी को प्रेम संदेश दिया तो मैंने ये भी नहीं सोचा था कि इस संदेश को सदियों तक पीढ़ियाँ दोहराएँगी।
मैंने नहीं सोचा था कि जिस रात में पकड़ा गया उस रात जिस जोड़े की मैंने शादी कराई उनके साथ प्यार भी हमेशा-हमेशा के लिए आजाद हो जाएगा। मैंने यह भी नहीं सोचा था कि जो बातें मैंने जेलर की बेटी से घंटो बैठकर साझा की वो ऐसी दास्तान बन जाएगी जो भले ही कलम से न लिखी जाए लेकिन सबके जहन में कसक बनकर जिंदा रहेगी।
लेकिन मैंने ये कभी नहीं सोचा था कि 969 AD का प्यार 2010 तक आते-आते मोबाइल और इंटरनेट का प्यार बन जाएगा। मैंने ये भी नहीं सोचा था कि प्यार महँगे गुलाबों की खुशबू में खो जाएगा। मैंने ये भी नहीं सोचा था कि प्यार बाइक पर घूमने का लुफ्त हो जाएगा। मैंने नहीं सोचा था कि प्यार पिक एंड ड्रॉप फेसिलिटी बन जाएगा। मैंने ये भी नहीं सोचा था की प्यार क्लॉडियस की जेल से छूटकर राजनीति की गिरफ्त में आ जाएगा।
माना की जमाने के साथ हर चीज बदलती है लेकिन प्यार 'हर चीज' जैसी तो कोई चीज नहीं है। प्यार तो एहसास है और एहसास हर जमाने में एहसास ही हुआ करता है। प्यार के इजहार को बदलने के चक्कर में लगता है प्यार को ही बदला जा रहा है। जेल में मेरे कद्रदानों के भेजे फूल मुझे आज भी ताजा लगते हैं और उनके प्यार भरे संदेश मुझे आज भी जिंदगी से भर देते हैं। फिर दुनिया में प्यार कैसे बदल सकता है।
मैंने कुछ नहीं सोचा और प्यार भी सोचने की चीज नहीं हैं। कभी-कभी सही काम करने की भी सजा भुगतनी पड़ती है और बहुत सारे अच्छे काम भी हैं जो बिना सोचे किए जाते हैं। मैंने भी ऐसा ही काम किया था जिसकी मुझे सजा मिली। मैंने दिलों को मिलाया क्योंकि वो मुझे सही लगा।
मैं आपसे भी यही चाहता हूँ कि प्यार करें तो बिना सोचे समझे। आपका प्यार जैसा है वैसा ही स्वीकार करें। सोचने समझने के लिए जिंदगी में और भी चीजें हैं। खैर, मेरे न सोचने से इतना सब हो गया तो अगर ये सोचूँ कि प्यार वापस अपनी असली शक्ल लेगा तो शायद जरूर हो ही जाए।
प्यार के साथ,
आपका वेलेंटाइन
मुलाकात
इंसानियत पर आधारित है ‘माई नेम इज खान’:शाहरुख खान
strong>फिल्म में मैं रिजवान खान का किरदार निभा रहा हूँ जिसे एस्पर्जर नाम की बीमारी है। कांदिवली से लेकर अमेरिका तक के उसके सफर की कहानी इस फिल्म में दिखाई गई है। उसे सीधी बात ही समझ में आती है। एक अलग तरह के रूप में दर्शक इस बार मुझे देखेंगे और उम्मीद करता हूँ कि उसे पसंद करेंगे।
फिल्म का नाम आपको कितना सार्थक लगता है ?
फिल्म की कहानी रिजवान खान के इर्द-गिर्द घूमती है। वह पूरी फिल्म का आधार है और खान उसका सरनेम है। फिल्म में बातचीत के दौरान इस वाक्य का प्रयोग किया गया है। यह एक साधारण-सा वाक्य है जो कहानी को जोड़ता है इसलिए इससे बेहतर फिल्म का नाम मेरी समझ से तो दूसरा नहीं हो सकता था।
लेकिन फिल्म का नाम काफी विवादों में रहा है ?
नाम से लोगों को ऐसा लग रहा है कि फिल्म इस्लाम पर आधारित है लेकिन ऐसा है नहीं। फिल्म का आधार इंसानियत है। प्रोमोज में भी एक सीन है जिसमें मेरी पत्नी मंदिरा हिंदू है और मैं मुसलमान। मुझे यह समझ नहीं आता कि जिस धर्म के बारे में हम जानते ही नहीं हैं, हम उसे सही या गलत कैसे कह सकते हैं। अपने धर्म का सम्मान करने के लिए दूसरे धर्म को भला-बुरा कहना या उसका मजाक उड़ाना गलत है ।
फिल्मों को लेकर आजकल विवाद हो रहे हैं। आपको क्या लगता है?
फिल्म कला की अभिव्यक्ति का साधन है और कला की अभिव्यक्ति पर पाबंदी नहीं लगाई जा सकती है। मुझे बुरा लगता है जब थोड़े से प्रचार के लिए लोग फिल्मों पर विवाद खड़ा करने लगते हैं जो कि गलत है। जब सेंसर बोर्ड फिल्म को पास कर देती है तो फिर उस पर सवाल उठाने का कोई कारण ही नहीं बनता है ।
करण जौहर के बारे में आपकी क्या राय है?
करण ने जब से अपने करियर की शुरुआत की है मैं तब से उनके साथ काम कर रहा हूँ और वक्त के साथ उनके अंदर के बदलावों को भी करीब से देखा है। जब कॉलेज से निकला था तो उसने "कुछ-कुछ होता है" बनाई थी। तब से लेकर आज तक उसकी सोच में आए बदलावों को उसकी फिल्मों में देखा जा सकता है।
लंबे समय के बाद और आप साथ में काम कर रहे हैं। काजोल के बारे में आपका क्या कहना है?
काजोल एक बहुत ही बेहतरीन अभिनेत्री हैं। वह सह कलाकार होने के साथ ही मेरी बहुत अच्छी दोस्त हैं। असल जिंदगी में भले वह चाहे जैसी हों लेकिन कैमरा ऑन होते ही वह पूरी तरह से बदल जाती है। ऐसा लगता है कि जैसे किसी ने उस पर जादू कर दिया हो। काजोल इस समय बॉलीवुड की सबसे बेहतरीन अदाकारा हैं।
सुना है कि आप अपने बच्चों से हिंदी में ही बात करना पसंद करते हैं?
मैं हमेशा कोशिश करता हूं कि मेरे बच्चे हिंदी जरूर बोलें। मैं उन्हें हिंदी में कहानियाँ सुनाता हूँ। मेरी कोशिश होती है कि मैं उनसे ज्यादा से ज्यादा हिंदी में बात करूँ।
अपनी सफलता का श्रेय आप किसे देते हैं?
मेरी ही नहीं, इस इंडस्ट्री में जो भी सफल हैं सभी का कारण उनकी हिंदी का अच्छा होना है। अमिताभ बच्चन, आमिर खानWatch the New Look of Aamir !! या मेरी सफलता की मुख्य वजह हमारी हिंदी का ज्ञान है। मैं समझता हूँ कि इस इंडस्ट्री में वही सफल होता है जिसकी हिंदी पर अच्छी पकड़ है।
अपने भाषा ज्ञान को बनाए रखने के लिए क्या करते हैं?
मैं किताबें बहुत पढ़ता हूँ और बच्चों को थोड़ा-बहुत बदलकर कहानियाँ सुनाता हूँ। कई बार कुछ किताबें अच्छी लगती हैं तो कुछ निर्देशकों या फिल्म निर्माताओं को मैं उस किताब पर फिल्म बनाने के लिए भी कहता हूँ पर अभी तक किसी ने मुझे हाँ नहीं कहा है। "स्लमडॉग मिलियनेयर" भी जब मैंने पढ़ी थी तब उस पर फिल्म बनाने के लिए वो किताब मैंने एक निर्देशक को दी थी लेकिन कुछ समय बाद पता चला कि डैनी बोयल इस पर फिल्म बना रहे हैं।
क्या कारण है कि इतनी सफलता हासिल करने के बाद भी आप हॉलीवुड की फिल्मों में नहीं दिखते हैं?
मेरी हिंदी अच्छी है। मेरा मानना है कि काम हमेशा उसी भाषा में करना चाहिए जो आपको आती हो, क्योंकि उसी भाषा में आप अपनी भावनाओं को सही ढंग से व्यक्त कर सकते हैं। हाल ही में मैंने कमल हासन के लिए दक्षिण की एक फिल्म की थी। उन्होंने मुझे हिंदी में उसका अनुवाद भी दिया था। बड़ी समस्या होती थी। पहले वहाँ की भाषा में पढ़ो, फिर हिंदी में उसका मतलब समझो और उसके बाद एक्टिंग के लिए उनकी भाषा में प्रेक्टिस करो। उसके बाद भी सही एक्सप्रेशन नहीं आ रहे थे। जहाँ तक हॉलीवुड की बात है तो मेरी अँग्रेजी अच्छी है लेकिन उच्चारण भारतीय है। मैं उनकी तरह नहीं बोल सकता हूँ इसलिए मैं वहाँ पर काम नहीं कर सकता।
strong>फिल्म में मैं रिजवान खान का किरदार निभा रहा हूँ जिसे एस्पर्जर नाम की बीमारी है। कांदिवली से लेकर अमेरिका तक के उसके सफर की कहानी इस फिल्म में दिखाई गई है। उसे सीधी बात ही समझ में आती है। एक अलग तरह के रूप में दर्शक इस बार मुझे देखेंगे और उम्मीद करता हूँ कि उसे पसंद करेंगे।
फिल्म का नाम आपको कितना सार्थक लगता है ?
फिल्म की कहानी रिजवान खान के इर्द-गिर्द घूमती है। वह पूरी फिल्म का आधार है और खान उसका सरनेम है। फिल्म में बातचीत के दौरान इस वाक्य का प्रयोग किया गया है। यह एक साधारण-सा वाक्य है जो कहानी को जोड़ता है इसलिए इससे बेहतर फिल्म का नाम मेरी समझ से तो दूसरा नहीं हो सकता था।
लेकिन फिल्म का नाम काफी विवादों में रहा है ?
नाम से लोगों को ऐसा लग रहा है कि फिल्म इस्लाम पर आधारित है लेकिन ऐसा है नहीं। फिल्म का आधार इंसानियत है। प्रोमोज में भी एक सीन है जिसमें मेरी पत्नी मंदिरा हिंदू है और मैं मुसलमान। मुझे यह समझ नहीं आता कि जिस धर्म के बारे में हम जानते ही नहीं हैं, हम उसे सही या गलत कैसे कह सकते हैं। अपने धर्म का सम्मान करने के लिए दूसरे धर्म को भला-बुरा कहना या उसका मजाक उड़ाना गलत है ।
फिल्मों को लेकर आजकल विवाद हो रहे हैं। आपको क्या लगता है?
फिल्म कला की अभिव्यक्ति का साधन है और कला की अभिव्यक्ति पर पाबंदी नहीं लगाई जा सकती है। मुझे बुरा लगता है जब थोड़े से प्रचार के लिए लोग फिल्मों पर विवाद खड़ा करने लगते हैं जो कि गलत है। जब सेंसर बोर्ड फिल्म को पास कर देती है तो फिर उस पर सवाल उठाने का कोई कारण ही नहीं बनता है ।
करण जौहर के बारे में आपकी क्या राय है?
करण ने जब से अपने करियर की शुरुआत की है मैं तब से उनके साथ काम कर रहा हूँ और वक्त के साथ उनके अंदर के बदलावों को भी करीब से देखा है। जब कॉलेज से निकला था तो उसने "कुछ-कुछ होता है" बनाई थी। तब से लेकर आज तक उसकी सोच में आए बदलावों को उसकी फिल्मों में देखा जा सकता है।
लंबे समय के बाद और आप साथ में काम कर रहे हैं। काजोल के बारे में आपका क्या कहना है?
काजोल एक बहुत ही बेहतरीन अभिनेत्री हैं। वह सह कलाकार होने के साथ ही मेरी बहुत अच्छी दोस्त हैं। असल जिंदगी में भले वह चाहे जैसी हों लेकिन कैमरा ऑन होते ही वह पूरी तरह से बदल जाती है। ऐसा लगता है कि जैसे किसी ने उस पर जादू कर दिया हो। काजोल इस समय बॉलीवुड की सबसे बेहतरीन अदाकारा हैं।
सुना है कि आप अपने बच्चों से हिंदी में ही बात करना पसंद करते हैं?
मैं हमेशा कोशिश करता हूं कि मेरे बच्चे हिंदी जरूर बोलें। मैं उन्हें हिंदी में कहानियाँ सुनाता हूँ। मेरी कोशिश होती है कि मैं उनसे ज्यादा से ज्यादा हिंदी में बात करूँ।
अपनी सफलता का श्रेय आप किसे देते हैं?
मेरी ही नहीं, इस इंडस्ट्री में जो भी सफल हैं सभी का कारण उनकी हिंदी का अच्छा होना है। अमिताभ बच्चन, आमिर खानWatch the New Look of Aamir !! या मेरी सफलता की मुख्य वजह हमारी हिंदी का ज्ञान है। मैं समझता हूँ कि इस इंडस्ट्री में वही सफल होता है जिसकी हिंदी पर अच्छी पकड़ है।
अपने भाषा ज्ञान को बनाए रखने के लिए क्या करते हैं?
मैं किताबें बहुत पढ़ता हूँ और बच्चों को थोड़ा-बहुत बदलकर कहानियाँ सुनाता हूँ। कई बार कुछ किताबें अच्छी लगती हैं तो कुछ निर्देशकों या फिल्म निर्माताओं को मैं उस किताब पर फिल्म बनाने के लिए भी कहता हूँ पर अभी तक किसी ने मुझे हाँ नहीं कहा है। "स्लमडॉग मिलियनेयर" भी जब मैंने पढ़ी थी तब उस पर फिल्म बनाने के लिए वो किताब मैंने एक निर्देशक को दी थी लेकिन कुछ समय बाद पता चला कि डैनी बोयल इस पर फिल्म बना रहे हैं।
क्या कारण है कि इतनी सफलता हासिल करने के बाद भी आप हॉलीवुड की फिल्मों में नहीं दिखते हैं?
मेरी हिंदी अच्छी है। मेरा मानना है कि काम हमेशा उसी भाषा में करना चाहिए जो आपको आती हो, क्योंकि उसी भाषा में आप अपनी भावनाओं को सही ढंग से व्यक्त कर सकते हैं। हाल ही में मैंने कमल हासन के लिए दक्षिण की एक फिल्म की थी। उन्होंने मुझे हिंदी में उसका अनुवाद भी दिया था। बड़ी समस्या होती थी। पहले वहाँ की भाषा में पढ़ो, फिर हिंदी में उसका मतलब समझो और उसके बाद एक्टिंग के लिए उनकी भाषा में प्रेक्टिस करो। उसके बाद भी सही एक्सप्रेशन नहीं आ रहे थे। जहाँ तक हॉलीवुड की बात है तो मेरी अँग्रेजी अच्छी है लेकिन उच्चारण भारतीय है। मैं उनकी तरह नहीं बोल सकता हूँ इसलिए मैं वहाँ पर काम नहीं कर सकता।
रविवार, 7 फ़रवरी 2010
पर्यटन
बदल रही है तस्वीर कश्मीर की
कोई छः बरस पहले कश्मीर गया था, तो मकसद था कश्मीर के असंतोष और उसकी वजहों को जानना-समझना। इस बार विशुद्ध पर्यटक की हैसियत से गया। पिछली बार और इस बार में जो फर्क साफ नजर आया, वह यह कि अब आतंक घट चुका है और तनाव भी। अब बाल-बच्चों को लेकर आराम से कश्मीर की सैर की जा सकती है।
पहले सड़कों पर चलते हुए डर लगता था। फौजी भी बेगानी नजरों से देखते थे और कश्मीरी अवाम भी। दोनों की नजरों में मश्कूक रहते हुए इधर-उधर विचरना, खासकर गाँवों में जाना तकलीफदेह था। इस बार ऐसा कुछ नहीं था। पिछली बार खून और गोलियों की इतनी दास्तानें रकम की थीं कि बर्फ में जाने का मन नहीं हुआ था।
स्थानीय पत्रकारों ने कहा भी कि चलिए, हम आपको गुलमर्ग घुमा लाते हैं, पर तब पर्यटन करने में शर्म महसूस हुई थी। उस वक्त पर्यटन करना ऐसा था, जैसे किसी के घर गमी में बैठने गए हों और उसी का टीवी चालू कर के कॉमेडी शो देखने लगें। डल झील तक भी एक साथी खींचकर ले गया था। इस बार मामला एकदम अलग था। परिवार के साथ बिना डर, बिना झिझक गुलमर्ग भी घूमा और डल झील की सैर भी की। और यह सब बेहद सस्ते में।
ND ND
लाल चौक :
पिछली बार जब गया था तो लोगों ने कहा कि सबसे ज्यादा वायब्रेंट इलाका लाल चौक है। सो, जिद के तहत लाल चौक के ही एक होटल में ठहरा था। यह सच है कि लाल चौक का अगला हिस्सा इंदौरClick here to see more news from this city के राजबाड़े की तरह बाजार और भीड़-भाड़ वाला है। मगर पिछले हिस्से में झेलम बहती है और झेलम के पानी में खड़े रहते हैं बहुत-से शिकारे।
पिछली बार एक शिकारे वाले ने मात्र 200 रुपए रोज में शिकारे में कमरा देने की पेशकश की थी। मगर शिकारे में लिखना मुश्किल होता, इसलिए उसमें ठहरना टाल दिया था। इस बार 400 रुपए में शिकारे वाले ने शिकारे में कमरा देने को कहा तो टालना मुश्किल हो गया। लाल चौक में होटल वाकई बहुत सस्ते हैं। कोई भी ठीक-ठाक-सा होटल मात्र 500 रुपए रोज में डबलबेड रूम किराए पर दे देता है।
इसमें रूम हीटर भी मिलता है और अटैच्ड लेट-बाथ में चौबीसों घंटे गर्म पानी भी। एक जमाने में लाल चौक से ही सारी सियासी हरकतें शुरू होती थीं। अलगाववादियों की तमाम सभाएँ, तमाम विरोध प्रदर्शन, तमाम पथराव और लाठीचार्ज, फायरिंग, गोलियाँ...। मगर इसके साथ ही लाल चौक में आस-पास से आए व्यापारी भी ठहरते थे और ठहरते हैं। बड़ा बाजार भी यही है। पूरे श्रीनगरClick here to see more news from this city की महिलाएँ दोपहर में अपनी जरूरत की सारी चीजें यही से खरीदती हैं।
लाल चौक शहर का वह हिस्सा है, जहाँ शहर के दोनों हिस्सों का मिलन होता है। एक श्रीनगर पर्यटकों का है और दूसरा गरीब नागरिकों का जिसे स्थानीय बोलचाल में "डाउन टाउन" कहा जाता है। लाल चौक पर दोनों हिस्सों का मानसिक मिलन होता है। खाने-पीने के किफायती और प्रामाणिक कश्मीरी रेस्तराँ यहीं पर हैं। यहीं से 2 रुपए में बस स्टैंड बटमालू के लिए वाहन मिलता है।
बटमालू से आपको बस मिल सकती है लद्दाख की, कारगिल की, गुलमर्ग की, सोनमर्ग की, पहलगाम की, बालटाल की, बारामूला की और उड़ी सेक्टर की, जहाँ के बाद से पाकिस्तान की सरहद शुरू होती है। मुजफ्फराबाद का रास्ता इसी बस स्टैंड के जरिए देखा जा सकता है। हाँ, इन सब जगहों पर जाने के लिए अन्य वाहन भी मिलते हैं, जो लाल चौक के स्टैंड पर मुहैया हैं। जम्मूClick here to see more news from this city से जो लोग बस या अन्य वाहनों में किराया देकर आते हैं, उन्हें भी लाल चौक में ही उतारा जाता है।
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सो, अगर आप पर्यटक बनकर जा रहे हों तो घुमाने वालों के बहकावे में न आएँ। बिंदास लाल चौक जाएँ और किसी भी होटल या शिकारे में डेरा डाल दें। डल झील यहाँ से 2 किलोमीटर दूर है, बस। वैसे तो कश्मीर नॉनवेज खाने वालों के लिए जन्नात है, मगर यदि आप शाकाहारी हैं तो लाल चौक की गलियों में आपको नाश्ते के लिए हलवा-पूरी, छोले-पूरी, कुलचे-भटूरे मिल जाएँगे।
खाने में तुवर की दाल तो नहीं मिलेगी, पर दाल मखानी मिल जाएगी। उड़द की काली साबुत दाल, राजमा, आलू-गोभी, पालक-पनीर, तंदूरी और तवा रोटियाँ...। यहाँ की गलियों में कुछ पंजाबी शाकाहारी ढाबे भी हैं, जहाँ खाना बहुत ही सस्ता है।
हाँ, बर्फ देखना हो तो सबसे नजदीक गुलमर्ग है। केवल 64 किलोमीटर दूर। निजी वाहन भी कर सकते हैं और बटमालू बस स्टैंड से बस में भी बैठ सकते हैं। 17 रुपए सवारी में बस टंगमर्ग तक ले जाती है और उसके बाद 20 रुपए में टाटा सूमो गुलमर्ग तक। अगर कश्मीर के जनजीवन को नजदीक से देखना हो तो बस ठीक है। ऊबा देने की हद तक धीमी जरूर चलती है, पर आप देखते बहुत कुछ हैं।
बर्फ के मच्छर :
गुलमर्ग जाइए, पहलगाम जाइए या सोनमर्ग, जिस तरह काशी में पंडे पीछे पड़ते हैं उसी तरह यहाँ गाइड, स्लेज वाले, किराए में गमबूट और कपड़े देने वाले पीछे पड़ते हैं। इन्हें पैसे दिए बगैर आप बर्फ का मजा नहीं ले सकते। ये आपको घेर लेते हैं फिर चाहे आप गालियाँ दें, चाहे झिड़कें, चाहें चीखें, ये आपका पीछा नहीं छोड़ते। इनसे सौदा करने का तरीका यह है कि ये जो भी माँगें आप उसके 20 फीसद से बात शुरू कीजिए। 35-40 फीसद पर सौदा पट जाता है।
इन्हें पैसे दिए बगैर आप बर्फ का मजा इसलिए नहीं ले सकते कि ये घेरे रहते हैं और लगातार आप पर दबाव बनाते हैं। बहुत चिढ़ जाओ तो बताते हैं कि हमारा गुजारा पर्यटकों से ही चलता है और हर पर्यटक पर नंबर बाय नंबर ही स्थानीय लोग झूमते हैं। आप पर हमारा नंबर आया है।
गुलमर्ग हो, पहलगाम या फिर सोनमर्ग, यहाँ से एक दिन में लौटने की इच्छा नहीं होती। यहाँ होटल थोड़े महँगे हैं, पर हैं बहुत सुविधा वाले। यहाँ के होटलों में कंबल भी बिजली के हैं, जो अपनी तरफ से गर्मी देते हैं। अगर इस तरह के कंबल न हो तो हम गर्म इलाकों के रहने वाले रात न काट पाएँ। इन दिनों में भी गुलमर्ग का न्यूनतम तापमान 2, 3, 4 डिग्री पर रहता है। अगर आपकी किस्मत अच्छी हो तो आप बर्फ गिरती भी देख सकते हैं, मगर तब ठंड और बढ़ जाती है।
एक जमाने में कश्मीर फिल्म वालों के लिए स्विट्जरलैंड था। बहुत फिल्मों की शूटिंग कश्मीर में होती थी। आतंकवाद के चलते यह सिलसिला टूट गया था, पर अब वापस कुछ फिल्म वाले हिम्मत कर रहे हैं। अलबत्ता पूरे कश्मीर में एक भी सिनेमाघर नहीं बचा है, जहाँ फिल्में दिखाए हों। सारे के सारे सिनेमाघरों को आतंकवादियों ने इस्लाम-विरोधी कहकर बंद करा दिया।
स्थानीय केबल पर समाचारों के अलावा फिल्में ही दिखाई जाती है। यह इस बात का संकेत है कि स्थानीय निवासी इस्लाम को लेकर आतंकवादियों की व्याख्या से सहमत नहीं है। आतंकवाद अब धीरे-धीरे किनारे लग रहा है। इन दिनों छुट-पुट घटनाएँ हो भी रही हैं, तो सीमावर्ती इलाके में। शहरी कश्मीर अब धीरे-धीरे आतंकवाद से उबर रहा है।
कोई छः बरस पहले कश्मीर गया था, तो मकसद था कश्मीर के असंतोष और उसकी वजहों को जानना-समझना। इस बार विशुद्ध पर्यटक की हैसियत से गया। पिछली बार और इस बार में जो फर्क साफ नजर आया, वह यह कि अब आतंक घट चुका है और तनाव भी। अब बाल-बच्चों को लेकर आराम से कश्मीर की सैर की जा सकती है।
पहले सड़कों पर चलते हुए डर लगता था। फौजी भी बेगानी नजरों से देखते थे और कश्मीरी अवाम भी। दोनों की नजरों में मश्कूक रहते हुए इधर-उधर विचरना, खासकर गाँवों में जाना तकलीफदेह था। इस बार ऐसा कुछ नहीं था। पिछली बार खून और गोलियों की इतनी दास्तानें रकम की थीं कि बर्फ में जाने का मन नहीं हुआ था।
स्थानीय पत्रकारों ने कहा भी कि चलिए, हम आपको गुलमर्ग घुमा लाते हैं, पर तब पर्यटन करने में शर्म महसूस हुई थी। उस वक्त पर्यटन करना ऐसा था, जैसे किसी के घर गमी में बैठने गए हों और उसी का टीवी चालू कर के कॉमेडी शो देखने लगें। डल झील तक भी एक साथी खींचकर ले गया था। इस बार मामला एकदम अलग था। परिवार के साथ बिना डर, बिना झिझक गुलमर्ग भी घूमा और डल झील की सैर भी की। और यह सब बेहद सस्ते में।
ND ND
लाल चौक :
पिछली बार जब गया था तो लोगों ने कहा कि सबसे ज्यादा वायब्रेंट इलाका लाल चौक है। सो, जिद के तहत लाल चौक के ही एक होटल में ठहरा था। यह सच है कि लाल चौक का अगला हिस्सा इंदौरClick here to see more news from this city के राजबाड़े की तरह बाजार और भीड़-भाड़ वाला है। मगर पिछले हिस्से में झेलम बहती है और झेलम के पानी में खड़े रहते हैं बहुत-से शिकारे।
पिछली बार एक शिकारे वाले ने मात्र 200 रुपए रोज में शिकारे में कमरा देने की पेशकश की थी। मगर शिकारे में लिखना मुश्किल होता, इसलिए उसमें ठहरना टाल दिया था। इस बार 400 रुपए में शिकारे वाले ने शिकारे में कमरा देने को कहा तो टालना मुश्किल हो गया। लाल चौक में होटल वाकई बहुत सस्ते हैं। कोई भी ठीक-ठाक-सा होटल मात्र 500 रुपए रोज में डबलबेड रूम किराए पर दे देता है।
इसमें रूम हीटर भी मिलता है और अटैच्ड लेट-बाथ में चौबीसों घंटे गर्म पानी भी। एक जमाने में लाल चौक से ही सारी सियासी हरकतें शुरू होती थीं। अलगाववादियों की तमाम सभाएँ, तमाम विरोध प्रदर्शन, तमाम पथराव और लाठीचार्ज, फायरिंग, गोलियाँ...। मगर इसके साथ ही लाल चौक में आस-पास से आए व्यापारी भी ठहरते थे और ठहरते हैं। बड़ा बाजार भी यही है। पूरे श्रीनगरClick here to see more news from this city की महिलाएँ दोपहर में अपनी जरूरत की सारी चीजें यही से खरीदती हैं।
लाल चौक शहर का वह हिस्सा है, जहाँ शहर के दोनों हिस्सों का मिलन होता है। एक श्रीनगर पर्यटकों का है और दूसरा गरीब नागरिकों का जिसे स्थानीय बोलचाल में "डाउन टाउन" कहा जाता है। लाल चौक पर दोनों हिस्सों का मानसिक मिलन होता है। खाने-पीने के किफायती और प्रामाणिक कश्मीरी रेस्तराँ यहीं पर हैं। यहीं से 2 रुपए में बस स्टैंड बटमालू के लिए वाहन मिलता है।
बटमालू से आपको बस मिल सकती है लद्दाख की, कारगिल की, गुलमर्ग की, सोनमर्ग की, पहलगाम की, बालटाल की, बारामूला की और उड़ी सेक्टर की, जहाँ के बाद से पाकिस्तान की सरहद शुरू होती है। मुजफ्फराबाद का रास्ता इसी बस स्टैंड के जरिए देखा जा सकता है। हाँ, इन सब जगहों पर जाने के लिए अन्य वाहन भी मिलते हैं, जो लाल चौक के स्टैंड पर मुहैया हैं। जम्मूClick here to see more news from this city से जो लोग बस या अन्य वाहनों में किराया देकर आते हैं, उन्हें भी लाल चौक में ही उतारा जाता है।
ND ND
सो, अगर आप पर्यटक बनकर जा रहे हों तो घुमाने वालों के बहकावे में न आएँ। बिंदास लाल चौक जाएँ और किसी भी होटल या शिकारे में डेरा डाल दें। डल झील यहाँ से 2 किलोमीटर दूर है, बस। वैसे तो कश्मीर नॉनवेज खाने वालों के लिए जन्नात है, मगर यदि आप शाकाहारी हैं तो लाल चौक की गलियों में आपको नाश्ते के लिए हलवा-पूरी, छोले-पूरी, कुलचे-भटूरे मिल जाएँगे।
खाने में तुवर की दाल तो नहीं मिलेगी, पर दाल मखानी मिल जाएगी। उड़द की काली साबुत दाल, राजमा, आलू-गोभी, पालक-पनीर, तंदूरी और तवा रोटियाँ...। यहाँ की गलियों में कुछ पंजाबी शाकाहारी ढाबे भी हैं, जहाँ खाना बहुत ही सस्ता है।
हाँ, बर्फ देखना हो तो सबसे नजदीक गुलमर्ग है। केवल 64 किलोमीटर दूर। निजी वाहन भी कर सकते हैं और बटमालू बस स्टैंड से बस में भी बैठ सकते हैं। 17 रुपए सवारी में बस टंगमर्ग तक ले जाती है और उसके बाद 20 रुपए में टाटा सूमो गुलमर्ग तक। अगर कश्मीर के जनजीवन को नजदीक से देखना हो तो बस ठीक है। ऊबा देने की हद तक धीमी जरूर चलती है, पर आप देखते बहुत कुछ हैं।
बर्फ के मच्छर :
गुलमर्ग जाइए, पहलगाम जाइए या सोनमर्ग, जिस तरह काशी में पंडे पीछे पड़ते हैं उसी तरह यहाँ गाइड, स्लेज वाले, किराए में गमबूट और कपड़े देने वाले पीछे पड़ते हैं। इन्हें पैसे दिए बगैर आप बर्फ का मजा नहीं ले सकते। ये आपको घेर लेते हैं फिर चाहे आप गालियाँ दें, चाहे झिड़कें, चाहें चीखें, ये आपका पीछा नहीं छोड़ते। इनसे सौदा करने का तरीका यह है कि ये जो भी माँगें आप उसके 20 फीसद से बात शुरू कीजिए। 35-40 फीसद पर सौदा पट जाता है।
इन्हें पैसे दिए बगैर आप बर्फ का मजा इसलिए नहीं ले सकते कि ये घेरे रहते हैं और लगातार आप पर दबाव बनाते हैं। बहुत चिढ़ जाओ तो बताते हैं कि हमारा गुजारा पर्यटकों से ही चलता है और हर पर्यटक पर नंबर बाय नंबर ही स्थानीय लोग झूमते हैं। आप पर हमारा नंबर आया है।
गुलमर्ग हो, पहलगाम या फिर सोनमर्ग, यहाँ से एक दिन में लौटने की इच्छा नहीं होती। यहाँ होटल थोड़े महँगे हैं, पर हैं बहुत सुविधा वाले। यहाँ के होटलों में कंबल भी बिजली के हैं, जो अपनी तरफ से गर्मी देते हैं। अगर इस तरह के कंबल न हो तो हम गर्म इलाकों के रहने वाले रात न काट पाएँ। इन दिनों में भी गुलमर्ग का न्यूनतम तापमान 2, 3, 4 डिग्री पर रहता है। अगर आपकी किस्मत अच्छी हो तो आप बर्फ गिरती भी देख सकते हैं, मगर तब ठंड और बढ़ जाती है।
एक जमाने में कश्मीर फिल्म वालों के लिए स्विट्जरलैंड था। बहुत फिल्मों की शूटिंग कश्मीर में होती थी। आतंकवाद के चलते यह सिलसिला टूट गया था, पर अब वापस कुछ फिल्म वाले हिम्मत कर रहे हैं। अलबत्ता पूरे कश्मीर में एक भी सिनेमाघर नहीं बचा है, जहाँ फिल्में दिखाए हों। सारे के सारे सिनेमाघरों को आतंकवादियों ने इस्लाम-विरोधी कहकर बंद करा दिया।
स्थानीय केबल पर समाचारों के अलावा फिल्में ही दिखाई जाती है। यह इस बात का संकेत है कि स्थानीय निवासी इस्लाम को लेकर आतंकवादियों की व्याख्या से सहमत नहीं है। आतंकवाद अब धीरे-धीरे किनारे लग रहा है। इन दिनों छुट-पुट घटनाएँ हो भी रही हैं, तो सीमावर्ती इलाके में। शहरी कश्मीर अब धीरे-धीरे आतंकवाद से उबर रहा है।
शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2010
विचार-मंथन
अवसरवाद के दलदल में फँसा नेतृत्व
विनोद अग्निहोत्री
राजनीति कितनी बेशर्म और मूल्यहीन हो सकती है, इसका उदाहरण इन दिनों में जो हो रहा है, उससे समझा जा सकता है। शिवसेना की धमकी के डर से पहले आईपीएल में पाकिस्तानी क्रिकेट खिलाड़ियों की बोली नहीं लगाई गई और जब बाद में शाहरुख ने एक सामान्य-सा बयान क्या दे दिया, शिवसेना ने आसमान सिर पर उठा लिया।
उधर, मुंबई में उत्तर भारतीयों की सुरक्षा को लेकर आरएसएस के बयान से माहौल पहले ही गर्म था, शाहरुख के बयान से आग में घी पड़ गया। एक तरफ शाहरुख की आड़ लेकर शिवसेना फिर अपनी मुस्लिम विरोधी ग्रंथि को हिन्दुत्व के ध्रुवीकरण में बदलना चाहती है, जो संघ परिवार को भी मुफीद लगता है तो दूसरी तरफ शिवसेना का उत्तर भारतीय विरोध संघ के हिन्दुत्व के ध्रुवीकरण की योजना में पलीता लगा रहा है।
इसलिए चितपावन महाराष्ट्रीय ब्राह्मणों के नेतृत्व वाले संघ को उत्तर भारतीयों की सुरक्षा में लाठी लेकर उतरने का ऐलान करना पड़ रहा है, वहीं भाजपा के महाराष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी गोलमोल भाषा बोलकर संघ और शिवसेना दोनों को साधने में जुटे हैं। क्या संघ अपने अखंड भारत की परिकल्पना में बाधक शिवसेना से संबंध विच्छेद करने का निर्देश अपने आनुषंगिक संगठन भाजपा को देने का साहस कर सकता है?
NDबिहार में राहुल गाँधी ने मुंबई हमलों के दौरान उत्तर भारतीय कमांडो की भूमिका की तारीफ करके संघ से मुद्दा छीन लिया। अब शिवसेना के निशाने पर राहुल आ गए और अपनी सड़कछाप भाषा में शिवसेना राहुल पर हमलावर है।
इसे शिवसेना और मनसे जैसे दलों का वैचारिक दीवालियापन ही माना जाएगा कि उन्हें जिस ताकत और ऊर्जा से केंद्र सरकार की महँगाईपरस्त नीतियों और राज्य सरकार के कामकाज के ढीलेपन के खिलाफ संघर्ष में लगाना चाहिए थी, वह ऊर्जा मुंबई में शाहरुख के पोस्टर फाड़ने पर खर्च हो रही है और कांग्रेस की केंद्र व राज्य सरकारों को शिवसेना का यह हुड़दंग इसलिए भा रहा है कि जितना शिवसेना राहुल पर हमला करेगी, बिहार में कांग्रेस को उतना ही फायदा होगा।
भाजपा भी राजनीतिक अवसरवाद की शिकार है। उसे महाराष्ट्र में शिवसेना का सहारा और ताकत भी चाहिए, क्योंकि उसकी मुस्लिम विरोधी राजनीति भाजपा के हिन्दुत्ववादी एजेंडे को आगे बढ़ाती है, लेकिन शिवसेना का उत्तर भारतीय विरोधी रुख शेष भारत में भाजपा को भारी पड़ रहा है, इसलिए उसके विनय कटियार जैसे नेता तो शिवसेना से गठबंधन तक तोड़ने की बात कर रहे हैं, लेकिन नेतृत्व शिवसेना को नाराज करने का जोखिम उठाने को तैयार नहीं है।
जो संघ उत्तर भारतीयों की सुरक्षा के लिए लाठी लेकर उतरने की बात कर रहा है, वह शाहरुख के खिलाफ शिवसेना के हुड़दंग पर खामोश है जबकि शाहरुख भी उत्तर भारतीय ही हैं।
यह अलग बात है कि आज शाहरुख के बयान पर सड़कों पर उपद्रव कर रही शिवसेना ने भाजपा नेतृत्व वाली उस वाजपेयी सरकार के साथ सत्ता की मलाई चाटी थी, जिसने कारगिल और संसद पर हमले के बाद भी पाकिस्तान के साथ बंद पड़ी क्रिकेट श्रृंखला शुरू की और कारगिल के सूत्रधार जनरल परवेज मुशर्रफ के लिए आगराClick here to see more news from this city में लाल कालीन बिछाई थी।
तब न ठाकरे का राष्ट्रप्रेम जागा और न ही उन्हें सरकार से अलग होने की जरूरत महसूस हुई। यही नहीं, अब जब दाऊद के समधी और पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर जावेद मियाँदाद के साथ ठाकरे परिवार के हँसते-खिलखिलाते फोटो और वीडियो फुटेज सामने आ गए हैं तब शिवसेना नेता सफाई दे रहे हैं।
थोड़ी बात बॉलीवुड के अवसरवाद की। बाजारवाद के दौर में फिल्मी सितारे और क्रिकेट खिलाड़ी ही अब नायक और महानायक बना दिए गए हैं। गाँधी, सुभाष, नेहरू, जयप्रकाश, भगतसिंह, विवेकानंद जैसे महापुरुष अब सदी के नायक नहीं रह गए, बल्कि अमिताभ बच्चनBig B !! The Super Stars Photogallery को सदी का महानायक लिखने या कहने में मीडिया को संकोच नहीं होता है।वही महानायक अमिताभ बच्चन ऐसे वक्त में जब शिवसेना के हुड़दंग से देश शर्मसार है तब अपने ब्लॉग में बाल ठाकरे के भीतर वह आग देख रहे हैं, जिसके वे कायल हैं। बच्चन को पता नहीं ठाकरे के भीतर कौन-सी आग दिखाई दे रही है? क्या बच्चन भूल गए कि इसी आग के एक गोले राज ठाकरे ने पिछले दिनों उनके और उनकी पत्नी जया बच्चन के लिए कितनी मुसीबत पैदा की थी।
अमिताभ बॉलीवुड के शिखर पुरुष हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है। लेकिन शाहरुख, आमिर, सलमान या करण जौहर की फिल्मों पर मुंबई से लेकर गुजरात तक किए जाने वाले उपद्रवों से तो वे आँखें मूँद लेते हैं, लेकिन अपनी फिल्म 'रण' के लिए वे मातोश्री में विशेष शो करने को आतुर हैं।
पहले नेहरू-गाँधी परिवार, फिर मुलायमसिंह यादव की छत्रछाया में फलफूल चुका बच्चन परिवार अब नरेंद्र मोदी और बाल ठाकरे की सरपरस्ती का मौका खोज रहा है। खुद को शाहरुख की आवाज कहने वाले गायक अभिजीत शाहरुख के खिलाफ शिवसेना की हर हरकत को इस तरह जायज ठहरा रहे हैं जैसे देशभक्ति का मतलब सड़कों पर गुंडागर्दी ही है।
बात अब समाजवादी पार्टी में चल रहे घमासान की। समाजवादी पार्टी से अमरसिंह निकाले जा चुके हैं। कल तक अमरसिंह चुन-चुन कर पुराने समाजवादियों को निकलवा रहे थे तब उन्हें मुलायम का परिवारवाद और यादववाद नजर नहीं आ रहा था, लेकिन अब अमरसिंह को लोकतंत्र याद आ रहा है।
मायावती पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करते रहे अमर को अब मायावती का स्टेट गेस्ट हाउस कांड का दर्द समझ में आ रहा है। सोनिया गाँधी और उनके परिवार के खिलाफ किसी भी हद तक बयानबाजी करने वाले अमरसिंह को सोनिया गाँधी में त्याग और संघर्ष दिखाई पड़ रहा है।
जिन रघु ठाकुर का टिकट मुलायमसिंह के ऐलान के बाद अमरसिंह ने कटवाया, अब दिल्ली के माता सुंदरी रोड स्थित रघु ठाकुर के छोटे से घर में जाकर उनसे राजनीतिक मुद्दे समझने में भी अमरसिंह को संकोच नहीं है।
जयाप्रदा ने तो खैर संकट के वक्त अमरसिंह का अहसान चुकाया है, लेकिन अमर के भाई अमिताभ की पत्नी जया बच्चन अपने प्रिय देवर के समर्थन में अपनी सिर्फ पाँच महीने की राज्यसभा सीट भी कुर्बान करने को तैयार नहीं हैं। उधर, मुलायमसिंह यादव और दूसरे सपा नेता अब अमरसिंह में वे सारी बुराइयाँ देख रहे हैं, जो कभी रघु ठाकुर से लेकर मोहम्मद आजम खान तक ने गिनाई थीं।
कम्युनिस्टों का अवसरवाद कई बार सामने आ चुका है, लेकिन पिछली यूपीए सरकार के दौरान उन्होंने जिस तरह मनमोहन सरकार से समर्थन लेने के बाद उन मायावती को प्रधानमंत्री बनाने का बीड़ा उठाया, जिनके खिलाफ खुद वाम मोर्चे के दिग्गज नेता मंचों से भाषण कर चुके हैं, तब लगा कि मार्क्स और लेनिन की वैचारिक विरासत का दावा करने वाले भारतीय कम्युनिस्ट वैचारिक रूप से कितने खोखले हो चुके हैं।
ममता बनर्जी, करुणनिधि, जयललिता, चंद्रबाबू नायडू, देवेगौड़ा, ओमप्रकाश चौटाला, नवीन पटनायक जैसे छत्रपों ने मुद्दों से ज्यादा मौके के हिसाब से ही सियासी फैसले लिए हैं। धर्मनिरपेक्षता का दावा करने वाले इन छत्रपों ने भाजपा से हाथ मिलाने में भी कोई संकोच नहीं किया और गुजरात के दंगों के बाद भी इनका राजनीतिक जमीर नहीं जागा।
ममता, जयललिता, करुणानिधि और देवेगौड़ा तो मौके के मुताबिक कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस से हाथ मिलाते ही रहते आए हैं। गाँधी, लोहिया, जयप्रकाश की विरासत का दावा करने वाले शरद यादव, रामविलास पासवान, लालूप्रसाद यादव, नीतीश कुमार जैसे नेता भी इस सबसे अछूते हैं। कुल मिलाकर भारतीय राजनीति और सामाजिक नेतृत्व अवसरवाद के दलदल में बुरी तरह फँस गया है।
विनोद अग्निहोत्री
राजनीति कितनी बेशर्म और मूल्यहीन हो सकती है, इसका उदाहरण इन दिनों में जो हो रहा है, उससे समझा जा सकता है। शिवसेना की धमकी के डर से पहले आईपीएल में पाकिस्तानी क्रिकेट खिलाड़ियों की बोली नहीं लगाई गई और जब बाद में शाहरुख ने एक सामान्य-सा बयान क्या दे दिया, शिवसेना ने आसमान सिर पर उठा लिया।
उधर, मुंबई में उत्तर भारतीयों की सुरक्षा को लेकर आरएसएस के बयान से माहौल पहले ही गर्म था, शाहरुख के बयान से आग में घी पड़ गया। एक तरफ शाहरुख की आड़ लेकर शिवसेना फिर अपनी मुस्लिम विरोधी ग्रंथि को हिन्दुत्व के ध्रुवीकरण में बदलना चाहती है, जो संघ परिवार को भी मुफीद लगता है तो दूसरी तरफ शिवसेना का उत्तर भारतीय विरोध संघ के हिन्दुत्व के ध्रुवीकरण की योजना में पलीता लगा रहा है।
इसलिए चितपावन महाराष्ट्रीय ब्राह्मणों के नेतृत्व वाले संघ को उत्तर भारतीयों की सुरक्षा में लाठी लेकर उतरने का ऐलान करना पड़ रहा है, वहीं भाजपा के महाराष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी गोलमोल भाषा बोलकर संघ और शिवसेना दोनों को साधने में जुटे हैं। क्या संघ अपने अखंड भारत की परिकल्पना में बाधक शिवसेना से संबंध विच्छेद करने का निर्देश अपने आनुषंगिक संगठन भाजपा को देने का साहस कर सकता है?
NDबिहार में राहुल गाँधी ने मुंबई हमलों के दौरान उत्तर भारतीय कमांडो की भूमिका की तारीफ करके संघ से मुद्दा छीन लिया। अब शिवसेना के निशाने पर राहुल आ गए और अपनी सड़कछाप भाषा में शिवसेना राहुल पर हमलावर है।
इसे शिवसेना और मनसे जैसे दलों का वैचारिक दीवालियापन ही माना जाएगा कि उन्हें जिस ताकत और ऊर्जा से केंद्र सरकार की महँगाईपरस्त नीतियों और राज्य सरकार के कामकाज के ढीलेपन के खिलाफ संघर्ष में लगाना चाहिए थी, वह ऊर्जा मुंबई में शाहरुख के पोस्टर फाड़ने पर खर्च हो रही है और कांग्रेस की केंद्र व राज्य सरकारों को शिवसेना का यह हुड़दंग इसलिए भा रहा है कि जितना शिवसेना राहुल पर हमला करेगी, बिहार में कांग्रेस को उतना ही फायदा होगा।
भाजपा भी राजनीतिक अवसरवाद की शिकार है। उसे महाराष्ट्र में शिवसेना का सहारा और ताकत भी चाहिए, क्योंकि उसकी मुस्लिम विरोधी राजनीति भाजपा के हिन्दुत्ववादी एजेंडे को आगे बढ़ाती है, लेकिन शिवसेना का उत्तर भारतीय विरोधी रुख शेष भारत में भाजपा को भारी पड़ रहा है, इसलिए उसके विनय कटियार जैसे नेता तो शिवसेना से गठबंधन तक तोड़ने की बात कर रहे हैं, लेकिन नेतृत्व शिवसेना को नाराज करने का जोखिम उठाने को तैयार नहीं है।
जो संघ उत्तर भारतीयों की सुरक्षा के लिए लाठी लेकर उतरने की बात कर रहा है, वह शाहरुख के खिलाफ शिवसेना के हुड़दंग पर खामोश है जबकि शाहरुख भी उत्तर भारतीय ही हैं।
यह अलग बात है कि आज शाहरुख के बयान पर सड़कों पर उपद्रव कर रही शिवसेना ने भाजपा नेतृत्व वाली उस वाजपेयी सरकार के साथ सत्ता की मलाई चाटी थी, जिसने कारगिल और संसद पर हमले के बाद भी पाकिस्तान के साथ बंद पड़ी क्रिकेट श्रृंखला शुरू की और कारगिल के सूत्रधार जनरल परवेज मुशर्रफ के लिए आगराClick here to see more news from this city में लाल कालीन बिछाई थी।
तब न ठाकरे का राष्ट्रप्रेम जागा और न ही उन्हें सरकार से अलग होने की जरूरत महसूस हुई। यही नहीं, अब जब दाऊद के समधी और पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर जावेद मियाँदाद के साथ ठाकरे परिवार के हँसते-खिलखिलाते फोटो और वीडियो फुटेज सामने आ गए हैं तब शिवसेना नेता सफाई दे रहे हैं।
थोड़ी बात बॉलीवुड के अवसरवाद की। बाजारवाद के दौर में फिल्मी सितारे और क्रिकेट खिलाड़ी ही अब नायक और महानायक बना दिए गए हैं। गाँधी, सुभाष, नेहरू, जयप्रकाश, भगतसिंह, विवेकानंद जैसे महापुरुष अब सदी के नायक नहीं रह गए, बल्कि अमिताभ बच्चनBig B !! The Super Stars Photogallery को सदी का महानायक लिखने या कहने में मीडिया को संकोच नहीं होता है।वही महानायक अमिताभ बच्चन ऐसे वक्त में जब शिवसेना के हुड़दंग से देश शर्मसार है तब अपने ब्लॉग में बाल ठाकरे के भीतर वह आग देख रहे हैं, जिसके वे कायल हैं। बच्चन को पता नहीं ठाकरे के भीतर कौन-सी आग दिखाई दे रही है? क्या बच्चन भूल गए कि इसी आग के एक गोले राज ठाकरे ने पिछले दिनों उनके और उनकी पत्नी जया बच्चन के लिए कितनी मुसीबत पैदा की थी।
अमिताभ बॉलीवुड के शिखर पुरुष हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है। लेकिन शाहरुख, आमिर, सलमान या करण जौहर की फिल्मों पर मुंबई से लेकर गुजरात तक किए जाने वाले उपद्रवों से तो वे आँखें मूँद लेते हैं, लेकिन अपनी फिल्म 'रण' के लिए वे मातोश्री में विशेष शो करने को आतुर हैं।
पहले नेहरू-गाँधी परिवार, फिर मुलायमसिंह यादव की छत्रछाया में फलफूल चुका बच्चन परिवार अब नरेंद्र मोदी और बाल ठाकरे की सरपरस्ती का मौका खोज रहा है। खुद को शाहरुख की आवाज कहने वाले गायक अभिजीत शाहरुख के खिलाफ शिवसेना की हर हरकत को इस तरह जायज ठहरा रहे हैं जैसे देशभक्ति का मतलब सड़कों पर गुंडागर्दी ही है।
बात अब समाजवादी पार्टी में चल रहे घमासान की। समाजवादी पार्टी से अमरसिंह निकाले जा चुके हैं। कल तक अमरसिंह चुन-चुन कर पुराने समाजवादियों को निकलवा रहे थे तब उन्हें मुलायम का परिवारवाद और यादववाद नजर नहीं आ रहा था, लेकिन अब अमरसिंह को लोकतंत्र याद आ रहा है।
मायावती पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करते रहे अमर को अब मायावती का स्टेट गेस्ट हाउस कांड का दर्द समझ में आ रहा है। सोनिया गाँधी और उनके परिवार के खिलाफ किसी भी हद तक बयानबाजी करने वाले अमरसिंह को सोनिया गाँधी में त्याग और संघर्ष दिखाई पड़ रहा है।
जिन रघु ठाकुर का टिकट मुलायमसिंह के ऐलान के बाद अमरसिंह ने कटवाया, अब दिल्ली के माता सुंदरी रोड स्थित रघु ठाकुर के छोटे से घर में जाकर उनसे राजनीतिक मुद्दे समझने में भी अमरसिंह को संकोच नहीं है।
जयाप्रदा ने तो खैर संकट के वक्त अमरसिंह का अहसान चुकाया है, लेकिन अमर के भाई अमिताभ की पत्नी जया बच्चन अपने प्रिय देवर के समर्थन में अपनी सिर्फ पाँच महीने की राज्यसभा सीट भी कुर्बान करने को तैयार नहीं हैं। उधर, मुलायमसिंह यादव और दूसरे सपा नेता अब अमरसिंह में वे सारी बुराइयाँ देख रहे हैं, जो कभी रघु ठाकुर से लेकर मोहम्मद आजम खान तक ने गिनाई थीं।
कम्युनिस्टों का अवसरवाद कई बार सामने आ चुका है, लेकिन पिछली यूपीए सरकार के दौरान उन्होंने जिस तरह मनमोहन सरकार से समर्थन लेने के बाद उन मायावती को प्रधानमंत्री बनाने का बीड़ा उठाया, जिनके खिलाफ खुद वाम मोर्चे के दिग्गज नेता मंचों से भाषण कर चुके हैं, तब लगा कि मार्क्स और लेनिन की वैचारिक विरासत का दावा करने वाले भारतीय कम्युनिस्ट वैचारिक रूप से कितने खोखले हो चुके हैं।
ममता बनर्जी, करुणनिधि, जयललिता, चंद्रबाबू नायडू, देवेगौड़ा, ओमप्रकाश चौटाला, नवीन पटनायक जैसे छत्रपों ने मुद्दों से ज्यादा मौके के हिसाब से ही सियासी फैसले लिए हैं। धर्मनिरपेक्षता का दावा करने वाले इन छत्रपों ने भाजपा से हाथ मिलाने में भी कोई संकोच नहीं किया और गुजरात के दंगों के बाद भी इनका राजनीतिक जमीर नहीं जागा।
ममता, जयललिता, करुणानिधि और देवेगौड़ा तो मौके के मुताबिक कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस से हाथ मिलाते ही रहते आए हैं। गाँधी, लोहिया, जयप्रकाश की विरासत का दावा करने वाले शरद यादव, रामविलास पासवान, लालूप्रसाद यादव, नीतीश कुमार जैसे नेता भी इस सबसे अछूते हैं। कुल मिलाकर भारतीय राजनीति और सामाजिक नेतृत्व अवसरवाद के दलदल में बुरी तरह फँस गया है।
सोमवार, 1 फ़रवरी 2010
विशेष
डॉक्टर्स रिलेटेड हर जानकारी साइट
क्या आप बीमार हैं और ट्रीटमेंट करा के हार चुके हैं? नये डॉक्टर की तलाश में हैं, या फिर पहली बार आप डॉक्टर के पास जाना चाहते हैं, तो घबराए नहीं। आज के हाइटेक युग में आप यह सुविधा घर बैठे हासिल कर सकते हैं। बस आपको एक क्लिक करने की देर है। यानि वेबसाइट पर सब कुछ उपलब्ध है।
वेबसाइट पर डॉक्टर्स ही नहीं, उनसे जुड़ी तमाम महत्वपूर्ण जानकारियां भी मिल जाएंगी। कहें तो साइट से उनकी डिग्री, फीस और शेड्यूल के बारे में भी जानकारी हासिल कर सकते हैं। इसके लिए आपको www.inspectclinic.weebly.com को खंगालना होगा। फिर तो डॉक्टर्स व उनसे जुड़ी सारी जानकारियां मिल जाएंगी। मसलन आप हार्ट प्राब्लम के इलाज के लिए कार्डियोलॉजी को ढूंढ़ रहे हैं तो कार्डियोलॉजी के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा। यहां तक कि बेवसाइट पर डॉक्टर खुद अपना प्रोफाइल भी अपडेट कर सकते हैं और ब्लॉग पर अपना अनुभव भी डाल सकते हैं।
नाखुश हैं तो करें कंप्लेन
सबसे खास बात यह कि अगर आप डॉक्टर के इलाज से नाखुश हैं तो यहां कंप्लेन भी कर सकते हैं।हां, इसके लिए आपको अपना फोन नंबर और ईमेल आईडी डालना होगा। यह भी बताना होगा कि कहां पर डॉक्टर ने गलती की है। इस संबंध में वेबसाइट से जुड़े अमृत कहते हैं कि साइट में इंडिया के महत्वपूर्ण डॉक्टर्स व हॉस्पीटल के भी लिंक दिए गए हैं, जिन्हें नेट यूज करने में प्राब्लम होती है, उसके लिए हेल्प लाइन नंबर भी दिया गया है, जिससे और भी रिलेटेड जानकारी ले सकते हैं।
क्या आप बीमार हैं और ट्रीटमेंट करा के हार चुके हैं? नये डॉक्टर की तलाश में हैं, या फिर पहली बार आप डॉक्टर के पास जाना चाहते हैं, तो घबराए नहीं। आज के हाइटेक युग में आप यह सुविधा घर बैठे हासिल कर सकते हैं। बस आपको एक क्लिक करने की देर है। यानि वेबसाइट पर सब कुछ उपलब्ध है।
वेबसाइट पर डॉक्टर्स ही नहीं, उनसे जुड़ी तमाम महत्वपूर्ण जानकारियां भी मिल जाएंगी। कहें तो साइट से उनकी डिग्री, फीस और शेड्यूल के बारे में भी जानकारी हासिल कर सकते हैं। इसके लिए आपको www.inspectclinic.weebly.com को खंगालना होगा। फिर तो डॉक्टर्स व उनसे जुड़ी सारी जानकारियां मिल जाएंगी। मसलन आप हार्ट प्राब्लम के इलाज के लिए कार्डियोलॉजी को ढूंढ़ रहे हैं तो कार्डियोलॉजी के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा। यहां तक कि बेवसाइट पर डॉक्टर खुद अपना प्रोफाइल भी अपडेट कर सकते हैं और ब्लॉग पर अपना अनुभव भी डाल सकते हैं।
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सबसे खास बात यह कि अगर आप डॉक्टर के इलाज से नाखुश हैं तो यहां कंप्लेन भी कर सकते हैं।हां, इसके लिए आपको अपना फोन नंबर और ईमेल आईडी डालना होगा। यह भी बताना होगा कि कहां पर डॉक्टर ने गलती की है। इस संबंध में वेबसाइट से जुड़े अमृत कहते हैं कि साइट में इंडिया के महत्वपूर्ण डॉक्टर्स व हॉस्पीटल के भी लिंक दिए गए हैं, जिन्हें नेट यूज करने में प्राब्लम होती है, उसके लिए हेल्प लाइन नंबर भी दिया गया है, जिससे और भी रिलेटेड जानकारी ले सकते हैं।
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