सोमवार, 17 जनवरी 2011

छत्तीसगढ़ की खबरें

राजनीतिक विवाद में फंसा एक लाख करोड़ का काम
केंद्र और राज्य के राजनीतिक झगड़े में प्रदेश की एक लाख तीन हजार 700 करोड़ रुपए की योजनाएं लटक गई हैं। यह आंकड़ा सूबे के सालाना बजट का करीब चार गुना है।
1365 किमी सड़क अधर में :
नेशनल हाईंवे की 10 सड़कों के निर्माण के लिए 2007 से केंद्र-राज्य के बीच खेल जारी है। केंद्र और राज्य के बीच कंपनी बनाकर काम करने का करार हुआ।

कंपनी बनाने के बाद राज्य की ओर से भेजे गए एमओयू ड्राफ्ट को केंद्र ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उनकी शर्तो और मापदंडों के अनुसार कंपनी बनाई जाए।
आखिरकार 2008 में पांच सड़कों के निर्माण पर सहमति बनी। उसके बाद कहा गया कि दो सड़कें बिलासपुर से उड़ीसा बॉर्डर और सरायपाली-सारंगढ़-रायगढ़ तक राज्य बनाए। बाद में केंद्र की नीति बदल गई। अब सड़कों को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत बनाने का प्रस्ताव आया।
इसके तहत राज्य की छह सड़कों को फिजिबल नहीं पाया गया।सरायपाली-सारंगढ़-रायगढ़ प्रोजेक्ट को केंद्र ने मंजूरी के बाद कैंसिल कर दिया। राज्य का पीडब्लूडी विभाग आठ माह से बिलासपुर-उड़ीसा बॉर्डर तक की सड़क के लिए टेंडर किए बैठा है, लेकिन केंद्र से हरी झंडी नहीं मिल रही।
पिछले दो साल से राज्य को सड़क मरम्मत के लिए राशि (सालान सौ करोड़) भी नहीं दी रही है। इससे सालाना 100 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। राज्य में कुल 22क्क् किमी नेशनल हाईवे है।

अड़ंगे से अटकी सड़कें

सड़क लंबाई (किमी में)

आरंग-सरायपाली 15

रायपुर-धमतरी 81

बिलासपुर-उड़ीसा 197

चिल्फी-सिमगा 125

धमतरी-जगदलपुर 216

पत्थलगांव-जशपुर 160

अंबिकापुर-पत्थलगांव 82

बिलासपुर-अंबिकापुर 141

रायगढ़-सरायपाली 87

महत्वपूर्ण - पीएमआरवाई पर 75 फीसदी काम होने के बावजूद राज्य के 1500 करोड़ रुपए रुके हुए हैं।
कई चिट्ठियां लिख चुका
"राज्य की सड़कों के निर्माण पर जल्द निर्णय लेने के लिए केंद्र सरकार को कई पत्र लिखे गए हैं, लेकिन इसका असर नहीं हुआ। केंद्र का रवैया राज्य के प्रति सकारात्मक नहीं है।"
- बृजमोहन अग्रवाल, पीडब्लूडी मंत्री

सबकुछ तो बता दिया
"केंद्र द्वारा चाही गई जानकारी भेज दी गई है। इन योजनाओं के मंजूर हो जाने से न केवल किसानों को फायदा होगा, बल्कि राज्य के लोगों को रोजगार भी मिलेगा। "
- चंद्रशेखर साहू, कृषि मंत्री , छत्तीसगढ़

बिजली पर क्लियरेंस का अंधियारा
राज्य में प्रस्तावित 15 बिजली परियोजनाओं को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी मिलनी बाकी है। 21655 मेगावाट की इन परियोजनाओं में करीब 97 हजार करोड़ रुपए का निवेश होना है।
वजह : केंद्र ने परियोजनाओं के लिए पहले कोल ब्लॉकों का आबंटन कर दिया और अब पर्यावरण मंत्रालय उन इलाकों को नो गो एरिया घाषित कर रहा।
राज्य करे पहल
वित्तीय मामलों के विशेषज्ञ रामचंद्र सिंहदेव के अनुसार राजनीतिक झगड़े की मूल वजह श्रेय लेने की होड़ है। केंद्र चाहता है कि उसके मद से पैसा आ रहा है तो उसका नाम तो लिखा जाए, वहीं राज्य सरकार हर प्रोजेक्ट को अपना बताने पर तुली रहती है।
दोनों पक्षों का बात करना और समन्वय के साथ काम करना ही इसका समाधान है। इसके लिए राज्य सरकार को ही विशेष पहल करनी होगी।
अब आगे क्या..
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के मुताबिक केंद्र सरकार भाजपा शासित राज्यों के साथ भेदभाव कर रही है। छत्तीसगढ़ से संबंधित विभिन्न मामलों के बाबत केंद्रीय वित्त और शहरी विकास मंत्री से अगले सप्ताह दिल्ली में विस्तार से बात की जाएगी।

मदकू द्वीप का राष्ट्रीय मसीही मेला
.शिवनाथ नदी के सुरम्य टापू मदकूद्वीप पर राष्ट्रीय मसीही मेले का आयोजन 7 से 13 फरवरी तक किया जा रहा है। मेले का यह 102 वां वर्ष होगा। देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु इसमें शिरकत करेंगे।
मदकूद्वीप रायपुर-बिलासपुर मार्ग पर बैतलपुर से तीन किलोमीटर पूर्व दिशा की ओर स्थित है। इस बार 7 से 11 फरवरी तक मेला रीट्रीय होगी जिसमें पादरी व सेवकगण शामिल होंगे। 9 से 13 फरवरी तक श्रद्धालु मेले में बाइबिल के प्रवचनों और भजनों से ओतप्रोत होंगे।
प्रधान वक्ता दमोह के पादरी जॉश हावर्ड होंगे। मेले में 8 फरवरी को पादरियों के लिए वाद-विवाद का विषय रखा गया है- कलीसिया में आपसी सामंजस्य की कमी। इसी दिन परिचर्चा भी होगी। बाइबिल प्रश्नोत्तरी उत्पत्ति की किताब से होगी।
रात को कैंप फायर का आयोजन होगा। 9 फरवरी को तात्कालिक भाषण और पारितोषिक वितरण होगा। 10 फरवरी से मेला समाप्ति तक रोज सुबह 5 बजे प्रभात फेरी निकाली जाएगी जिसमें भजन गाते हुए मसीहीजन द्वीप का भ्रमण करेंगे। रोज सुबह 5.30 बजे क्रूस की छाया में आराधना होगी।
बच्चों और युवाओं को धार्मिक-नैतिक शिक्षा देने क्लास लगाई जाएंगी। 10 फरवरी को वाद-विवाद प्रतियोगिता, 11 फरवरी को काव्य पठन प्रतियोगिता, 12 फरवरी को गीत-संगीत प्रतियोगिताएं होंगी।
13 फरवरी को आराधना के साथ प्रभुभोज का पवित्र संस्कार संपन्न होगा। मेला मैनेजर जयदीप राबिंसन ने बताया कि तंबू और झोपड़ी की बुकिंग के लिए मेला कमेटी से संपर्क किया जा सकता है। महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग घाटों का इस्तेमाल किया जाएगा। चर्च प्रतिनिधियों को पादरी या सचिव से प्रमाणित पत्र लाना होगा।


उपचुनावों में भाजपा ने लहराया परचम
राज्य में हुए अब तक के उप चुनावों में भाजपा ने कांग्रेस पर बढ़त बना रखी है। कुल 10 उप चुनावों में से छह में भाजपा को जीत मिली है जबकि कांग्रेस ने चार दफे बाजी मारी है। संजारी बालोद में ग्यारहवां उप चुनाव होगा और इसमें भी कांग्रेस भाजपा में सीधी भिड़ंत होगी, लेकिन भाजपा के पूर्व सांसद ताराचंद साहू के स्वाभिमान मंच की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
छत्तीसगढ़ राज्य को बने दस साल हो गए हैं। इस दौरान राज्य में एक लोक सभा सहित नौ विधान सभा सीटों के लिए उप चुनाव हुए हैं। कांग्रेस ने एक लोक सभा व तीन विधान सभा चुनाव और भाजपा ने छह विधान सभा चुनाव जीते हैं। संजारी बालोद में बढ़त बनाने के लिए दोनों पार्टियों में जोरदार मुकाबला होने की उम्मीद है।
दुर्ग जिले के संजारी बालोद में प्रदेश की तृतीय विधान सभा का तीसरा उपचुनाव होगा। इससे पहले वैशालीनगर और भटगांव सीटों के लिए उपचुनाव हो चुके हैं। तीसरी विधान सभा के लिए 2008 में चुनाव हुए थे। संजारी बालोद सीट भाजपा विधायक मदनलाल साहू के निधन से खाली हुई है।
वहां पहली दफे उपचुनाव होंगे। वैशालीनगर सीट उप चुनाव में मतदाताओं ने बाजी पलट दी। कांग्रेस के भजन सिंह निरंकारी विजयी रहे। सरगुजा जिले के भटगांव के भाजपा विधायक रविशंकर त्रिपाठी की सड़क हादसे में मौत के बाद वहां उप चुनाव कराना पड़ा।
स्व. त्रिपाठी की पत्नी रजनी त्रिपाठी को मतदाताओं की सहानुभूति के दम पर जीत हासिल हुई। श्रीमती त्रिपाठी को 74 हजार 98 और कांग्रेस के यूएस सिंहदेव को 39 हजार 236 वोट मिले। राज्य के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने जब सरकार की बागडोर थामी थी तब वे विधान सभा सदस्य नहीं थे।
उन्होंने अपने गृह नगर से चुनाव लड़ने बड़ा राजनीतिक खेल खेला। मरवाही से कांग्रेस की बजाए भाजपा विधायक रामदयाल उइके को अपने पाले में लिया और सीट खाली करवाई। उप चुनाव में उन्होंने भाजपा के अमर सिंह खुसरों को रिकार्ड करीब 51 हजार वोटों से हराया।
श्री जोगी को 71 हजार 211 और श्री 20 हजार 453 वोट मिले। 2003-04 में विधान सभा चुनावों में कांग्रेस की करारी हार के बाद जब भाजपा बहुमत के साथ सत्ता में आई तो मुख्यमंत्री बने डॉ. रमन सिंह। वे भी श्री जोगी की तरह विधान सभा के सदस्य नहीं थे। उन्होंने राजनांदगांव जिले की डोंगरगांव सीट से उप चुनाव लड़ा।
यह सीट भाजपा विधायक प्रदीप गांधी ने श्री सिंह के लिए खाली की थी। पूर्व मंत्री और राजघराने की गीतादेवी सिंह ने कांग्रेस की टिकट पर श्री सिंह को कड़ी टक्कर दी थी। श्री सिंह को 42 हजार 115 और श्रीमती सिंह को 32 हजार 4 वोट मिले।
पूर्व विधान सभा अध्यक्ष राजेंद्र शुक्ल के निधन से 2006 में बिलासपुर जिले की कोटा सीट खाली हुई। श्री जोगी ने अपनी पत्नी डॉ. रेणु जोगी को कांग्रेस की टिकट दिलवाकर चुनाव लड़वाया और जीत हासिल की।
श्रीमती जोगी को 59 हजार 465 और भाजपा के भूपेंद्र सिंह को 35 हजार 995 वोट मिले।राजनांदगांव के भाजपा सांसद प्रदीप गांधी रिश्वत लेकर संसद में सवाल पूछने के प्रकरण में फंस गए। तब उन्हें इस्तीफा देने पड़ा।
2007 में इस लोक सभा सीट के लिए उप चुनाव में खैरागढ़ के कांग्रेस विधायक देवव्रत सिंह ने विजय पताका फहराई। उन्हें 3 लाख 45 हजार 9 और भाजपा के लीलाराम भोजवानी को 2 लाख 93 हजार 395 वोट मिले।
2004 में अकलतरा विधान सभा उप चुनाव में भाजपा के छतराम देवांगन ने कांग्रेस के डॉ, राकेश कुमार सिंह को हराया। उन्हें 39 हजार 895 वोट और श्री सिंह को 29 हजार 187 वोट मिले। 2007 में खैरागढ़ सीट के लिए उप चुनाव में श्री देवव्रत की बीवी पदमा देवी को कांग्रेस की टिकट मिली पर वे भाजपा के कोमल जंघेल से हार गईं।
श्रीमती सिंह को 41 हजार 962 और श्री जंघेल को 57 हजार 949 वोट मिले। जांजगीर जिले की मालखोरौदा सीट पर बहुजन समाज पार्टी का कब्जा था। हाईकोर्ट ने एक याचिका के आधार पर लालसाय खुटे का निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया। उपचुनाव में यहां से भाजपा ने जीत हासिल की।
भाजपा के निर्मल सिन्हा ने 45 हजार 576 और कांग्रेस के मोहन मानी ने 23 हजार 589 वोट बटोरे। 2007-08 में केसकाल में उपचुनाव हुए। यहां भाजपा के सेवकराम नेताम ने 58 हजार 362 वोट पाकर कांग्रेस के बुधसन मरकाम (36 हजार 476 वोट)को हराया।

विधानसभा उपचुनाव जीते भाजपा ने
डोंगरगांव - डॉ. रमन सिंह, अप्रैल 2004
अकलतरा - छतराम देवांगन, अप्रैल 2004
खैरागढ़ - कोमल जंघेल, जून 2007
मालखरौदा - निर्मल सिन्हा, जून 2007
केशकाल - सेवकराम नेताम, 2007-08
भटगांव - रजनी त्रिपाठी, 2010

कांग्रेस ने जीते उपचुनाव
मारवाही - अजीत जोगी, 2001
कोटा - डॉ. रेणु जोगी, 2006
राजनांदगांव - देवव्रत सिंह, 2007 (लोकसभा)
वैशालीनगर - भजनसिंह निरंकारी, 2010

"भाजपा ने सत्ता में रहते हुए शासन का खुलकर दुरुपयोग कर चुनाव जीते हैं। भ्रष्चार के पैसे का जमकर उपयोग किया है। अब जनता जागरूक हो गई है। वह सब समझती है। संजारी-बालोद में हम रणनीति के तहत मैदान में उतरेंगे।"
धनेंद्र साहू, पीसीसी अध्यक्ष
"भाजपा की लगातार जीत उसकी सरकार द्वारा समाज के प्रत्येक वर्ग के हित में किए गए कार्यो का नतीजा और संगठन का मजबूत आधार है। संजारी बालोद में भी हम एकमत होकर मैदान में उतरने संकल्पित हैं।"
शिवरतन शर्मा,
महामंत्री भाजपा

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