रविवार, 24 जुलाई 2011

मंत्रों से बनती है सेहत, बढ़ता है सौन्दर्य

मंत्र शक्ति का शरीर पर सकारात्मक प्रभाव
सकारात्मक ध्वनियां शरीर के तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ती हैं जबकि नकारात्मक ध्वनियां शरीर की ऊर्जा तक का ह्रास कर देती हैं।
मंत्र और कुछ नहीं बल्कि सकारात्मक ध्वनियों का समूह है जो विभिन्न शब्दों के संयोग से पैदा होते हैं। दुनिया के सभी धर्मों में मंत्रों के महत्व को स्वीकार किया गया है।
जिस तरह मुस्लिम संप्रदाय में कुरान की आयतों को मंत्रों के रूप में भी स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रयोग किया जाता है उसी तरह ईसाई समाज भी बाईबिल के सूत्र वाक्यों का प्रयोग करते हैं।
मंत्रों का हमारे शरीर और मस्तिष्क पर दो कारणों से गहरा प्रभाव पड़ता है। पहला यह कि ध्वनि की तरंगें समूचे शरीर को प्रभावित करती हैं।
दूसरा यह कि लगातार हो रहे शब्दोच्चार के साथ भावनात्मक ऊर्जा का समग्र प्रभाव हम तक पहुंचता है। मंत्रों से हमारे शरीर का स्वस्थ रहने से सीधा संबंध है।
मंत्रों से निकली ध्वनि शरीर के उन सेलों के संवेगों को ठीक करने में सक्षम है जो किसी कारण अपनी स्वाभाविक गति या लय खो बैठते हैं।
सेलों के अपनी गति से हट जाने से ही हम बीमार होते हैं।
मंत्रों की ध्वनि से हमारे स्थूल और सूक्ष्म शरीर दोनों सकारात्मक रूप से प्रभावित होते हैं।
हमारे शरीर को घेरने वाला रक्षा कवच या 'औरा' पर भी इसका ऐसा ही प्रभाव पड़ता है।
हम जैसे ही कोई शब्द सुनते हैं, उसके प्रति भावनात्मक रूप से प्रतिक्रिया करते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम उस शब्द से मानवीय समाज पर पड़ने वाले प्रभाव से परिचित हैं।
मंत्रों से हमें आध्यात्मिक शक्ति ही नहीं मिलती बल्कि सेहत और सौन्दर्य का राज भी इन्हीं मंत्रों में छुपा है।

सेहत और सौन्दर्य के लिए जाना-माना मंत्र है -
देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि मे परमं सुखम
रूपम् देहि़ जयम् देहि यशो देहि द्विषो जहि।

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